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गूगल मैप को चुनौती देगा इंडियन डिजिटल मैप ‘नाविक’

जल्द ही आपको किसी भी जगह को तलाशने के लिए गूगल मैप खोलने की आवश्यकता नहीं होगी बल्कि आप एक क्लिक पर देशी डिजिटल मैप ‘नाविक’ के जरिए अपनी मंजिल तय कर पाएंगे.इंडियन अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)  इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (आईटी) मिलकर इंडियन क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम के अंतिम चरण पर कार्य कर कर रहे हैं, जिसे ‘नाविक’ नाम से पुकारा जाएगा. इसकी मदद से आप अपनी धरती पर ही नहीं बल्कि नेपाल, भूटान, पाक  श्रीलंका जैसे पड़ोसी राष्ट्रों में भी रास्ते तलाश पाएंगे.
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चाइना ने गूगल को आंतरिक सुरक्षा के चलते प्रतिबंधित कर रखा है. माना जा रहा है कि हिंदुस्तानभी अपना डिजिटल मैप सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए ही तैयार कर रहा है. आईटी मंत्रालय के एक ऑफिसर के मुताबिक, इसरो के नाविक प्रोजेक्ट में उनका मंत्रालय मात्र प्रौद्योगिकी से जुड़ी सहायता ही दे रहा है. उन्होंने बताया कि गूगल  नाविक मैप में उपयोग करने के तरीके के लिहाज से कोई अंतर नहीं होगा.

जुलाई, 2013 से प्रारम्भ किया सैटेलाइट छोड़ना

इसरो ने नाविक के लिए पहली सैटेलाइट आईआरएनएसएस-1ए का 1 जुलाई, 2013 को प्रक्षेपित की थी. गत् 12 अप्रैल को आईआरएनएस सीरीज की सातवीं सैटेलाइट के पास प्रक्षेपण के साथ नाविक के लिए आवश्यक सूचना तंत्र पूरा हो गया था. हालांकि इसे  ज्यादा सटीक जानकारी वाला बनाने के लिए भविष्य में सैटेलाइट की संख्या बढ़ाकर 11 करने की योजना है.

पूरी तरह होगा स्वदेशी

नाविक राष्ट्र का स्वदेशी तकनीक से बना पहला डिजिटल नेविगेशन सिस्टम है. वर्ष के अंत तक इसके परीक्षण पूरे होंगे  इसके बाद आम आदमी के लिए इसे उपलब्ध करा दिया जाएगा. इसकी मदद से हिंदुस्तान बिना किसी विदेशी मदद के समंदर में भी सटीक नेवीगेशन कर पाएगा. साथ ही सैन्य अभियानों में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा.

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