Wednesday , December 19 2018
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स्वच्छ सर्वेक्षण फीडबैक कैटेगरी में इंदौर को

स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ को जो तीसरा जगह मिला है, उसमे शहरवासियों का अहम भूमिका है. शहरवासियों की फीडबैक के कारण चंडीगढ़ की रैंकिंग में भारी सुधार आया है, जबकि स्वच्छता से संबंधित सुविधाओं की कैटेगरी में चंडीगढ़ के अंक इंदौर  भोपाल के मुकाबले में बहुत ज्यादा पिछड़े हैं. सिटीजन फीडबैक  स्वच्छता एप की कैटेगरी में चंडीगढ़ के अंक इंदौर  भोपाल से भी ज्यादा हैं. नगर निगम ने पिछले वर्ष ज्यादा से ज्यादा फीडबैक देेने  एप लांच करवाने के लिए अभियान चलाया था. यहां तक कि एप डाउनलोड करने वाले को पार्किंग में वाहन पार्क करने की फ्री सुविधा दी गई थी.
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इंदौर का स्वच्छ सर्वेक्षण में पहला  भोपाल का दूसरा जगह हासिल हुआ है. इनके अवार्ड शनिवार को इंदौर में आयोजित समारोह के दौरान पीएम मोदी ने दिया. पीएम मोदी ने मेयर देवेश मोदगिल को तीसरे रैंक का अवार्ड सौंपा. उनके साथ नगर निगम कमिश्नर केके यादव, पूर्व कमिश्नर जितेंद्र यादव  अलावा कमिश्नर सौरभ मिश्रा मौजूद रहे. ओवरऑल चंडीगढ़ के इंदौर से 58 अंक कम हैं.
स्वच्छ सर्वेक्षण प्रतियोगिता में कुल 4 हजार अंक थे, जिसमें चंडीगढ़ को 3649 अंक मिले, जबकि पहले जगह पर रहने वाले इंदौर को 3707  भोपाल को 3689 अंक हासिल हुए हैं.ऐसे में भोपाल से चंडीगढ़ 40 अंक पीछे हैं.
सर्विस लेवल प्रोग्रेस कैटेगरी में चंडीगढ़ ने 1400 में से 1191 अंक हासिल किए हैं, जबकि इस कैटेगरी में इंदौर ने 1359  भोपाल ने 1305 अंक हासिल किए हैं. इंदौर के मुकाबले में चंडीगढ़ बेहतर सर्विस देने में 168 अंक पीछे है. अगर चंडीगढ़ सिटीजन फीडबैक में नंबर-1 पर न रहता तो पिछले वर्ष की तरह सिटी ब्यूटीफुल की रैंकिंग बहुत ज्यादा नीचे गिर जाती.पिछले वर्ष के स्वच्छ सर्वेक्षण में चंडीगढ़ को 11वां जगह हासिल हुआ था.

फीडबैक में चंडीगढ़ को मिले 1319 अंक

सिटीजन फीडबैक  स्वच्छता एप डाउनलोड करवाने की कैटेगरी में चंडीगढ़ ने 1319 अंक हासिल किए हैं, जबकि इस कैटेगरी में इंदौर नंबर-2 पर रहने वाले भोपाल से भी पीछे है.इंदौर ने इस कैटेगरी में 1159 अंक हासिल किए हैं, जबकि भोपाल ने इस कैटगरी में 1205 अंक लिए हैं. फीडबैक बढ़ाने के लिए नगर निगम के पूर्व कमिश्नर जितेंद्र यादव  अलावाकमिश्नर सौरभ मिश्रा ने स्कूलों  कालेजों में जाकर भी विद्यार्थी छात्राओं को जागरूक करते हुए एप डाउनलोड करवाया था.

