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पूरी ताकत होने पर ही तालिबान से समझौता संभव – अब्दाली

पाक के इशारे पर तालिबान अफगानिस्तान में रह रहे हिंदू  सिखों को जानबूझ कर निशाना बना रहा है. दो दिन पहले मारे गए सिख  हिंदू सिर्फ वहां रह रहे हिंदुस्तानियों के ही नेता नहीं थे बल्कि अफगानिस्तान की पॉलिटिक्स में बढ़ चढ़ भाग ले रहे थे. वह किसी भी अफगानी से कम देशभक्त नहीं थे. वहां के सिखों  हिंदुओं पर हमला अफगानिस्तान की देशभक्ति पर हमला है. ये बातें हिंदुस्तान में अफगानिस्तान के राजदूत डा शायदा मोहम्मद अब्दाली कहीं.
अमर उजाला से खास वार्ता में अब्दाली ने बोला कि अफगानिस्तान बड़े राष्ट्रों की आपसी प्रतिस्पर्धा का दंश झेल रहा है. अफगानिस्तान की समस्या उसकी अपनी नहीं है. अब्दाली ने चेताया कि अफगानिस्तान में आतंकवाद का जो खेल चल रहा है उससे पूरी संसार प्रभावित होगी. यह हैरानी की बात  है कि सब जानते बूझते हुए पूरी संसार अफगानिस्तान के दशा पर चुप क्यों है. अफगानिस्तान की स्थिति से हिंदुस्तान को सबसे ज्यादा चिंतित होने की आवश्यकता है. इससे निबटने के लिए हिंदुस्तान को बहुत कुछ करना होगा. अब्दाली के मुताबिक इसके निबटने के लिए सिर्फ हिंदुस्तान  अफगानिस्तान नहीं बल्कि पूरी संसार को मिलकर कुछ ऐसा करना होगा जो आज तक नहीं किया गया है.

वहीं अब्दाली ने माना कि 90 के दशक तक वहां दो लाख से ज्यादा हिंदू  सिख थे. यह अफसोस की बात है कि अब अफगानिस्तान में इनकी संख्या एक से दो हजार ही रह गई है. यह बड़े सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है.

आतंक का वास्तविक खिलाड़ी पाक :

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अफगानिस्तान के सिख  हिंदुओं की मर्डर की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली है. लेकिन अब्दाली का मानना है कि यह सिर्फ नाम का उलट फेर है. असल खिलाड़ी पाक है, जिसके हाथ में आतंकवाद की चाबी है. वह उस हर नेता को निशाना बनता है, जो पॉलिटिक्स के सहारे अमन चैन लाने की प्रयास करते हैं. यह आतंकवाद का कोई नया रुप नहीं. बल्कि बड़े सधे हुए सुनियोजित तरीके से नाम बदल कर की जाने वाली करतूत है.

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अब्दाली ने माना कि तालिबान के साथ शांति समझौता तभी संभव है, अफगानिस्तान के पास पूरी ताकत हो. अफगानिस्तान इसके लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन उस के पास फिल्हालउतनी ताकत नहीं. इसके लिए हिंदुस्तान समेत संसार के आतंकवाद प्रभावित राष्ट्रों को एक मंच पर आना होगा. सिर्फ एक राष्ट्र पाक को काबू कर संसार भर को आतंकवाद के दंश से बचाया जा सकता है. अफगानिस्तान इस प्रायोजित आतंकवाद की मूल्य चुका रहा है. अगर पूरी संसार एक साथ आने को तैयार है तो अफगानिस्तान  बड़ी मूल्य चुकाने को तैयार है.

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