Friday , September 21 2018
Loading...
Breaking News

मोदी-माल्या के बाद राष्ट्र के सबसे बड़े घोटाले के इंदौर से जुड़े तार

राष्ट्र के चर्चित स्टर्लिंग बॉयोटेक लोन घोटाले के तार सीधे मध्‍यप्रदेश के इंदौर शहर से जुड़ रहे हैं. नीरव मोदी और विजय माल्या के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस घोटाले में सबसे बड़ी कार्रवाई की है. घोटाले का ताना-बाना इंदौर से ही बुना गया. लोन भले ही गुजरात में स्थित कंपनियों को दिया गया, लेकिन उसकी मंजूरी में शहर के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने मुख्य किरदार निभाई. उसी की बदौलत फर्जी दस्तावेज, बैलेंस शीट के आधार पर 5 हजार करोड़ का लोन मंजूर भी हुआ  हजम कर उसे बैंकों के डूबत खाते में डलवा भी दिया गया.

Image result for प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)

स्टर्लिंग बॉयोटेक समूह  उससे जुड़ी चार अन्य कंपनियों को आंध्रा बैंक की अगुआई वाले कंसोर्टियम ने लोन दिया. इस दौरान इंदौर का सीए अनूप प्रकाश गर्ग न केवल लोन मंजूर करने वाले आंध्रा बैंक का डायरेक्टर बल्कि बैंक की ऑडिट कमेटी में होने के साथ बैंक की स्पेशल फ्रॉड प्रिवेंशन कमेटी का भी नेतृत्व कर रहा था.

Loading...

इसी कारण स्टर्लिंग बॉयोटेक कंपनी को न तो फर्जी दस्तावेजों के आधार लोन पाने में कठिनाई आई, न ही बाद में उसे हजम कर एनपीए घोषित करवाने में. CBI ने केस में छह लोगों को आरोपी बनाया है.इसमें कंपनी के कर्ताधर्ता संदेसरा बंधु के साथ गर्ग भी शामिल है. बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में मामला दर्ज कर जांच प्रारम्भ की.

loading...

संदेसरा बंधु फरार है, जबकि गर्ग और कंपनी के डायरेक्टर राजभूषण दीक्षित समेत तीन की गिरफ्तारी हो चुकी है. कंपनी की सिफारिश पर पद प्रवर्तन निदेशालय सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में सामने आया है गर्ग स्टर्लिंग बॉयोटेक कंपनी से पहले से ही जुड़ा था.

संदेसरा बंधु ने अपनी पहुंच के जरिए ही गर्ग को बैंक की कुर्सी तक पहुंचाया. बाद में उसी कंपनी के लिए गर्ग ने लोन मंजूर किया. बैंक का डायरेक्टर रहते गर्ग ने बैंक की ऑडिट कमेटी, रिस्क मैनेजमेंट कमेटी  स्पेशल फ्रॉड प्रिवेंशन कमेटी की कमान भी अपने हाथ में रखी, ताकि लोन मंजूर करवाने में कोई कठिनाई न हो. लोन मंजूर करवाने के बाद बोगस ट्रांजेक्शन और ट्रेडिंग के जरिए उसे बेनामी कंपनियों के खातों में पहुंचाया गया.

इन कंपनियों के ऑफिसर स्टर्लिंग ग्रुप के मोहरे थे. बाद में उस पैसे को हजम कर लिया गया. लोन मंजूर कराने के बाद गर्ग को कमीशन बतौर करोड़ों रुपए मिले. कुछ एंट्री प्रवर्तन निदेशालय के हाथ लग चुकी है. संभावना है कोलकाता की बोगस कंपनियों के जरिए उस पैसे को घुमाकर गर्ग ने लांग टर्म कैपिटल गेन चुकाया  काले से सफेद कर लिया.

इनकम कर छापे के दौरान संदेसरा बंधु के यहां मिली डायरी में भी गर्ग के नाम की एंट्री मिली थी.विदेश तक जांच प्रवर्तन निदेशालय लोन घोटाले में अब तक 50 से ज्यादा सर्च देशभर के अलग-अलग शहरों में कर चुकी है. अहमदाबाद प्रवर्तन निदेशालय की टीम दो बार गर्ग के दफ्तर पर भी जांच के लिए आ चुकी है.

शहर के कुछ  एंट्री ऑपरेटर भी इस मामले में जल्द गिरफ्त में आ सकते हैं. प्रवर्तन निदेशालय की जांच में लोन घोटाले का पैसा कर हेवन कंट्री मॉरिशस, ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड, यूएई, सेशल्स राष्ट्रों में बनी कुछ कंपनियों में लगाए जाने की बात सामने आई है.

चांदी के फर्नीचर भी मिले स्टर्लिंग कंपनी के कर्ताधर्ताओं की अब तक 4,700 करोड़ की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय अटैच कर चुका है. इनमें एनसीआर, मुंबई समेत गुजरात में भी संपत्ति शामिल है.इसके अतिरिक्त आलीशान फ्लैट, फॉर्म हाउस में मिले चांदी के फर्नीचर, लोन के पैसों से खरीदी गई लैंबॉर्गनी, बैंटले, रेंज रोवर जैसी कारें भी जब्त की गईं.

Loading...
loading...