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आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार करने के बाद प्रणब मुखर्जी पर उठे सवाल

आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार करने के बाद पूर्व राष्ट्रपति व कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पर टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है.

सोमवार को एकबार फिर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली ने प्रणब मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय जाने के मामले को सही ठहराया है. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे की तरह मुखर्जी का बचाव किया है. उन्होंने बोला कि जिस तरह से प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के निमंत्रण स्वीकारे जाने को लेकर बातें बनाई जा रही हैं उसकी आवश्यकता है नहीं.
मोइली से पहले शिंदे भी प्रणब मुखर्जी का बचाव करते हुए बोला था कि उनका आरएसएस के प्रोग्राम में जाना गलत नहीं है क्योंकि वह एक धर्म निरपेक्ष व्यक्ति होने के साथ बहुत अच्छे विचारक हैं. पूर्व गृह मंत्री शिंदे ने बोला कि प्रणब मुखर्जी एक धर्मनिरपेक्ष आदमी हैं.

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पूर्व राष्ट्रपति व जिंदगी भर कांग्रेस पार्टी के कट्टर नेता रहे प्रणब मुखर्जी सात जून को नागपुर में आरएसएस के प्रोग्राम में शामिल होने जा रहे हैं. मुखर्जी के आरएसएस के निमंत्रण को स्वीकार किए जाने को लेकर पार्टी में टकराव प्रारम्भ हो गया है. पार्टी दो फाड़ में बंटी हुई नजर आ रही है. वैसे अपने इस निर्णय पर मुखर्जी चुप्पी तोड़ चुके हैं व कह चुके हैं कि वह अपना जवाब 7 जून को आरएसएस ऑफिस में देंगे. बता दें कि जबसे पूर्व राष्ट्रपति ने संघ के प्रोग्राम में जाने की बात स्वीकार की थी तभी से उन्हें भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा था. उन्हें इस मामले में कई चिट्ठियां मिली हैं. कई कॉल भी आए हैं. दरअसल, कई कांग्रेसी नेताओं ने प्रणब को चिट्ठी लिखकर व कॉल कर संघ के प्रोग्राम में नहीं जाने की सलाह दी है.

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कांग्रेस पार्टी में दो फाड़
जयराम रमेश व सीके जाफर शरीफ जैसे कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि प्रणब मुखर्जी जैसे विद्वान व धर्मनिरपेक्ष आदमी को संघ के साथ कोई नजदीकी नहीं दिखानी चाहिए. उनके संघ के प्रोग्राम में जाने से राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष माहौल पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. जयराम ने बोला कि प्रणब मुखर्जी ने हमारा मार्गदर्शन किया है. अब ऐसा क्या हो गया कि वह संघ के प्रोग्राम में मुख्य मेहमान बनकर जाएंगे.

हालांकि, पूर्व वित्त मंत्री पी। चिदंबरम ने का कहना है कि उन्होंने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है. लिहाजा, उन्हें प्रोग्राम में जाना ही चाहिए, लेकिन वहां जाकर संघ की विचारधारा में मौजूद खामियों के बारे में बताना चाहिए.

दरअसल, प्रणब मुखर्जी को नागपुर के संघ मुख्यालय में आयोजित प्रशिक्षण प्रोग्राम के 7 जून को होने वाले समापन समारोह में मुख्य मेहमान के तौर पर आमंत्रित किया गया है. इसी को लेकर कांग्रेस पार्टी में उथल-पुथल मची है. इस पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बोला है कि मुखर्जी का संघ का निमंत्रण स्वीकार करना अच्छी पहल है. राजनीतिक छुआछूत अच्छी बात नहीं है

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