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ऑपरेशन ब्लू स्टार से जुड़ी फाइलें होगी सार्वजनिक

ब्रिटेन के एक न्यायाधीश ने 1984 के ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है, ताकि इस घटना में ब्रिटिश गवर्नमेंट की भागीदारी  साफ तौर पर जाहिर हो सके साथ ही न्यायालय ने ब्रिटिश गवर्नमेंट की यह दलील खारिज कर दी कि इस कदम के चलते हिंदुस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को नुकसान पहुंचेगा लंदन में मार्च में फर्स्ट टियर ट्रिब्यूनल (सूचना अधिकार) की तीन दिवसीय सुनवाई की अध्यक्षता करने वाले न्यायाधीश मुरी शैक्स ने सोमवार(11 जून) को बोला कि उस समय की ज्यादातर फाइलें अवश्य ही सार्वजनिक की जानी चाहिए

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उन्होंने ब्रिटिश गवर्नमेंट की यह दलील खारिज कर दी कि डाऊनिंग स्ट्रीट के कागजात को सार्वजनिक करने से हिंदुस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को नुकसान पहुंचेगा हालांकि, न्यायाधीश ने स्वीकार किया कि ब्रिटेन की संयुक्त खुफिया समिति के पास मौजूद ‘इंडिया: पॉलीटिकल ’ नाम की एक फाइल में कुछ ऐसी सूचना हो सकती है जो ब्रिटिश जासूसी एजेंसी- एमआई 5 एमआई 6  गवर्नमेंट संचार मुख्यालय से जुड़ी हो न्यायाधीश के आदेश में बोला गया है, ‘‘ हम जिस अवधि की बात कर रहे हैं वह हिंदुस्तान के हालिया इतिहास में एक बहुत ही संवेदशील समय का है

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साल 2014 में ब्रिटेन की गवर्नमेंट ने कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए थे 
यह भी याद रखना चाहिए कि 30 वर्ष गुजर गए हैं ’’ दरअसल, नियमों के मुताबिक इस तरह की फाइलों को वहां 30 वर्ष के बाद ही सार्वजनिक किया जा सकता है वर्ष 2014 में ब्रिटेन की गवर्नमेंटने कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए थे जिससे इस बात का खुलासा हुआ था कि ब्रिटिश सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले हिंदुस्तान की सेना को सलाह दी थी

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बहरहाल, यूके कैबिनेट ऑफिस को फर्स्ट टियर ट्रिब्यूनल के निर्णय के विरूद्ध अपील के लिए 11 जुलाई तक का वक्त दिया गया है उसे संबद्ध दस्तावेज अध्ययन के लिए 12 जुलाई तक स्वतंत्र पत्रकार फिल मिलर को उपलब्ध कराने होंगे मिलर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में किए गए ऑपरेशन में मार्गरेट थैचर नीत तत्कालीन गवर्नमेंट द्वारा थल सेना (भारतीय) को दी गई सहायता की प्रकृति की जांच कर रहे हैं

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