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प्लास्टिक, ऐसा जहर जो आपके घर में रखा है

आपने ज़हर की अलग अलग किस्में देखी होंगी लेकिन एक ज़हर ऐसा है जो आपके घर में रखा हुआ है  आप उसे लेकर बिलकुल भी जागरूक नहीं हैं उस ज़हर का नाम है प्लास्टिक जब तक आप प्लास्टिक को ज़हर नहीं समझेंगे तब तक ये आपके ज़िंदगी में ज़हर घोलता रहेगा क्या आपको पता है कि आपके Fridge में रखी प्लास्टिक की Bottle को नष्ट होने में साढ़े 400 साल लगेंगे? क्या आपको पता है कि आप जिस प्लास्टिक के बैग में अपना राशन लेकर आते हैं, उसे नष्ट होने में 1000 साल लगेंगे? क्या आप जानते हैं कि हम हर वर्ष पूरी संसार के लोगों के वज़न के बराबर प्लास्टिक का कचरा पैदा करते हैं? ये आंकड़े हम आपकी जानकारी के लिए नहीं बल्कि आपको डराने के लिए बता रहे हैं

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क्योंकि जब तक आप डरेंगे नहीं, तब तक आप प्लास्टिक का प्रयोग बंद नहीं करेंगे  जब तक आप प्लास्टिक का प्रयोग बंद नहीं करेंगे, तब तक धरती पर प्लास्टिक का बोझ बढ़ता रहेगा आज विश्व पर्यावरण दिवस है वैसे तो पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण बचाने, पेड़ पौधे लगाने, प्रदूषण कम करने की बात होती है Global Warming  Ozone layer जैसे वजनदार शब्दों का प्रयोग होता है, लेकिन इस सारी समस्याओं के बीच पर्यावरण के लिए जो सबसे बड़ी समस्या है, वो है प्लास्टिकइसीलिए संयुक्त देश ने भी इस बार विश्व पर्यावरण दिवस का Theme रखा है ‘Beat Plastic Pollution’  संयुक्त देश ने हिंदुस्तान को विश्व पर्यावरण दिवस का मेज़बान राष्ट्र बनाया है

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सबसे पहले आप कुछ आंकड़े देखिए, इससे आपको ये पता चलेगा कि इंसान, कितनी बुरी तरह पृथ्वी का दोहन कर रहा है  उसे प्लास्टिक के बोझ से मार रहा है पूरी संसार में हर मिनट पानी पीने वाली 10 लाख प्लास्टिक की बोतलें खरीदी जाती हैं जबकि पूरी संसार में हर वर्ष 5 लाख करोड़ प्लास्टिक के Bags प्रयोग होते हैं 1950 से लेकर 1970 के दशक तक बहुत ही कम मात्रा में प्लास्टिक का उत्पादन होता था, इसलिए Plastic Waste को Manage करना सरल था लेकिन 1990 के दशक में प्लास्टिक से पैदा होने वाला कचरा पिछले दो दशकों की तुलना में तीन गुना हो चुका था प्लास्टिक के उत्पादन में भी तीन गुने की बढ़ोतरी हो गई

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सन 2000 के दशक में पूरी संसार में इतना प्लास्टिक का कचरा पैदा हुआ, जितना पिछले 40 सालोंमें भी नहीं हुआ था  आज हम हर साल 30 करोड़ टन प्लास्टिक का कचरा पैदा करते हैं इसका वज़न पूरी संसार के लोगों के वज़न के बराबर है शोधकर्ताओं के मुताबिक 1950 से लेकर अब तक 830 करोड़ टन से भी ज्यादा प्लास्टिक का उत्पादन हो चुका है आपको जानकर हैरानी होगी कि आज तक पूरी संसार में पैदा हुए प्लास्टिक के कचरे में से सिर्फ 9% ही Recycle हो पाया है

