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चीनी को लग गए पंख

केंद्र गवर्नमेंट की ओर से चीनी उद्योग को राहत पैकेज देने  इसका न्यूनतम बिक्री मूल्य तय करने का प्रभाव मार्केट में दिखाई देने लगा है. चीनी को पंख लग गए हैं. महज सात दिन में यह आठ रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है. गन्ना किसानों को इससे राहत तो मिलेगी, लेकिन उपभोक्ताओं की मुश्किलें भी बढ़ गईं हैं.

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चार जून को चीनी का भाव था 34 रुपये

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चार जून तक चीनी का खुदरा भाव 34 रुपये किलो था. हालांकि, चीनी उद्योग को राहत देने की दिशा में गवर्नमेंट के बढ़ते कदम की आहट मार्केट को मिल चुकी थी. लिहाजा चीनी की कीमतों में तेजी का सिलसिला भी प्रारम्भ हो गया.

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छह जून को मिला राहत पैकेज

छह जून को चीनी उद्योग को 8500 करोड़ रुपये का राहत पैकेज मिला. साथ ही कैबिनेट की मीटिंगमें चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 29 रुपये किलो तय किया गया. दरअसल, चीनी मिलों से बिकने वाली थोक चीनी का मूल्य 26 से 28 रुपये प्रति किलो के बीच था, जबकि उत्पादन लागत 32 किलो पड़ रही थी. इससे निपटने के लिए गवर्नमेंट ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित कर दिया.गन्ना उद्योग को वित्तीय संकट से उबारने के लिए केंद्र गवर्नमेंट की ओर से ये कदम उठाए गए.चीनी मिलों को इससे राहत तो मिली लेकिन चीनी का खुदरा मूल्य भड़क गया है.

निर्णय से पहले ही आ गई तेजी

बाजार को भी अनुमान हो गया था कि चीनी उद्योग के लिए गवर्नमेंट की ओर से बड़ा कदम उठाया जाएगा. इसलिए छह जून के पहले चार जून से ही चीनी की कीमतों में तेजी का सिलसिला प्रारम्भ हो गया था. बिहार खुदरा विक्रेता महासंघ के अध्यक्ष रमेश तलरेजा ने बोला कि चार जून से चीनी की मूल्य रोज बढ़ रही है. फिल्हाल चीनी का भाव 42 रुपये प्रति किलो किलो पर पहुंच गया है जो चार जून को 34 रुपये किलो था. इसमें  तेजी आने से भी मना नहीं किया जा सकता.

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