Wednesday , September 26 2018
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एक राष्ट्र जहां के लोगों की नैतिकता जीवित

हमारा राष्ट्र हिंदुस्तान एक बात के लिए बहुत बदनाम है हमारे यहां लोग कर्ज़ तो ले लेते हैं लेकिन कोई उसे चुकाना नहीं चाहता  कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, कि जो कर्ज़ चुकाए बिना, राष्ट्र छोड़कर भाग जाते हैं हालांकि, संसार का एक राष्ट्र ऐसा भी है, जहां के लोगों की नैतिकता जीवित है, उनकी आँखों में शर्म का पानी आज भी बचा हुआ है सबसे बड़ी बात ये है, कि इस राष्ट्र के लोग अपना व्यक्तिगत कर्ज़ नहीं, बल्कि अपने राष्ट्र का कर्ज़ चुका रहे हैं हम मलेशिया की बात कर रहे हैं जहां हर रोज़ राष्ट्रवाद की एक नयी परिभाषा लिखी जा रही है  इन लोगों के लिए राष्ट्र का कर्ज़ उतारना ही सबसे बड़ा धर्म  कर्म है

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4 जून को हमने आपको बताया था, कि मलेशिया पर इतना कर्ज़ है जो उसके कुल GDP के 80 फीसदी के बराबर है यानी पूरा राष्ट्र कर्ज़ के भरोसे चल रहा है मलेशिया की पिछली सरकारों में करप्शन की वजह से उस पर 16 लाख 80 हज़ार करोड़ रुपए का कर्ज़ है इस कर्ज़ से मुक्ति पाने के लिए मलेशिया के लोगों ने Crowd funding प्रारम्भ कर दी जब राष्ट्र के आम लोग किसी अभियान को चलाने के लिए या किसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सामूहिक रूप से चंदा देते हैं तो उसे Crowd funding बोला जाता है मलेशिया के लोगों ने पिछले हफ़्ते Crowdfunding के ज़रिए 45 करोड़ रुपये इकठ्ठा कर लिए थे  अब ये रकम 101 करोड़ रुपये हो गई है यानी मलेशिया के लोग पूरा ज़ोर लगा रहे हैं लोगों के इस उत्साह को देखते हुए मलेशिया के राजा ने भी अपनी तनख्वाह में 10 प्रतिशत की कटौती कर दी है मलेशिया के राजा को प्रति साल 1 करोड़ 75 लाख रुपये से ज़्यादा की कमाई होती है लेकिन राष्ट्र की बेहतरी के लिए उन्होंने अपनी कमाई 10 प्रतिशत कम कर दी है

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ठीक इसी तरह, मलेशिया के 92 वर्ष के पीएम महातिर मोहम्मद ने भी अपने कैबिनेट में शामिल मंत्रियों की तनख्वाह में 10 फीसदी की कटौती की थी यहां ध्यान देने वाली बात ये है, कि किसी भी वरिष्ठ सरकारी कर्मचारी पर इस बात के लिए दबाव नहीं बनाया गया है, कि उसे तनख्वाह में कटौती वाला आदेश मानना होगा सबसे यही अपील की गई, है कि राष्ट्र की भलाई के लिए जो जितना कर सकता है, उतना करे मलेशिया की आबादी करीब सवा 3 करोड़ है  अगर मलेशिया के कर्ज़ को पूरे राष्ट्र के लोगों में बराबरी से बांट दिया जाए तो वहां हर एक आदमी पर 5 लाख 37 हज़ार रुपए कर्ज़ हैयहां विचार करने वाली बात ये भी है कि एक तरफ मलेशिया है जहां पर लोग खुद आगे बढ़कर राष्ट्रका कर्ज़ उतारने की प्रयास कर रहे हैं  दूसरी तरफ हमारा राष्ट्र हिंदुस्तान है जहां पर लोग अपने हिस्से का Tax भी देना नहीं चाहते

