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भारत में तेजी से बढ़ रहा है ई-कॉमर्स रिटेल

रिटेल ई-कॉमर्स की सेल में हिंदुस्तान एशिया पेसिफिक रीजन में तीसरे जगह पर पहुंच गया है. आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि हिंदुस्तान में ई-कॉमर्स मार्केट की आरंभ 2010 में हुई थी. इन 8 सालों में दुनियाभर की तमाम बड़ी कंपनियों ने इंडियन ई-कॉमर्स मार्केट में एंट्री ली है. ई-कॉमर्स मार्केट भी हिंदुस्तान की जीडीपी में अहम भूमिका निभा रही है. मार्केटविशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक इस वर्ष के अंत तक इंडियन ई-कॉमर्स मार्केट 31 फीसदी बढ़कर 32.70 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच जाएगा.

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तीन बड़े प्लेयर कर रहें है निवेश:

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भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट के तीन बड़े प्लेयर फ्लिपकार्ट, अमेजन  पेटीएम ने इसके लिए बड़ा निवेश किया है. तीनों ही कंपनियां न सिर्फ प्रोडक्ट उपलब्धता पर निवेश कर रही हैं, बल्कि इन तीनों ही कंपनियां प्रोडक्ट्स की समय पर डिलीवरी के लिए लॉजिस्टिक सर्विस को भी बेहतर बना रही है.कंपनियां अपने ग्राहकों के लिए डिलीवरी ऑफर्स भी निकाल रही हैं. इन डिस्काउंट ऑफर्स  सस्ते दरों पर सामान की उपलब्धता की वजह से ग्राहक इसे पसंद कर रहे हैं.

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इंटरनेट  Smart Phone यूजर्स ने बदली तस्वीर:

भारत में ई-कॉमर्स के बढ़ते मार्केट के पीछे बड़ी संख्या में लोगों तक इंटरनेट  Smart Phone की पहुंच भी है. 130 करोड़ की जनसंख्या वाले राष्ट्र में इस वर्ष के अंत तक करीब 48 करोड़ मोबाइल इंटरनेट यूजर्स हो जाएंगे. 2016 में मोबाइल इंटरनेट प्रयोग करने वाले यूजर्स की संख्या करीब 37 करोड़ थी.

मोबाइल इंटरनेट यूजर्स  Smart Phone की वजह से डिजिटल खरीदारी करने वाले ग्राहकों की संख्या में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है. बाजार रिसर्चर की मानें तो वर्ष 2022 तक हिंदुस्तानमें ई-कॉमर्स यूजर्स की संख्या में 41 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी.

कड़वा सच- ऑफलाइन के मुकाबले कम ग्राहक:

भारत में ई-कॉमर्स रिटेल मार्केट के बढ़ने के बावजूद 2018 के कुल रिटेल (खुदरा) मार्केट में ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी केवल 2.9 फीसद ही रही है, जो कि बहुत कम है. जिस तरह से Smart Phone यूजर्स मोबाइल इंटरनेट की क्रांति आई है, हिंदुस्तान में औनलाइन या ई-कॉमर्स मार्केट की बहुत संभावनाएं हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है कि हिंदुस्तान एक उत्कृष्ट ई-कॉमर्स मार्केट है, यही कारण है कि कई छोटी-बड़ी कंपनियां इंडियन ई-कॉमर्स मार्केट में भी उतर रही हैं.

इस वजह से लोग करते हैं कम खरीदारी:

इतने बड़े ई-कॉमर्स मार्केट होने के बावजूद कुछ चीजें हैं जो इंडियन ग्राहकों को औनलाइन खरीदारी करने से रोकती हैं. जिसमें डाटा लीक होने  औनलाइन फ्रॉड जैसे खतरे प्रमुख हैं. हाल ही में फेसबुक जैसी बड़ी कंपनी के डाटा लीक होने वाली खबरों ने यूजर्स को  डरा दिया है.

लोग औनलाइन ठगी के भय से डिजिटल ट्रांजेक्शन करने में भय भी रहे हैं. लेकिन हिंदुस्तान में नोटबंदी के बाद से डिजिटल लेनदेन करने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ी भी हैं. इसका सीधा प्रभाव ई-कॉमर्स कंपनियों से खरीदारी करने वाले ग्राहकों की संख्या पर पड़ा है. जिसमें केन्द्र गवर्नमेंट के डिजिटल इंडिया का भी एक अहम भूमिका रहा है.

रिपोर्ट की मानें तो इस वृद्धि दर के साथ हिंदुस्तान जल्द ही एशिया-पेसिफिक रीजन में तीसरा सबसे बड़ा ई-कॉमर्स मार्केट बन सकता है. विशेषज्ञों की मानें की तो साल 2022 तक इंडियन मार्केट 71.94 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 4.86 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच जाएगी.

भारत के शहरी  अर्धशहरी क्षेत्रों में अभी भी क्रेडिट कार्ड इतना लोकप्रिय नहीं हुआ है  लोग इसका प्रयोग करने में डरते हैं. यही कारण है कि हिंदुस्तान में ई-कॉमर्स कंपनियां कैश-ऑन-डिलीवरी वाला ऑप्शन भी ग्राहकों को दे रही है, जिसका अनूकूल प्रभाव ई-कॉमर्स मार्केट पर पड़ा है. विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले 5 से 10 वर्ष में ई-कामर्स मार्केट में तेजी देखने को मिलेगी.

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