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मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाली दवा कंपनियों के विरूद्ध गवर्नमेंट ने उठाया कदम

मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाली दवा कंपनियों के विरूद्ध गवर्नमेंट ने कठोर रुख अख्तियार कर लिया है. अगर कहीं भी नकली दवा बिकती मिली तो मार्केटिंग कंपनी की भी खैर नहीं. इसके दोषियों के लिए गवर्नमेंट उम्रकैद की सजा का प्रावधान करने की तैयार में है. दवा के घटिया पाए जाने पर तीन से पांच वर्ष तक की कारागार भी हो सकती है. दवा कानून के उल्लंघन पर अभी सिर्फ निर्माता कंपनियों के विरूद्ध ही कार्रवाई का प्रावधान है.

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स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ ऑफिसर के अनुसार, हाल में ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) ने उपरोक्त आशय के एक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी प्रदान की है. डीटीएबी राष्ट्र की सर्वोच्च दवा सलाहकार संस्था है. प्रस्ताव के मुताबिक, दवाओं की मार्केटिंग करने वाली कंपनियों को भी दंडित किया जाएगा. दवा के घटिया होने पर तीन से पांच वर्ष तक की कारागार हो सकती है जबकि दवा के नकली पाए जाने पर उम्रकैद की सजा भी हो सकती है. जानकारों का कहना है कि बड़ी-बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियां छोटे निर्माताओं से सस्ते दर पर खरीदारी कर दवाओं की केवल मार्केटिंग करती हैं.

उक्त ऑफिसर ने बताया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में संशोधन कर मार्केटिंग कंपनियों को भी बराबर का दोषी बनाया जाएगा. दवा के घटिया या नकली होने पर मार्केटिंग कंपनियां कानूनी कार्रवाई से अभी साफ बच निकलती हैं. इसके लिए सिर्फ दवा निर्माता कंपनियों पर ही गाज गिरती है. लेकिन नए प्रावधान लागू होने पर मार्केटिंग कंपनियां भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ जाएंगी. इन्हें भी दंड भुगतना होगा. उक्त ऑफिसर के मुताबिक, गवर्नमेंट के इस कदम का कुल मकसद मार्केट में उत्तम क्वालिटी की दवा का मिलना सुनिश्चित कराना है.

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