X
    Categories: लेख

निर्णायक कदम उठाने का वक्त

तरुण विजय
जम्मू-ंउचयक-रु39यमीर गठबंधन सरकार से भाजपा द्वारा हाथ खींच लिये जाने के तुरंत बाद आ-रु39यचर्यचकित महबूबा मुफ्ती ने जो
बयान दिया, वह आनेवाले दिनों में ब-सजय़ते तनाव तथा आतंकवादियों व अलगाववादियों के अधिक पहुंच और
आक्रामक तेवरों की -हजयलक देता है. महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भाजपा ने जिस प्रकार से गठबंधन सरकार से समर्थन लिया,
उसे सही नहीं ठहराया जा सकता है. संपूर्ण जम्मू क्षेत्र को -रु39यात्रु क्षेत्र मान कर तथा अपनी मांसपे-िरु39यायां दिखला कर वहां
-रु39याांति कैसे लायी जा सकती है? महबूबा मुफ्ती ने यह बात एक दर्द और तप्त हृदय से कही है, क्योंकि वे संभवतरू चाहती
थीं कि गठबंधन को यदि तोड़ना है, तो उसकी पहल पीडीपी के हाथ में होनी चाहिए, ताकि वह अपने समर्थकों
को ब-सजय़ा सकें. साथ ही, इसे अपने हक में भुना सकें और उन्हें राजनीतिक पराक्रम हासिल हो. बहुत लोगों को
मालूम था कि वे जल्दी ही गठबंधन को तोड़ कर भाजपा को एक अपमानजनक स्थिति में रखते हुए राज्यपाल को
इस्तीफा देनेवाली थीं. उस स्थिति में महबूबा न केवल पत्थरबाजों, बल्कि पाकिस्तान समर्थक वर्ग का जबरदस्त सहयोग
प्राप्त कर लेतीं. इतना ही नहीं, मोदी विरोधी सेकुलर खेमे की भी वो हीरो बन जातीं. अमित -रु39यााह और राम माधव
ने यह मौका नहीं दिया, जिसका उन्हें बेहद मलाल रहेगा. अब वे प्रयास करेंगी कि इस अचानक टूटन से जो उन्हें -हजयटका
लगा है, उसका खामियाजा वे अतिवादी स्वरों को अधिक बुलंद कर स्वयं को उस वर्ग का निर्विवाद नेता घो-िुनवजयात
करें, तथा यदि चुनाव होते हैं, तो उनमें केवल भाजपा ही नहीं, उमर अब्दुल्ला के ने-रु39यानल कॉफ्रेंस के तेवरों
को भी परास्त करें. यह स्थिति भाजपा और केंद्र सरकार के लिए तलवार की धार पर चलने समान नाजुक है.