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टीम ने दिए 1139 अंक

स्वच्छता सर्वेक्षण करने के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की टीम आई थी. इस टीम ने निरीक्षण करने के बाद चंडीगढ़ को 1139 अंक दिए हैं, जबकि डायरेक्ट आर्ब्जवेशन की कैटेगरी में इंदौर को 1189  भोपाल को 1179 अंक मिले हैं. इसमें भी चंडीगढ़ को कम मिले हैं.

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पिछले वर्ष 379 अंक मिले थे

पिछले वर्ष के सर्वेक्षण में फीडबैक कैटेगरी में चंडीगढ़ को 600 में से 379 अंक मिले थे, जबकि जबकि नंबर-1 पर रहने वाली सिटी इंदौर को इस कैटेगरी में 497 अंक मिले थे. पिछले वर्ष भी इंदौर नंबर-1 पर था. वर्ष 2016 में चंडीगढ़ नंबर-2 पर भी रह चुका है.

सर्विस लेवल प्रोग्रेस में यह सुविधाएं होती है शामिल

सर्विस लेवल प्रोग्रेस की कैटेगरी में चंडीगढ़ पिछड़ा है, जिसमे पांच सुविधाएं शामिल हैं. इनमें कचरा प्रबंधन एवं ट्रांसपोर्टेशन, कचरे का प्रोसेस  निपटान, खुले में शौच मुक्त, सफाई व्यवस्था  नया इनोवेशन शामिल है. चंडीगढ़ को खुले में शौच मुक्त का स्टेटस पहले से ही प्राप्त है.

दो करोड़ रुपये हुआ बर्बाद

शहरवासियों में सूखा  गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा करने की आदत पैदा करना एक सपना ही बन गया है. इसके लिए नगर निगम की ओर से शहर में दो लाख तीन हजार डस्टबिन भी फ्री बांट दिए, जिस पर नगर निगम का दो करोड़ रुपये बर्बाद किए हैं, लेकिन अलग-अलग कचरा इकट्ठा करने का सिस्टम लागू नहीं हुआ. इस मद में चंडीगढ़ पिछड़ा है क्योंकि इंदौर  भोपाल में सूखा  गीला अलग अलग कचरा इकट्ठा होता है. इस समय शहर में किसी भी वार्ड में पूरी तरह से अलग-अलग कचरा इकट्ठा करने का सिस्टम प्रारम्भ नहीं हुआ है, जबकि हजारों घरों के डस्टबिन तो टूट ही चुके हैं. इस समय न तो लोग  न ही कलेक्टर अलग अलग कचरा ले रहे हैं.

डपिंग ग्राउंड से हर कोई परेशान

बेशक शहर को तीसरा जगह हासिल हुआ है, लेकिन डड्डूमाजरा स्थित डपिंग ग्राउंड से पूरा शहर परेशान है. डडूमाजरा के निवासियों का जीना दुर्लभ हो गया है, जबकि मानसून के दिनों में पूरे शहर को यहां से दुर्गंध आती है. गारबेज प्लांट लगा होने के बावजूद डपिंग ग्राउंड में कचरा गिर रहा है. डड्डूमाजरा के निवासी यहां से डपिंग ग्राउंड शिफ्ट करने की मांग बहुत ज्यादा लंबे समय से कर रहे हैं.

इस दौरान मेयर देवेश मोदगिल ने बोला कि यह चंडीगढ़ के लिए गर्व की बात है. इंदौर में मैंने पीएम नरेंद्र मोदी से स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार प्राप्त किया. पीएम ने ही चंडीगढ़ को नगर निगम बनवाने में अहम किरदार निभाई थी. चंडीगढ़ पूरे हिंदुस्तान में तीसरे जगह पर रहा. इस पुरस्कार के लिए पूरे शहरवासी बधाई के पात्र हैं. नगर निगम के सभी पार्षद, ऑफिसर विशेष तौर पर सफाई कर्मचारियों की मेहनत से यह संभव हो पाया है. स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन बनाने के लिए मैं उनका आभार जाहीर करता हूं.
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