Monday , November 19 2018
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जम्मू व कश्मीर में BJP-PDP साझेदारी के टूटने की आई Inside Story

सबसे पहले, हम आज की सबसे बड़ी राजनीतिक ख़बर का विश्लेषण करेंगे आज जम्मू व कश्मीर में भाजपा  पीडीपी का साझेदारी टूट गया है जब से ये राजनीतिक पार्टनरशिप हुई थी, तभी से इसके भविष्य पर सवाल उठ रहे थे लेकिन किसी तरह से भाजपा  पीडीपी ने ये रिश्ता 39 महीने तक चलाया  आखिरकार आज इन दोनों राजनीतिक पार्टियों का ब्रेक-अप हो गया  आज औरंगज़ेब उनके जैसे सैकड़ों शहीदों की आत्मा को कुछ हद तक शांति मिली होगी भाजपा का दावा है कि महबूबा मुफ्ती कश्मीर के दशा नहीं सुधार पाईं  इसीलिए उसे पीडीपी से समर्थन वापस लेना पड़ालेकिन कश्मीर के दशा तो लंबे समय से बिगड़े हुए थे

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वहां लगातार आतंकी घटनाएं हो रही थीं, पत्थरबाज़ी हो रही थी, पाक के पक्ष में नारे लगते थे  सेना के जवान भी शहीद हो रहे थे तो फिर भाजपा अभी तक किस बात का इंतज़ार कर रही थी?  ऐसी ख़बरें भी आ रही हैं कि महबूबा मुफ़्ती सीज़फायर को बढ़ाना चाहती थी जबकि केंद्र गवर्नमेंट ऐसा नहीं चाहती थी, क्योंकि अमरनाथ यात्रियों पर हमले की संभावना है  ये बात भी विवाद की वजह बनी आखिर इस साझेदारी के टूटने की Inside Story क्या है? ये भी आज हम आपको बताएंगेलेकिन सबसे पहले आपको इस वक्त जम्मू व कश्मीर का राजनीतिक अपडेट दे देते हैं

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समर्थन वापस लेने के बाद जम्मू व कश्मीर की CM महबूबा मुफ्ती ने त्याग पत्र दे दिया जम्मू व कश्मीर में किसी भी वक्त गवर्नर शासन लागू करने का ऐलान हो सकता है समर्थन वापसी के बाद अब से कुछ देर पहले दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह के घर पर एक मीटिंग हुई जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल, गृह सचिव राजीव गौबा  Intelligence Bureau के प्रमुख सहित  गृहमंत्रालय के कई दूसरे ऑफिसर मौजूद थे इस बीच जम्मू के गवर्नर NN वोहरा ने भी गृह मंत्रालय को गवर्नर शासन लगाने की सिफारिश कर दी है

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ये भी जानकारी मिल रही है कि केन्द्र गवर्नमेंट आतंकियों  पत्थरबाज़ों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने वाली है अब सवाल ये है कि भाजपा ने ये साझेदारी क्यों तोड़ा? वैसे तो भाजपा का दावा है कि महबूबा मुफ्ती गवर्नमेंट का नेतृत्व अच्छा से नहीं कर पा रही थीं  तमाम कोशिशों के बावजूद कश्मीर घाटी में शांति नहीं थी इसके अतिरिक्त भाजपा का ये भी कहना है कि कश्मीर की अपेक्षा जम्मू  लद्दाख के लोगों से भेदभाव किया जा रहा था

लेकिन इन सब वजहों के अतिरिक्त  भी बहुत सी दिक्कतें थीं, जिनकी वजह से इस गवर्नमेंट का चलना कठिन ही नहीं नामुमकिन था वो वजहें क्या थीं, ये समझने से पहले आपको आज से करीब 3 साल पहले की वो ऐतिहासिक फोटोज़ देखनी चाहिएं, जब जम्मू व कश्मीर में भाजपा  पीडीपी की गवर्नमेंट बनी थी

ये फोटोज़ 1 मार्च 2015 की हैं पहली बार जम्मू व कश्मीर में भाजपा की साझेदारी गवर्नमेंट बनी थी लंबी चुनावी प्रक्रिया के बाद जब जम्मू व कश्मीर में नतीजे आए तो किसी को भी बहुमत नहीं मिला था जम्मू में भाजपा की सबसे ज्यादा सीटें थीं, जबकि कश्मीर में PDP सबसे बड़ी पार्टी बनी थी लेकिन दोनों अलग अलग विचारधाराओं की पार्टी थीं भाजपा  पीडीपी की विचारधाराएं 180 डिग्री का कोण बनाती हैंयानी दोनों एक दूसरे से एकदम उल्टा हैं  फिर भी दोनों ने जम्मू व कश्मीरमें एक साथ गवर्नमेंट चलाने का निर्णय किया था ये कांटों भरा रास्ता था जिसमें पीडीपी  भाजपाको एक साथ चलना था