जबकि 12% प्लास्टिक का कचरा जलाया गया है  बाकी का 79% धरती पर अलग अलग स्थानइकठ्ठा होकर धरती पर बोझ बन गया है भारत में आज से सिर्फ 22 साल पहले 1996 में हर वर्षसिर्फ 61 हज़ार टन प्लास्टिक का प्रयोग होता था, लेकिन अब ये बढ़ते बढ़ते 2017 में 1 करोड़ 78 लाख टन तक पहुंच चुका है आपको शायद ये पता नहीं होगा कि इस वक्त संसार के पर्यावरण में सबसे ज्यादा कचरा सिगरेट के Butts का है इसके बाद पानी की बोतलें, बोतलों के ढक्कन, खाने के Wrappers,  Straws पाए जाते हैं अमेरिका में हर रोज़ 50 करोड़ Plastic Straws का प्रयोगहोता है, अगर इन्हें जोड़ दिया जाए तो ये दो बार पृथ्वी का चक्कर लगाने के लिए बहुत ज्यादा हैं

इनमें से ज्यादातर Products का प्रयोग हम हर रोज़ करते हैं, लेकिन हम ये कभी नहीं सोचते कि इससे पृथ्वी पर कितना बोझ पड़ रहा है हर वर्ष संसार के महासागरों में 8 मिलियन टन प्लास्टिक का कचरा जाता है  इनमें से ज्यादातर कचरा नदियों से आता है 10 नदियां, पूरी संसार का 90% प्लास्टिक का कचरा समंदर में डालती हैं इनमें 3 नदियां प्रमुख हैं – सिंधु, ब्रह्मपुत्र  गंगा नदीजानकारों के मुताबिक अगर यही दशा रहे तो 2050 तक संसार के समंदरों में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक होगा

समुद्र की लहरें इस कचरे को बाहर नहीं जाने देतीं  समुद्र में किसी एक स्थान पर ये कचरा जमा हो जाता है संसार भर के महासागरों में इस वक्त ऐसे ही बड़े बड़े कूड़े के ढेर बन गए हैं प्लास्टिक खाने के बाद समुद्री जीवों का पेट हमेशा भरा-भरा रहता है  क्योंकि वो प्लास्टिक को पचा नहीं पाते इस भूल में ये जीव जंतु खाने की तलाश नहीं करते  आखिरकार मर जाते हैं इसी तरह समुद्र में रहने वाले छोटे जीव प्लास्टिक के इन कणों को भोजन समझ लेते हैं फिर इन जीवों को बड़ी मछलियां खाती हैं  फिर ये मछलियां इंसानों के खाने में प्रयोग होती है यानी प्लास्टिक वाला जो कचरा इंसान समुद्र में फेंक देता है वो वापस इंसानों के खाने की टेबल तक पहुंच जाता है

बहुत संक्षेप में अब आपको ये भी समझना चाहिए कि हर रोज़ जिन प्लास्टिक की बनी वस्तुओं का आप प्रयोग करते हैं, उन्हें पूरी तरह से नष्ट होने में कितना समय लगता है?प्लास्टिक की बोतलों को नष्ट होने में 450 वर्ष लगते हैं प्लास्टिक के बैग को एक हज़ार साल बच्चों के डायपर्स को पूरी तरह से नष्ट होने में 500 से 800 वर्ष लग सकते हैं जबकि एक Tin का Can 50 सालों में, चमड़े के जूते 25 से 40 सालों में, धागा 3 से 4 महीनों में, रुई 3 से 14 महीनों में, Nylon के कपड़े 30 से 40 सालों में पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं जबकि कांच की बोतल को पूरी तरह नष्ट होने में 10 से 20 लाख साल लग सकते हैं पूरी संसार में वायु प्रदूषण की वजह से हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा लोगों की मौत होती है हिंदुस्तानमें हर वर्ष वायु प्रदूषण की वजह से 25 लाख लोग मर जाते हैं

