Wednesday , September 26 2018
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बीजेपी के सामने आई बड़ी चुनौती- पार्टी के अंदर से उठ रही है सोनोवाल को हटाने की मांग

उत्तर पूर्व के सात में से छह में गवर्नमेंट बनाने वाली भाजपा के सामने एरिया के सबसे बड़े राज्य असम में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के रूप में एक बड़ी चुनौती सामने आई है. पूरे राज्य में विधेयक के विरूद्ध बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में संसद के दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति इस विधेयक पर रायशुमारी के लिए पिछले पांच दिनों के दौरे पर असम में ही है. इसी दौरान कांग्रेस, असम गण परिषद, आल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) जैसे राज्य के सभी संगठन विधेयक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं.
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वहीं, उपमुख्यमंत्री हिमंत बिस्वसरमा से जुड़ा बीजेपी का ही एक धड़ा केंद्रीय नेतृत्व को संदेश दे रहा है कि CM सर्वानंद सोनोवाल इस विरोध को अच्छा तरह से नहीं संभाल पा रहे हैं. उनका कहना है कि ऐसे नाज़ुक दशा में सोनोवाल की स्थान  किसी मजबूत आदमी को CM बनाया जाना चाहिए. हिमंत इससे पहले वाली कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट में भी उपमुख्यमंत्री थे. लेकिन अपनी महत्वाकांक्षा तत्कालीन CM तरुण गोगोई से मतभेदों के चलते वे गवर्नमेंट छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए.पार्टी ने उन्हें असम की ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर पूर्व की जिम्मेदारी दे दी. उन्होंने इस एरिया में छह राज्यों की गवर्नमेंट बीजेपी की सहायता से बनवाई. लेकिन अब उनकी महत्वाकांक्षा फिर जोर पकड़ रही है.

असम विधानसभा में नेता विपक्ष देवब्रत साइकिया ने अमर उजाला को बताया कि कांग्रेस पार्टी आल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने सोनोवाल को प्रस्ताव दिया है कि यदि वे जातीय नेता की छवि बचाना चाहते हैं तो उन्हें बीजेपी छोड़ देनी चाहिए  विपक्ष के योगदान से CMबनना चाहिए. बिस्वसरमा से कई प्रयासों के बाद भी बात नहीं हुई.

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क्या है नागरिकता विधेयक
दो वर्ष पहले लाए इस विधेयक में बोला गया है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश  पाक से आए हिंदू, बौद्ध, सिख, ईसाई, जैन  पारसी लोगों को हिंदुस्तान की नागरिकता दी जा सकती है. इसके लिए पहले से निर्धारित हिंदुस्तान में 12 वर्ष रहने की शर्त को घटाकर सात वर्ष कर दिया गया है.

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क्यों हो रहा है विरोध
असम के लोगों का कहना है कि यह 1985 के असम समझौते का उल्लंघन कर रहा है. इसमें बोलागया था कि 25 मार्च 1971 के बाद बांग्लादेश से हिंदुस्तान आए लोगों को घुसपैठिया मान कर राष्ट्रसे निकाल दिया जाएगा. यह विधेयक मुसलमानों को गैरकानूनी घुसपैठिया करार दे नागरिकता के लिए अयोग्य ठहरा रहा है. इसे अन्य दल धार्मिक आधार पर भेदभाव बता रहे हैं.

नागरिकता रजिस्टर 30 को आएगा
राज्य गवर्नमेंट 30 जून को राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर सार्वजनिक करेगी. इससे मालूम चलेगा कि कितने लोग 1971 के बाद असम में बसे. यह भी एक विस्फोटक मुद्दा होगा.

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