सामान्यतः जनता उनसे अपेक्षा करती है कि अब जब गठबंधन रहा ही नहीं, तो भाजपा आतंकवादियों, जिहादियों तथा
पत्थरबाजों के विरुद्ध निर्ममतापूर्वक कार्रवाई करे. इस बीच देखा गया कि जम्मू क्षेत्र और -रु39यो-ुनवजया दे-रु39या में इस गठबंधन
सरकार के -सजयीलेपन, सैनिक विरोधी व पत्थरबाजों के प्रति -सजयीला रवैया अपनाने के विरुद्ध आक्रो-रु39या पनप रहा था.
जम्मू-ंउचयक-रु39यमीर में भाजपा-ंउचयपीडीपी गठबंधन का बो-हजय अंततः वहां की जनता और सुरक्षा बलों को उठाना पड़ा
था. गठबंधन टूटने पर महबूबा मुफ्ती के अलावा किसी को भी आ-रु39यचर्य नहीं हुआ. क्योंकि न केवल जम्मू-ंउचयक-रु39यमीर
के दे-रु39याभक्त लोग, बल्कि -रु39यो-ुनवजया दे-रु39या के क-रु39यमीर-ंउचयप्रेक्षक भी आतंकवाद और पाकिस्तान के प्रति गहरी हमदर्दी रखनेवाली
पीडीपी के साथ भाजपा का गठबंधन आ-रु39यचर्यजनक, अस्वाभाविक और दे-रु39या के प्रति नि-ुनवजयठा रखनेवालों का मनोबल
गिराने वाला सम-हजय रहे थे. हाल ही में राइफल मैन औरंगजेब और -रु39यराइजिंग क-रु39यमीर-रु39य के संपादक -रु39याुजात बुखारी की निर्मम
हत्या ने -रु39याायद भाजपा के सब्र की सीमा लांघ दी और जैसा महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया से जाहिर है, उनको बताये बिना
दिल्ली में भाजपा महासचिव राम माधव ने गठबंधन तोड़ने की घो-ुनवजयाणा कर दी. मामला एकदम गुप्त रखा गया.
जम्मू-ंउचयक-रु39यमीर के सभी मंत्रियों को पार्टी अध्यक्ष अमित -रु39यााह ने जरूरी वार्ता के लिए दिल्ली बुलाया. महबूबा मुफ्ती को
भनक तक नहीं लगी. क-रु39यमीर में जिस प्रकार हालात बिगड़ रहे थे और भाजपा मंत्रियों की स्थिति लगभग अप्रभावी
बनाने में मुफ्ती पूरी को-िरु39या-रु39या कर रही थीं, उसे देखते हुए अनुमान है कि गठबंधन तोड़ने का निर्णय बहुत पहले
हो चुका होगा. केवल उसकी घो-ुनवजयाणा के लिए सही समय की प्रतीक्षा थी. एसएसपी अयूब पंडित, फौजी अफसर उमर फैयाज,
पत्थरबाजों के ब-सजय़ते हौसले, सेना और अर्ध-ंउचयसैनिक बलों पर जिहादी पत्थरबाजों के खुले बेरोकटोक आक्रमण
और हाल ही में औरंगजेब और -रु39याुजात बुखारी की नृ-रु39यांस हत्याओं ने स्प-ुनवजयट कर दिया कि महबूबा की आतंकवादियों
के खिलाफ कार्रवाई में कोई दिलचस्पी नहीं है. क-रु39यमीर में तैनात एक वरि-ुनवजयठ अधिकारी के अनुसार हर दिन, हर फैसले
से महबूबा मुफ्ती पीडीपी के वोट बैंक को सींच रही थीं. महबूबा की दिलचस्पी न सरकार में थी, न केंद्र द्वारा
दिये गये धन के सही उपयोग में. वह आतंकवादी-ंउचय पत्थरबाज-ंउचय पाकिस्तान समर्थक तत्वों को यह बताना चाहती थी कि
भाजपा उनके सहारे चल रही है और वह भाजपा की नीतियां कतई लागू न होने देंगी. बीच-ंउचयबीच में पाकिस्तान से
बातचीत की हिमायत, हुर्रियत के प्रति नरमी, पत्थरबाजों की रिहाई समेत अनेक मामलों के जरिये महबूबा के मन का
-हजयुकाव पता चल रहा था. हालांकि, यह ईमानदारी की बात है कि भाजपा ने अपनी क्षति की कीमत पर भी गठबंधन चलाने
की पूरी को-िरु39या-रु39या की. जल विद्युत परियोजनाएं, रेलमार्ग, राजमार्ग और -रु39योरे क-रु39यमीर क्रिकेट स्टेडियम में अस्सी हजार
करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की घो-ुनवजयाणा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की. मोदी क-रु39यमीर को आर्थिक
विकास, -सजयांचागत प्रगति की ओर ले जाना चाहते थे. ये तब तक संभव नहीं, जब तक अतिवादी जेहादियों का समूल खत्म न
किया जाये. क-रु39यमीर के साथ अब यह गठबंधन के प्रयोग समाप्त कर एक बड़ी मुहिम के तहत वहां से अलगाववादियों,
जेहादियों, पत्थरबाजों की यदि समाप्ति अब नहीं होगी, तो उसके समय के लिए कितनी प्रतीक्षा करनी होगी? सेना व अन्य
सुरक्षा बलों को क-रु39यमीर में पनप रहे कायर आतंकवादियों को समाप्त करने की खुली छूट मिले और जो लोग, ज्यादातर
क-रु39यमीरी -रु39याांति से भारतीय के नाते तरक्की की जिंदगी जीना चाहते हैं, उनको संरक्षण तथा विकास का पूरा अवसर मिलना
चाहिए.
क-रु39यमीर के मुसलमान तीन-ंउचयचार पी-सजय़ी पहले हिंदू थे. पाकिस्तान के जन्म को वैचारिक समर्थन व बल देने वाले -रु39याायर
मोहम्मद इकबाल क-रु39यमीरी हिंदू थे. उनके पिता किसी मामले में फंस गये. माफी के लिए एक ही रास्ता था-ंउचय इस्लाम
कुबूलो. वह मुसलमान बन गये, पर -रु39यार्म से चुपचाप लाहौर जा बसे. आज भी अधिकां-रु39या क-रु39यमीरी मुसलमान अपने नाम के
आगे रैना, भट्ट आदि-ंउचयआदि हिंदू जातियां लिखते हैं. उनका पाकिस्तान से क्या संबंध? क्या आस्था बदलने से पूर्वज,
जमीन के रि-रु39यते हिंदुस्तानियत भी बदल जाती है? अब क-रु39यमीर में निर्णायक कदम उठा कर वहां से स्थायी तौर पर आतंक
समाप्त करने और विभाजक धारा 370 हटाने का वक्त आ गया है.
0000

Loading...
Loading...
News Room :

Comments are closed.