Tuesday , September 18 2018
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WhatsApp के पेमेंट फीचर पर उठे सवाल

कैंब्रिज एनालिटिका-फेसबुक डाटा लीक से सतर्क हुई गवर्नमेंट राष्ट्र में व्यवसाय कर रही तमाम कंपनियों पर निगाह बनाए हुए है. इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने डाटा के मसले पर व्हाट्सएप की भुगतान सेवाओं पर सवाल उठाए हैं. मंत्रालय ने सोशल मैसेजिंग एप से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर इंडियन राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से स्पष्टीकरण मांगा है. साथ ही पूछा है कि क्या वह फेसबुक के साथ डाटा साझा करती है.
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डाटा  डिजिटल भुगतान सुरक्षा का पूरा जिम्मा आईटी मंत्रालय पर है. ऐसे में दोनों ही पहलुओं पर मंत्रालय कड़ी नजर बनाए हुए है. उसने एनपीसीआई से व्हाट्सएप की डाटा नीति पर जानकारी मांगी है. मंत्रालय यह जानना चाहता है कि एप किस तरह का डाटा एकत्र करता है  क्या वह फेसबुक के साथ अपना डेटा साझा करता है.

रिजर्व बैंक से भी मांगी सूचनाएं
आईटी मंत्रालय द्वारा इस बारे में रिजर्व बैंक से भी सूचनाएं मुहैया कराने को बोला गया है. हालांकि पहले भी मंत्रालय इस बारे में संबंधित विभागों से पड़ताल कर चुका है. इसकी वजह व्हाट्सएप की ओर से भुगतान प्रणाली में दोहरी सुरक्षा के नियमों का अनुपालन नहीं किया जाना था. हालांकि एप ने जवाब में स्पष्ट किया था कि उसकी भुगतान प्रणाली अभी ट्रायल स्तर पर है. भुगतान सेवाएं प्रारम्भकरने की स्थिति में वह दोहरी सुरक्षा के नियमों का पालन करेगी.

डाटा साझा करने पर होगी कार्रवाई

देश में व्हाट्सएप के 20 करोड़ से भी ज्यादा ग्राहक हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि उसकी भुगतान सेवाओं को बड़े पैमाने पर लोग अपनाएंगे. ऐसे में मंत्रालय उसके हरेक पहलू को परख रहा है, ताकि सेवाएं प्रारम्भ होने के बाद डाटा लीक या भुगतान सेवा में सेंध जैसा कोई मसला सामने नहीं आए.दरअसल, कैंब्रिज एनालिटिका को मंत्रालय ने फेसबुक डाटा लीक मामले में दो नोटिस जारी किया.इसमें पहले नोटिस का गोलमोल जवाब आया  दूसरा नोटिस भेजे जाने के दौरान कंपनी बंद हो गई.हालांकि मंत्रालय अब भी उसके जवाब का इंतजार कर रहा है. ऐसे में गवर्नमेंट उन सभी विदेशी कंपनियों के मामले में सतर्क है, जो डाटा एकत्र करती हैं. डाटा एकत्र करके अगर वह किसी अन्य कंपनी के साथ साझा करती है, तो इसके विरूद्ध गवर्नमेंट कड़ा कदम उठा सकती है.

बताते चलें कि व्हाट्सएप उपभोक्ता के नंबर, नाम सहित अन्य डाटा को एकत्र करता है. हालांकि भुगतान सेवा प्रारम्भ करने पर उसके पास उपयोगकर्ता का पूरा विस्तार होगा. इसकी वजह ग्राहक की पूरी तस्दीक के बाद ही सेवा के इस्तेमाल की अनुमति देना है. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी डिजिटल भुगतान सेवाओं के लिए ग्राहक को जानो यानी केवाईसी जरूरी कर दिया है.

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