Monday , November 19 2018
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हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में व्हाट्सएप कॉलिंग सेवा बंद करने से पहले इसके औचित्य की जांच करेगी गवर्नमेंट

गवर्नमेंट जम्मू व कश्मीर जैसे हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में व्हाट्सएप कॉलिंग सेवा बंद करने से पहले इसके औचित्य की जांच करेगी. ऐसी खबरें हैं कि आतंकवादी सीमापार अपने आकाओं के संपर्क में रहने के लिए इस सेवा का प्रयोग करते हैं जिसे देखते हुए गवर्नमेंट ने यह फैसला लिया है.
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यह मुद्दा गृह सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई एक मीटिंग के दौरान उठा था. मीटिंग में 2016 में नागरोटा सैन्य शिविर पर आतंकवादी हमले से जुड़े कुछ आतंकवादियों की हाल में हुई गिरफ्तारी का मुद्दा उठा, तो तय किया गया कि व्हाट्सएप कॉलिंग पर रोक लगाई जाए या नहीं, पहले इसकी व्यावहारिकता परखी जाएगी. बता दें कि इस मामले में अरैस्ट जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने जम्मू व कश्मीर पुलिस को बताया था कि वे व्हाट्सएप कॉल के जरिये सीमापार से आदेश पाते थे.

मीटिंग में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, सुरक्षा एजेंसियों  जम्मू व कश्मीर पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया. इन अधिकारियों ने कीपैड जिहादियों द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइटों पर भड़काऊ  राष्ट्रदोही पोस्ट डाले जाने पर भी चर्चा की, जिन वजहों से किसी घटना को सांप्रदायिक रंग देकर या अफ़वाह फैलाकर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाती है. अधिकारियों ने बोला कि कॉल करने के लिए इंटरनेट के प्रयोग ने सुरक्षा एजेंसियों की समस्या बढ़ा दी है. उन्हें पता नहीं चल पाता कि कहां से कहां कॉल की जा रही है.

अधिकारियों ने खाड़ी समेत उन राष्ट्रों का उदाहरण भी दिया, जहां मीटिंग के दौरान व्हाट्सएप वॉयस या वीडियो कॉलिंग की अनुमति नहीं होती है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग में आतंकवादियों द्वारा दी जा रही सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों के प्रभावी तरीकों पर चर्चा की गई. इस दौरान सोशल मीडिया साइटों पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर रोक को लेकर भी चर्चा हुई.

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