Tuesday , November 20 2018
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मुस्लिम लड़के से शादी के बाद नाम न बदलने पर पासपोर्ट रोका

‘आपके साथ तो मसला है। आपने मुस्लिम से शादी की है तो आपका नाम तन्वी सेठ कैसे हो सकता है? यह आपकी ड्यूटी है कि शादी के बाद अपना नाम बदलवाएं, हर लड़की को ऐसा करना पड़ता है।’ राजधानी की एक युवती तन्वी सेठ ने आरोप लगाया है कि जब वह रतन स्क्वॉयर स्थित पासपोर्ट ऑफिस में अपना पासपोर्ट बनवाने गई तो वहां के स्टाफ विकास मिश्रा ने ऐसे सवाल करते हुए उनका उत्पीड़न किया और उसका व पति का पासपोर्ट रोक दिया। तन्वी ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को टैग करते हुए ट्विटर पर इसकी शिकायत की है।
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तन्वी ने बताया कि उन्होंने और उनके पति अनस सिद्दीकी ने पासपोर्ट के लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन किया था। पति का पासपोर्ट रीन्यू होना था। जब वे पासपोर्ट ऑफिस पहुंचे तो सभी काउंटर पर क्लीयरेंस मिलने के बाद सी-5 काउंटर पहुंचे। वहां विकास ने दस्तावेज जांचते समय सवाल किया कि अनस की पत्नी का नाम तन्वी कैसे हो सकता है… ऐसे कई आपत्तिजनक सवाल  अधिकारी ने किए। तन्वी का आरोप है कि विकास काफी देर तेज आवाज में अभद्रता से बहस करते रहे।

विदेश मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट
घटना को लेकर विदेश मंत्रालय के सीपीवी (काउंसलर, पासपोर्ट एवं वीजा) सचिव डीएम मुले ने कहा कि उन्हें घटना का खेद है। उन्होंने लखनऊ क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से रिपोर्ट मांगी है, जिस पर वे उचित कार्रवाई करेंगे।

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मुझे नाम चुनने का हक
मामले में पीड़ित युवती तन्वी सेठ का कहना है, ‘मैं 12 साल से शादीशुदा हूं और नाम नहीं बदला है। सभी दस्तावेज तन्वी के नाम पर ही है। मुझे अपना नाम चुनने का पूरा हक है।’

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यह मोरल पुलिसिंग नहीं चलेगी

तन्वी के अनुसार, यह धार्मिक पूर्वाग्रह और मोरल पुलिसिंग है। उन्हें मिश्रा के व्यवहार से अपमान महसूस हुआ है। घटना के दौरान अत्यधिक रोने की वजह से उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई, और उन्हें इनहेलर का उपयोग करना पड़ा। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि एक सरकारी कार्यालय में उनका इस प्रकार उत्पीड़न हो सकता है।

एपीओ ने कहा समस्या नहीं
तन्वी के अनुसार, एपीओ ऑफिस के अधिकारियों ने उनके दस्तावेज देखकर कहा कि पासपोर्ट बनने में कोई समस्या नहीं है। बल्कि यह भी कहा कि मिश्रा के खराब व्यवहार की पहले भी कई शिकायतें आई हैं, वे इसके लिए माफी चाहते हैं। इसी दौरान उनके पति वहां (पासपोर्ट ऑफिस) पहुंचे और बताया कि उनका भी आवेदन रुका हुआ है क्योंकि उन्होंने अपनी पत्नी के नाम का उल्लेख किया है। उन्हें भी कहा गया है कि तन्वी के सभी दस्तावेजों में उनका मुस्लिम नाम रखा जाए।

पासपोर्ट की समस्या नहीं, नाम चुनने का हक
पीड़ित युवती के अनुसार, उनका पासपोर्ट रोका गया है, लेकिन यह उनके लिए मुद्दा नहीं है। मुद्दा नाम को लेकर उत्पीड़न है। कार्यालय में मौजूद अन्य टीसीएस कर्मचारियों के अनुसार उनके दस्तावेजों में कोई समस्या नहीं थी, फिर भी उन्हें यह सब सहना पड़ा।

आरपीओ से नहीं मिला जवाब
इस मामले में आरपीओ से बात करने का प्रयास किया गया। उनके सचिव ने शहर में न होने की बात कहते हुए संपर्क न हो पाने का तर्क दिया।

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