मुफ्ती सईद के शपथ ग्रहण में ख़ुद पीएम नरेन्द्र मोदी का शामिल हुए थे भाजपा ने बड़ा दिल दिखाया था लेकिन इस साझेदारी के भविष्य को लेकर उठाए गए सवाल धीरे धीरे सही साबित होने लगे क्योंकि महबूबा मुफ्ती पाक की वकालत करने लगीं  वो पत्थरबाज़ों  आतंकियों को डिस्काउंट देने लगीं यहां तक कि जब जुलाई 2016 में बुरहान वानी मारा गया तो महबूबा मुफ्ती ने ये तक कह दिया कि पहले पता होता कि वहां बुरहान वानी है तो उसे एक मौक़ा  देते लेकिन इसके बावजूद ये साझेदारी जारी रहा इसके बाद कुछ ऐसे टकराव हुए जो इस साझेदारी के टूटने की मुख्य वजहें बने

बीजेपी रमज़ान के बाद कश्मीर में सीज़फायर समाप्त करना चाहती थी लेकिन महबूबा मुफ्ती सीज़फायर जारी रखने के पक्ष में थीं भाजपा आतंकियों के विरूद्ध ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ चलाने के पक्ष में थी, लेकिन पीडीपी इस ऑपरेशन को रोकना चाहती थी पीडीपी, AFSPA यानी Armed Forces Special Powers Act को हटाना चाहती थी भाजपा अलगाववादियों से वार्ता के पक्ष में नहीं थी, जबकि महबूबा मुफ्ती अलगाववादियों से वार्ता चाहती थीं

बीजेपी की नीति थी कि मौजूदा दशा में पाक से कोई वार्ता नहीं हो सकती, लेकिन पीडीपी पाक से वार्ता की पक्षधर थी  इसके अतिरिक्त पीडीपी पत्थरबाज़ों से सख्ती के भी विरूद्ध थी भाजपाआर्टिकल 35A  धारा 370 हटाना चाहती थी, जबकि पीडीपी इसे लागू रखना चाहती थी  इसके बाद जब इंडियन सेना के जवान औरंगज़ेब  पत्रकार शुजात बुखारी की मर्डर हुई तो स्थितियां ख़राब हो गईं अब ये तो वो बातें हैं, जो जगज़ाहिर हैं लेकिन इस साझेदारी के टूटने की Inside Story क्या है, अब हम आपको ये बताते हैं

बीजेपी को ये पता था कि इस साझेदारी की मूल्य उसे 2019 के चुनावों में चुकानी पड़ सकती हैक्योंकि कश्मीर में दशा लगातार बेकार होते जा रहे हैं पत्थरबाज़ी रुक नहीं रही, पाक लगातार सीज़फायर तोड़ रहा है  आतंकी भी सेना के जवानों को निशाना बना रहे हैं कुल मिलाकर कश्मीर पर केन्द्र गवर्नमेंट असफल होती जा रही थी इसलिए उसके हित में सबसे सही ये था कि वो पीडीपी के साथ अपना साझेदारी तोड़ दे

2014 में जब जम्मू व कश्मीर में चुनाव हुए थे, तो भाजपा को पूरा समर्थन मिला था लोकसभा चुनावों में भी भाजपा ही लोगों की पहली पसंद थी लेकिन इस बार जम्मू की दोनों संसदीय सीटें खतरे में हैं लोगों में भाजपा के विरूद्ध आक्रोश है  इसकी वजह है जम्मू का कठुआ कांड, जिसमें एक 8 वर्ष की बच्ची की बलात्कार के बाद मर्डर कर दी गई महबूबा गवर्नमेंट ने मामले की जांच कश्मीर अपराध ब्रांच से करवाई जिसके बाद अपराध ब्रांच ने लोकल लोगों ने ये आरोप लगाए कि जानबूझ कर उनके लोगों को फंसाया जा रहा है इस घटना की वजह से जम्मू के दो मंत्रियों ने महबूबा गवर्नमेंट से त्याग पत्र भी दे दिया था इसके अतिरिक्त भाजपा के लिए लद्दाख की सीट भी खतरे में थी इस सीट पर पिछली बार भाजपा सिर्फ 36 वोटों से जीत पाई थी

