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नीजी अस्पतालों को इंडियन मरीजों की अनदेखी पड़ेगी भारी

दिल  अंग प्रत्यारोपण में प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी केचलते इस हफ्ते दो हार्ट प्रत्यारोपित होने से भी रह गए. इसलिए सेहत मंत्रालय ने इस पर लगाम कस दी है. अब से इसकेलिए एक मॉनीटरिंग कमेटी बना दी गई. सभी राज्यों  प्राइवेट अस्पतालों से प्रत्यारोपण खासतौर पर हदय प्रत्यारोपण के लिए इंडियन मरीजों की वेटिंग सूची तलब की गई है.  नेशनल आर्गन  टिशु ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन ने व्यक्तिगत अस्पतालों को आदेशित किया है कि अब वरीयता क्रम में पहले भारतीय, उसके बाद एनआरआई  फिर विदेशियों को प्रत्यारोपण का फायदा दे ऐसा न करने पर उनके विरूद्ध कार्रवाई भी हो सकती है.
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राष्ट्र भर में अंग प्रत्यारोपरण खासतौर पर हदय प्रत्यारोपण की लंबी प्रतीक्षा सूची के बाद भी प्राइवेट अस्पताल बड़े पैमाने पर इंडियन मरीजों को दरकिनार कर विदेशी मरीजों को अंग प्रत्यारोपण कर रहे हैं. सबसे ज्यादा मामले दक्षिण हिंदुस्तान में चेन्नई से आए है. इसमें अस्पतालों की मिली भगत केचलते पिछले एक माह में कम से कम चार विदेशी मरीजों का हदय प्रत्यारोपित किया गया.  इसके  पीछे अस्पतालों ने तर्क दिया की इंडियन मरीज है ही नहीं जबकि अकेले एम्स में ही सौ से ज्यादा वेटिंग लिस्ट है.

जबकि  हदय विशेषज्ञों के मुताबिक हिंदुस्तान में 50 हजार लोगों को हर वर्ष हदय प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है. लेकिन केवल पचास लोगों को इसका फायदा मिलता है. अगर मेट्रो शहरों की बात करे तो एक समय में तीन सौ हार्ट की आवश्यकता होती है. इसकी वजह अनियमित दिनचर्या है  सबसे ज्यादा युवा  इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं. इसमें 15 से 30 वर्ष तक की आयु वाले लोग है.अमूमन पचास वर्ष की आयु में होने वाला रोग जल्द दस्तक दे रहा है. ऐसे में  हदय प्रत्यारोपण की मांग भी बढ़ती जा रही है. एक इंडियन को इसके लिए पचास लाख रुपये खर्च करने होते हैं.  यहां खेल करके प्राइवेट अस्पताल विदेशियों से इसका एक से दो करोड़ वसूल लेते हैं. इसलिए यह धंधा तेजी से फलफूल रहा है. राष्ट्र में चेन्नई  कर्नाटक इसका बड़ा हब है.

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नोटो मुताबिक दिल्ली में केवल एम्स में इसकी सुविधा है.  प्राइवेट अस्पतालों में गंगाराम, बीएलके, फोटस  अपोल मैक्स इसकी सुविधा देते हैं. लिहाजा अब नोटो ने अपनी निगेहबानी इन पर भी कठोर कर दी है. डॉ विमल भंडारी अध्यक्ष नोटो के मुताबिक सेहत सेवाओं का फायदा राष्ट्र के अंतिम छोर के मरीज को भी मिलना चाहिए प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर रोक लग कर रहेगी. इसलिए अभी कमेटी बना दी है. जल्द नयी गाइड लाइन आएंगी  कानूनों में परिवर्तन किया जाएगा. ताकि मनमानी करने वाले अस्पतालों पर शिकंजा कसा जा सके.

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