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CM वसुंधरा राजे से न टकराने का निर्णय, बीजेपी 

भाजपा आलाकमान ने राजस्थान में CM वसुंधरा राजे से न टकराने का निर्णय किया है. पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार राज्य में प्रस्तावित विधान सभा चुनाव में वसुंधरा राजे ही मुख्य चेहरा होंगी. इसके अतिरिक्त प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष को लेकर सर्वमान्य चेहरे पर मुहर लगने की आसार है. वसुंधरा राजे राज्य में बीजेपी अध्यक्ष के चेहरे को लेकर अपनी पसंद का लगातार दबाव बनाए हुए हैं.
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हालांकि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष  वसुंधरा के करीबी अशोक परनामी के मुताबिक नये प्रदेश अध्यक्ष का निर्णय भाजपा अलाकमान करेगा. प्राप्त जानकारी के अनुसार बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह इस मामले में अब सर्वमान्य चेहरे को यह जिम्मेदारी देने के मूड में है. वह प्रदेश अध्यक्ष को लेकर विवाद  राजस्थान में पार्टी के भीतर गुटबाजी को  बढ़ावा देने के पक्ष में नहीं है.

नये प्रदेश अध्यक्ष के नामों में वसुंधरा के करीबी अरुण चतुर्वेदी के नाम की चर्चा की जा रही है. विनम्र स्वभाव के अरुण चतुर्वेदी वसुंधरा के करीबी हैं. सबको साथ लेकर चलने में माहिर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी उनकी पकड़ है. ऐसा माना जा रहा है कि इस हफ्ते के अंत तक राजस्थान के नये बीजेपी अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो सकती है.

टल गई थी घोषणा

अप्रैल के तीसरे हफ्ते में बीजेपी आलाकमान ने राजस्थान में नये प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा का मन बनाया था. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह संघ मुख्यालय नागपुर गए थे  इसके अच्छा अगले दिन वसुंधरा राजे दिल्ली आईं थीं. सूत्र बताते हैं कि इस दौरान वह बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह  संगठन मंत्री रामलाल से मिली थीं.
वसुंधरा राजे ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव की स्थिति को देखते हुए चुनाव तक इस फैसला को टाल देने का सुझाव दिया था. बताते हैं बीजेपी आलाकमान ने इसे मान लिया था.दरअसल बीजेपी जिस चेहरे को राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष का पदभार देना चाहती थी, वह वसुंधरा राजे को अखर रहा था.

वसुंधरा राजस्थान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी को हटाने के पक्ष में भी नहीं थी, लेकिन संसदीय उपचुनाव के बाद बढ़े दबाव को उन्होंने स्वीकारते हुए अशोक परनामी को हटाने पर सहमति दे दी थी. सूत्र बताते हैं कि बीजेपी का हाई कमान गजेन्द्र सिंह शेखावत को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पक्ष में था. जबकि वसुंधरा को यह प्रस्ताव मंजूर नहीं था.

वसुंधरा राजस्थान में बीजेपी की नेता के तौर पर स्थापित हो चुकी हैं. वह राज्य में बड़ा जनाधार रखती हैं. मौजूदा समय में वह राजस्थान की पॉलिटिक्स में अपनी आखिरी पारी नहीं खेलना चाहती. वसुंधरा को पता है कि बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष मन माफिक न होने पर कुछ महीने बाद होने वाले चुनाव में उन्हें कितनी राजनीतिक विसंगतियों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए वह फूंक-फूंककर कदम रख रही हैं.

दरअसल, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री से 2003 में राजस्थान में बीजेपी का चेहरा  राज्य की CM बनने वाली वसुंधरा ने पॉलिटिक्स मां के दूध के साथ सीखी है. उनके स्वभाव में है कि वह सरलता से पराजय नहीं मानती हैं. वह डिप्लोमैटिक भी हैं. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वसुंधरा ने राजस्थान में पूर्व उपराष्ट्रपति  बीजेपी के महान नेता भैरो सिंह शेखावत से बीजेपी का उत्तराधिकार लिया था.

तब जसवंत सिंह भी बीजेपी में बड़ा कद रखते थे. बाद में पार्टी के दोनों बड़े चेहरे के विचार कई मामलों में वसुंधरा से मेल नहीं खाए, लेकिन वसुंधरा का कुछ नहीं बिगड़ा. वह राजस्थान बीजेपी की पॉलिटिक्स में अपनी जड़ें गहराती चली गई.

राजस्थान में आम तौर पर पांच वर्ष में सत्ता बदल जाने का रिवाज सा है. एक बार कांग्रेस पार्टी तो एक बार भाजपा. लेकिन केंद्र की मोदी गवर्नमेंट  बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह लोकसभा चुनाव 2019 से पहले हर राज्य में पार्टी की सफलता चाहते हैं. ताकि लोकसभा की राहें सरल बन पाए. राजस्थान बीजेपी के नेताओं का एक धड़ा पहले राज्य में वसुंधरा को हटाने की मांग कर रहा था.

अब इस धड़े का फोकस अध्यक्ष के चेहरे पर है. इसके जवाब में वसुंधरा की रणनीति चुनाव करीब आने तक प्रदेश अध्यक्ष की तैनाती को टालने की है. इसके साथ-साथ वसुंधरा लगातार अपना दबाव बढ़ाने के लिए पूरे राज्य का दौरा करने में भी व्यस्त हैं. वह पिछले दो महीने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जा रही है.

सोमवार 28 मई से वह चार दिन के लिए मानगढ़, बांसवाड़ा के दौरे पर हैं. अगले महीने से उनकी योजना पूरे राज्य में विजय संकल्प यात्रा निकालने की है. बीजेपी आलाकमान ने भी इसकी अनुमति दे दी है. इस यात्रा में पीएम नरेंद्र मोदी  बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के भी शामिल होने की आसार है.

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