Saturday , June 23 2018
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अब बिकेगी राष्ट्र की सबसे बड़ी एयरलाइन!

एयर इंडिया में हिस्सेदारी बेचने में नाकाम रही गवर्नमेंट अब सरकारी एयरलाइन को पूरी तरह बेचने पर विचार कर रही है इससे पहले गवर्नमेंट ने एयर इंडिया की 76 प्रतिशतहिस्सेदारी बेचने का कोशिश किया था, लेकिन वह विफल रही 31 मई को था आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने बताया कि गवर्नमेंट एयर इंडिया को बेचने के लिए दूसरे विकल्प तलाश रही है ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गवर्नमेंट एक बार फिर निजीकरण की प्रक्रिया पर विचार कर रही है सुभाष चंद्र गर्ग के मुताबिक, अल्पसंख्यक राज्य की हिस्सेदारी वाले क्लॉज को शामिल करते हुए इसपर पुनः विचार किया जाएगा उन्होंने बोला कि सराकार कई विकल्पों को लेकर चल रही है  24 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखने की ख़्वाहिश नहीं रखती है

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गर्ग के मुताबिक, ‘जिस नीति को अपनाकर एयर इंडिया की हिस्सेदारी खरीदने का ऑफर दिया गया था, उसने कार्य नहीं किया इसलिए अब कुछ अलग तरह से किया जाएगा गवर्नमेंट का लक्ष्य यह नहीं है कि 24 प्रतिशत हिस्सेदारी खुद रखे इसपर भी पुनर्विचार किया जा सकता है ‘

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नहीं मिला कोई खरीदार
बताते चलें कि पीएम मोदी का हाई प्रोफाइल प्राइवेटाइजेशन प्लान 31 मई को समाप्त हो गयामार्च 2017 के अंत तक 48000 करोड़ से ज्यादा के कर्ज में डूबी एयर इंडिया को कोई खरीदार नहीं मिला अप्रैल में इंडिगो  जेट एयरवेज ने साफ किया था कि वह एयर इंडिया के विनिवेश प्रक्रिया का भाग नहीं हैं हालांकि, पिछले वर्ष एयर इंडिया के विनिवेश प्लान की आरंभ होने पर इंडिगो ने इसमें सबसे पहले ख़्वाहिश जताई थी गवर्नमेंट ने स्पष्ट किया कि वह एयर इंडिया इंटरनेशनल ऑपरेशन्स को अलग से नहीं बेच रही है तो इंडिगो ने हाथ पीछे खींच लिए

कर्ज के साथ बेचने का ऑफर
एयर इंडिया को 33000 करोड़ के कर्ज के साथ बेचने का ऑफर दिया गया था एयरलाइन इस समय गवर्नमेंट द्वारा दिए जाने वाले बेलआउट पैकेज पर कार्य चला रही है इससे पहले गवर्नमेंट का यह कोशिश विपक्ष के विरोध की वजह से पास नहीं हो पाया था

चिदंबरम ने उठाए थे सवाल
एयर इंडिया के विनिवेश पर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सवाल उठाए थे उन्होंने बोला था कि गवर्नमेंट एयर इंडिया को लेकर पूरी तरह कन्फ्यूज है विनिवेश पॉलिसी में कोई स्पष्टता नहीं हैऐसे में गवर्नमेंट को खुद ही नहीं पता कि एयर इंडिया का करना क्या है चिदंबरम के मुताबिक, ‘यह न तो प्राइवेटाइजेशन है  न ही ज्वाइंट वेंचर जब आप 70 प्रतिशत भाग ही नहीं बेच पा रहे हैं जाहिर सी बात है कि आपको पता ही नहीं है क्या करना है ‘

बैंक बोर्ड ब्यूरो पर चिदंबरम का सवाल
चिदंबरम ने बैंक बोर्ड ब्यूरो पर भी सवाल उठाए हैं उन्होंने बोला बैंक बोर्ड का गठन बैंकिंग सेक्टर की स्वास्थ्य सुधारने के लिए किया गया था, जो पूरी तरह फेल साबित हुआ है चिदंबरम ने बैंक बोर्ड ब्यूरो को DDD(-) रेटिंग दी है ग्रॉस एनपीए पिछले 4 वर्ष में 2,63,000 करोड़ से बढ़कर 10,30,000 करोड़ पर पहुंच गया है आगे इसके  बढ़ने की उम्मीद है कोई भी बैंक बड़े कर्ज देने को तैयार नहीं है बैंक बोर्ड ब्यूरो पूरी तरह विफल साबित हुआ है, इसे तुरन्त बंद कर देना चाहिए

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