Friday , June 22 2018
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सोशल मीडिया ट्रोलर्स पर होगा एक्शन

वैज्ञानिकों ने एक नयी तकनीक विकसित की है जिससे सोशल मीडिया पर किसी पर का पता चल सकता है यह तकनीक साइबर दबंगई का शिकार बने बच्चों के अभिभावकों या नेटवर्क ऐडमिनिस्ट्रेटर को इसके बारे में सचेत भी करेगी अमेरिका की युनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर के वैज्ञानिकों ने साइबर दबंगई का पता लगा ने वाली अन्य तकनीकों के मुकाबले इस तकनीक में पांच गुणा कम गणन संसाधनों का उपयोग किया है इन अनुसंधानकर्ताओं में एक इंडियन मूल का वैज्ञानिक भी शामिल है

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यूसी बोल्डर के प्रोफेसर रिचर्ड हैन ने बताया कि यह तकनीक प्रभावी है  थोड़े से निवेश से इसके माध्यम से इंस्टाग्राम के आकार के किसी नेटवर्क की निगरानी की जा सकती है वैज्ञानिकों के इस समूह ने एक मुफ्त ऐंडूायड ऐप्प ‘बुलीएलर्ट’ भी जारी किया इसके माध्यम से इंस्टाग्राम पर साइबर- दबंगई की किसी घटना पर पीड़ित के अभिभावकों को उसका एलर्ट मिल जाता है

अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि यह ऐप्प साइबर दबंगई की अभिभावकों की परिभाषा के अनुरूप खुद को ढालने में सक्षम है यूसी बोल्डर के एक प्रोफेसर शिवकांत मिश्र ने कहा, ‘‘इस तरह का कोई ऐप्प बहुमूल्य है जो हमें बताता है कि कुछ दिक्कत-तलब चीजें हो रही हैं

सोशल मीडिया के प्रयोग से नौजवानों के संबंधों पर असर, स्टडी में खुलासा
एक अध्ययन के अनुसार सोशल मीडिया किशोरों के असली ज़िंदगी  उनके संबंधों को प्रभावित कर सकता हैं अमेरिका में केलिफोर्निया विश्वविद्यालय,इरविन के शोधकर्ताओं के अनुसार सोशल मीडिया से किशोरों का ज़िंदगी प्रभावित होने की संभावना है जर्नल नेचर में यह शोध प्रकाशित हुआ है प्रोफेसर कैंडिस ओडगर्स ने विभिन्न मौजूदा अध्ययनों के आकडों का विश्लेषण किया ओडगर्स ने बोला कि प्रमाणों से अब तक यह पता चला है कि Smart Phone पहले से ही किशोरों की समस्याओं को दर्शाते दर्पण के रूप में कार्य कर सकते हैं

उन्होंने कहा, निम्न आय वर्ग के परिवारों का कहना है कि सोशल मीडिया का असर असली ज़िंदगी में बढता जा रहा है  इसके कारण ऑफलाइन होने पर  झगड़े होते है तथा स्कूलों में समस्याएं सामने आती है शोधकर्ताओं का कहना है कि ओडगर्स द्वारा अन्य अध्ययनों की समीक्षा की गई जिनसे पता चलता है कि आर्थिक रूप से निर्बल परिवारों के किशोरों के लिए सोशल मीडिया से जुड़ी समस्याओं से निपटने में अभिभावकों, स्कूलों या अन्य सामाजिक संगठनों से अलावा समर्थन की आवश्यकता है

मानसिक सेहत पर प्रभाव 
सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रयोग युवाओं के मानसिक सेहत को प्रभावित कर रहा है विशेषज्ञों का कहना है कि कई युवाओं में ‘असामान्य’ व्यवहार  जीवनशैली संबंधी परिवर्तन देखे गए हैं जिनके कारण उनकी एजुकेशन  पर्सनल संबंधों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है दिल्ली के शीर्ष के सेहत संस्थानों के मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि चिंता की बड़ी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में लोगों को यह पता भी नहीं है वे इस समस्या से पीड़ित हैं

फेसबुक तथा ट्वीटर जैसे प्लेटफॉर्म दोधारी तलवार साबित हो रहे हैं
दक्षिण दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ संदीप वोहरा ने बताया, ‘सोशल मीडिया  फेसबुक तथा ट्वीटर जैसे प्लेटफॉर्म दोधारी तलवार साबित हो रहे हैं या तो ज्यादातर युवाओं का इन पर शोषण होता है या फिर उन्हें इसकी लत लग जाती है दोनों ही मामलों में मनोवैज्ञानिक समस्याएं होती हैं ’ वोहरा ने बताया कि अस्पताल में हर सप्ताह ऐसे 80 से 100 मरीज आते हैं जिनमें इंटरनेट की लत के कारण उत्पन्न हुए विकार के मरीज भी हेते हैं

सर गंगाराम अस्पताल की बाल एवं किशोर मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ डॉ रोमा कुमार कहती हैं कि सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रयोग करने वाले युवा ‘अपने ज़िंदगी का नियंत्रण अन्य लोगों के हाथों में दे देते हैं ’ कल विश्व मानसिक सेहत दिवस मनाया जाएगा एम्स के मनोविज्ञान विभाग में प्राध्यापक डॉ राजेश सागर के मुताबिक सोशल मीडिया के विवेकपूर्ण प्रयोग का प्रशिक्षण स्कूल स्तर पर ही दिया जाना चाहिए

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