ये तो वो राजनीतिक वजहें हुईं, जिनकी वजह से भाजपा को साझेदारी तोड़ने में ही अपनी भलाई लगी लेकिन कश्मीर में बहुत सी वजहें ऐसी थीं, जो सेना  सुरक्षाबलों पर भारी पड़ रही थीं हाल के दिनों में कश्मीर में जब भी सेना किसी आतंकी के विरूद्ध कोई ऑपरेशन करती तो उसमें राजनीतिक हस्तक्षेप होता था सेना के सूत्र बताते हैं कि आतंकियों को राजनीतिक संरक्षण भी मिलता थाकश्मीर में सेना को Intelligence पुलिस से ही मिलती है लेकिन अगर पुलिस किसी राजनीतिक दबाव में कार्य कर रही तो Intelligence मिलनी कम हो जाती है ऐसा ही कश्मीर में हो रहा थाइसके अतिरिक्त बहुत से मौके ऐसे भी आए जब सेना के ऑपरेशन की सूचनाएं आतंकियों को पहले से ही पता होती थी  वो मौका देखकर भाग जाते थे या पत्थरबाज़ों की भीड़ इक्कठा कर लेते थे

शायद इसीलिए आज साझेदारी टूटते ही सबसे पहले कश्मीर में 6 DSPs का ट्रांसफर किया गया है हमारे सूत्रों से ये भी पता चला है कि केन्द्र गवर्नमेंट के पास अमरनाथ यात्रा पर हमला होने की समाचार थी इसलिए गवर्नमेंट कुछ ऐसे कदम उठाना चाहती थी, जिससे सेना यात्रियों को सुरक्षा दे सके लेकिन महबूबा मुफ्ती इसके लिए राज़ी नहीं थीं,  इसका प्रभाव अमरनाथ यात्रा पर पड़ सकता था इसके अतिरिक्त भाजपा कश्मीर में अपना कोई Political Network भी नहीं बना पा रही थीरमज़ान के दौरान पूरे एक महीने तक कश्मीर में सीज़फायर रहा, लेकिन इसका भी कोई लाभ नहीं हुआ

कुल मिलाकर जम्मू व कश्मीर में भाजपा की स्थिति बहुत बेकार हो गई थी हमारे राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक भाजपा  RSS के बीच हुई समन्वय मीटिंग में भी इस मुद्दे पर बात हुई संघ की तरफ से भाजपा को ये बोला गया कि महबूबा मुफ्ती के साथ अब इस साझेदारी से पूरे राष्ट्र में गलत संदेश जा रहा है हमारे सूत्र ये भी बता रहे हैं कि भाजपा में बहुत से संगठन के नेता  कार्यकर्ता प्रारम्भ से ही इस साझेदारी के विरूद्ध थे लेकिन पार्टी के बड़े नेता साझेदारी करना चाहते थे

महबूबा मुफ्ती पत्थरबाज़ों के विरूद्ध मामले वापस ले रही थीं  जम्मू में ये संदेश जा रहा था कि महबूबा मुफ्ती जो चाहती हैं, वो कर लेती हैं, लेकिन भाजपा पीछे रह जाती है आज राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल ने भी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से उनके घर पर मुलाकात की थी  उन्हें कश्मीर के मौजूदा दशा की जानकारी दी थी भाजपा ने जम्मू व कश्मीर गवर्नमेंट में शामिल अपने सभी मंत्रियों को दिल्ली बुलाया जम्मू व कश्मीर के प्रभारी राम माधव को आंध्र प्रदेश से दिल्ली बुलाया गया  फिर आज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, राम माधव  जम्मू व कश्मीर के मंत्रियों के बीच मीटिंग हुई  फिर ये निर्णय लिया गया कि ये साझेदारी तोड़ दिया जाए

जम्मू कश्मीर के मौजूदा राजनीतिक दशा के बीच ये तय हो गया है कि वहां अब गवर्नर शासन ही लगेगा लेकिन इस बीच आपको जम्मू व कश्मीर विधानसभा की स्थिति बता देते हैं  जम्मू कश्मीर विधानसभा में कुल 87 सीटें हैं, वहां बहुमत के लिए 44 सीटों की ज़रूरत है  इनमें PDP के पास 28 सीटें बीजेपी के पास 25 नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 15 सीटें कांग्रेस के पास 12 सीटें  अन्य के पास 7 सीटें हैं  वहां किसी  दल का साझेदारी करके गवर्नमेंट बनाना संभव नहीं है क्योंकि कांग्रेस पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों ने ही पीडीपी के साथ साझेदारी करने से मना कर दिया है

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