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वर्ष 2015-16 के लिए सिर्फ़ 4 करोड़ 7 लाख लोगों ने Income Tax Return भरा   आश्चर्य की बात ये है कि इनमें से भी 2 करोड़ 6 लाख लोगों ने Income Tax दिया था  ये हिंदुस्तान की आबादी का 1.7 फीसदी है  दुख की बात ये है, कि हमारे राष्ट्र के लोग, कर देने से बचते हैं  इसके बावजूद उन्हें विकास की स्पीड  सारी सुख सुविधाएं चाहिएं यही वजह है कि हिंदुस्तान की गवर्नमेंट पर कर्ज़ का बोझ बहुत ज़्यादा है  साल 2017-18 में हिंदुस्तान पर 66 लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ है जो हिंदुस्तान के GDP का 39.2 % है 

अगर जनसंख्या के आधार पर इस कर्ज़ को बराबरी से बांट दिया जाए तो, हिंदुस्तान में हर आदमी पर 50 हज़ार रुपए का कर्ज़ है  लेकिन राष्ट्र की जनता को इस कर्ज़ की फिक्र नहीं है कर्ज़ का बोझ कितना बुरा साबित हो सकता है, इसके लिए आपको एक छोटा सा उदाहरण देते हैं साल 2015 में ब्राज़ील ने अपनी कुल कमाई का 42 प्रतिशत हिस्सा, गवर्नमेंट द्वारा लिए गए कर्ज़ के ब्याज को चुकाने में खर्च कर दिया था मलेशिया, हिंदुस्तान के मुकाबले एक बहुत छोटा राष्ट्र है लेकिन वहां के लोगों ने जिस तरह का राष्ट्रवाद  देशप्रेम दिखाया है वो अपने आप में बहुत बड़ी बात हैमलेशिया से आई इस ख़बर ने एक समाज के तौर पर हिंदुस्तान को आईना दिखाया है क्योंकि हमारे राष्ट्र में लोग कर्ज़ लेकर विदेश भाग जाते हैं, मौज करते हैं  कभी अपने राष्ट्र के बारे में नहीं सोचतेआज हम मलेशिया की जनता के राष्ट्रवाद का DNA Test करेंगे  ये समझने की प्रयास करेंगे कि हमारे राष्ट्र के लोगों में मातृभूमि का कर्ज़ चुकाने की भावना क्यों नहीं आती?

यहां आपके लिए ये जानना भी दिलचस्प रहेगा, कि संसार के कौन से राष्ट्र ऐसे हैं, जिनपर या तो किसी प्रकार का कोई कर्ज़ है ही नहीं,  अगर है भी तो बहुत कम है इस लिस्ट में एक राष्ट्र है Macau. क़रीब सवा 6 लाख की आबादी वाला ये राष्ट्र कर्ज़मुक्त है साढ़े 21 हज़ार की आबादी वाले Palau पर भी किसी प्रकार का कोई कर्ज़ नहीं है आपको बता दें, कि Palau, 500 अलग-अलग द्वीपों का एक समूह है यूरोप का राष्ट्र Liechtenstein (लिश्टैन-स्टाइन) भी कर्ज़मुक्त है यहां की आबादी क़रीब 38 हज़ार है क़रीब 31 हज़ार की आबादी वाले British Virgin Islands पर भी कोई कर्ज़ नहीं है सवा 4 लाख की आबादी वाले Brunei पर भी अपनी GDP का सिर्फ ढाई फीसदी कर्ज़ है

लोग ये तर्क दे सकते हैं, कि मलेशिया या इन 5 राष्ट्रों की तुलना में हिंदुस्तान एक विशाल राष्ट्र हैलेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है, कि हम राष्ट्र से पहले व्यक्तिगत स्वार्थ को चुनें इसका ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है, कि हमारे राष्ट्र के उद्योगपति कर्ज़ चुकाए बिना, राष्ट्र छोड़कर भाग जाएं  हम चुपचाप तमाशा देखते रहें हिंदुस्तान में Crowd Funding का प्रयोग राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए किया जाता है लेकिन मलेशिया में Crowd Funding का प्रयोग राष्ट्र को मज़बूत करने के लिए किया जा रहा है मलेशिया के 3 करोड़ लोगों ने राष्ट्र का कर्ज़ चुकाने के लिए ज़बरदस्त इच्छाशक्ति दिखाई है  पिछली बार की ही तरह इस बार भी, हम वही बात कहेंगे, कि अगर हिंदुस्तान के लोगों ने मलेशिया के लोगों जैसी इच्छाशक्ति दिखा दी, तो हिंदुस्तान की शक्ति कितनी बढ़ जाएगी, इसका आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते

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