चीन दूसरे नंबर पर है, जहां हर वर्ष 18 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण की वजह से होती है United Nations की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी संसार में करीब 200 करोड़ लोग ऐसा पानी पीने पर मजबूर हैं, जो पूरी तरह से दूषित है गंदा पानी पीने की वजह से हर वर्ष संसार में 5 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो जाती है World Health Organisation के मुताबिक संसार के करीब 85 करोड़ लोग पीने के पानी की कमी से प्रयत्न कर रहे हैं जबकि संसार के 200 शहरों में पानी का गंभीर संकट आ चुका है UNESCO की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2050 तक हिंदुस्तान की सभी नदियों का पानी पीने लायक नहीं रहेगा यानी भारत पानी वाली कंगाली की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रहा हैहिंदुस्तान में हर आदमी रोजाना 400 ग्राम कचरा पैदा करता है

भारत Electronic कचरा पैदा करने वाला संसार का पांचवां सबसे बड़ा राष्ट्र है यानी हिंदुस्तान में कूड़े का ढेर लगता जा रहा है  जो राष्ट्र कूड़े के बोझ में दबा हुआ हो, वो कभी तेज़ी से विकास नहीं कर सकता अगर आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को बचाना है, तो आपको इसमें अपना सहयोगदेना होगा पर्यावरण को बचाने के लिए आप बहुत कुछ कर सकते हैं आप इलेक्ट्रिक कार चला सकते हैं, अपने Air Conditioner का प्रयोग कम कर सकते हैं, Rain Water Harvesting कर सकते हैं  गाड़ियों के बजाए साइकिल का प्रयोग कर सकते हैं  इस मामले में अगर आप चाहें तो हिंदुस्तान गवर्नमेंट के राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से प्रेरणा ले सकते हैं

आम तौर पर आपने मंत्रियों के साथ बड़ी बड़ी गाड़ियों का काफिला देखा होगा, लेकिन अर्जुनराम मेघवाल अक्सर साइकिल से चलते हैं दिल्ली में उन्हें किसी प्रोग्राम में भाग लेने जाना होता है, तो वो कई बार साइकिल का प्रयोग करते हैं   65 साल की आयु में कई किलोमीटर तक साइकिल चलाना कोई सरल कार्य नहीं है लेकिन ये सब वो अपने शौक  पर्यावरण की सेवा के लिए कर रहे हैंआमतौर पर हिंदुस्तान में कार को हमेशा सम्मान  रूतबे से जोड़ कर देखा जाता है बहुत सारे लोग कार देखकर ये तय कर लेते हैं कि सामने वाले की हैसियत क्या है  लेकिन अर्जुनराम मेघवाल ने पर्यावरण के लिए साईकिल चलाकर लोगों की इस सोच को तोड़ने का कार्य किया है 

किसी भी राष्ट्र की जनता पर इस बात का बहुत प्रभाव पड़ता है कि उनके नेता आम ज़िंदगी में किस तरह का व्यवहार करते हैं  आपने नोट किया होगा कि नेताओं की आलोचना वाली ख़बरे आप तक बहुत जल्दी पहुंच जाती हैं लेकिन उनके द्वारा किये गये अच्छे कार्यों को भी आपको देखना चाहिए इस बात को ध्यान में रखकर आज हम आपको Netherlands के पीएम Mark Rutte का एक वीडियो दिखाना चाहते हैं  इस वीडियो की सोशल मीडिया पर बहुत तारीफ़ की जा रही है 

Netherlands की संसद में वहां के पीएम के हाथ से कॉफी का एक कप छूट गया जिससे फर्श गंदा हो गया  इसके बाद पीएम ने एक सफाई कर्मचारी से Wiper लिया  खुद ही फर्श को साफ करने लगे इस कार्य को करने में उन्हें ज़रा सा भी संकोच नहीं हुआ  वहां खड़े कर्मचारियों ने इस बात का स्वागत किया 

इस पूरी घटना में सीखने वाली बात ये है कि गलती किसी से भी हो सकती है लेकिन उसे खुद ही सुधारना पड़ता है इसमें कोई शर्म की बात नहीं है  प्रदूषण के मामले में इंसान लंबे समय से गलती करते आ रहे हैं, लेकिन अब भी देर नहीं हुई है आप चाहें तो खुद अपने हिस्से का पुरुषार्थ करके, तस्वीर को बदल सकते हैं

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