Saturday , September 22 2018
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वैचारिक भूकंप लाने वाली किताब

कैराना के बाद ख़बरों का रास्ता पाक की तरफ मोड़ते हैं क्योंकि आज वहां से एक दिलचस्प ख़बर आई है ख़बर ये है, कि पाक की खुफिया एजेंसी ISI के पूर्व चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल असद दुर्रानी के विरूद्ध Court of Inquiry का गठन कर दिया गया है  इसकी वजह ये है, कि असद दुर्रानी ने पाककी खुफिया एजेंसी का हकीकत राष्ट्र  संसार के सामने रखा था  हकीकत बोलने की हिम्मत दिखाई थी असद दुर्रानी ने हिंदुस्तान की खुफिया एजेंसी RAW के पूर्व प्रमुख AS Dulat के साथ मिलकर एक किताब लिखी है, जिसका नाम है – ‘The Spy Chronicles: RAW, ISI and the Illusion of Peace’ इस क़िताब में असद दुर्रानी के हवाले से बोला गया है, कि कश्मीर घाटी में अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को जन्म देने के पीछे ISI की बहुत बड़ी किरदार थी

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किताब में कारगिल युद्ध, एबटाबाद में अमेरिकी नेवी सील द्वारा ओसामा बिन लादेन की हत्या, कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी, हाफिज सईद, बुरहान वानी  कई दूसरे संवेदनशील मुद्दों को शामिल किया गया है इंडियन मीडिया में तो इस किताब को लेकर कोई ख़ास चर्चा नहीं हो रही हैलेकिन पाक में इस किताब ने वैचारिक भूकंप लाने का कार्य किया है कोई दुर्रानी को देशद्रोही कह रहा है, तो कोई ये कह रहा है, कि उन्होंने ISI के विरूद्ध जो कुछ भी लिखा है, उसका मकसद हिंदुस्तान को लाभ पहुंचाना है

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आज की ख़बर ये है, कि असद दुर्रानी को पाक की सेना के General Headquarters में पूछताछ के लिए बुलाया गया था जिसके बाद पाक की सेना ने उनपर Military Code Of Conduct के उल्लंघन का आरोप लगाया है  असद दुर्रानी को Exit Control List में डाल दिया है Exit Control List का मतलब ये है, कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक असद दुर्रानी, पाक से बाहर नहीं जा सकते

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वैसे असद दुर्रानी ने जो कुछ भी बोला है, उसमें कुछ भी नया नहीं है ये बात हम कई सालों से संसारको समझाते आए हैं क्योंकि आतंकियों को पाल-पोस कर बड़ा करना  फिर उनका प्रयोगहिंदुस्तान के विरूद्ध करना, पाक की पुरानी रणनीति है आज हिंदुस्तान की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी पाक को यही संदेश देने की प्रयास की है  वो संदेश ये है, कि जबतक पाकिस्तान, आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता, तबतक वार्ता का कोई मतलब नहीं है

वैसे पाक वार्ता की नहीं, गोली की भाषा समझता है आज दक्षिण कश्मीर के शोपियां में एक बड़ा हमला हुआ है आतंकियों ने आज प्रातः काल 44 राष्ट्रीय राइफल्स के Mine Protected Vehicle को Improvised explosive device लगाकर उड़ा दिया है इस हमले में राष्ट्रीय राइफल्स के तीन जवान घायल हुए हैं हालांकि, राहत की बात ये है, कि इंडियन सेना को इस हमले में कोई बड़ी Casualty नहीं हुई लेकिन इसके बावजूद एक बहुत बड़ा प्रश्न हम सबके सामने है

नक्सली हमले में IED ब्लास्ट करके धमाकों की ख़बरें तो हमने कई बार सुनी हैं, लेकिन कश्मीर घाटी में इस प्रकार का हमला होना, एक नया ट्रेंड है क्योंकि, घाटी में ऐसे धमाकों की ख़बरें एक दशक पहले आया करती थीं ऐसे में प्रश्न ये है, कि क्या कश्मीर घाटी में मौजूद आतंकवादी, नक्सलियों की तरह हमला करने की ट्रेनिंग ले रहे हैं ? अगर ऐसा है, तो स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है  हालांकि, इसके बावजूद हमें अपने राष्ट्र की सेना पर गर्व होना चाहिए क्योंकि, वो हर चुनौती से मुक़ाबला करने के लिए तैयार है वो पत्थरबाज़ों के पत्थरों की चोट भी अपने बॉडी पर सहते हैं पेट्रोल बम का भी सामना करते हैं, लेकिन फिर भी कभी असहनशील नहीं होते क्योंकि, उन्हें अपने  पराए का फर्क अच्छी तरह पता है हिंदुस्तान की सेना अपनी बंदूक का ट्रिगर सिर्फ आतंकियों के लिए दबाती है पत्थरबाज़ों के लिए नहीं

जबकि पाक की सेना बलोचिस्तान  गिलगिट-बालटिस्तान में अपने ही लोगों पर आर्टिलरी गन, हेलीकॉप्टर गनशिप  Tanks का प्रयोग करती है श्रीलंका ने LTTE के आतंकियों से निबटने के लिए हर किस्म के हथियार का प्रयोग किया था जिसमें वायुसेना भी शामिल थी किसी घर में छिपे आतंकियों के लिए सेना मोर्टार या रॉकेट लॉन्चर्स जैसे भारी हथियारों का प्रयोग कर सकती है लेकिन इंडियन सेना आमतौर पर ऐसा नहीं करती हमारे सैनिक घरों में घुसकर आतंकियों को मारते हैं, जबकि ऐसी स्थिति में अंदर जाने वाले सैनिक की जान जाने का ख़तरा ज़्यादा होता है लेकिन इंडियनसेना किसी भी प्रकार के Collateral damage से बचना चाहती है

दुनिया की कोई भी सेना अपने सैनिकों की जान की क़ीमत पर, इस तरह का ख़तरा नहीं उठातीऑपरेशन पर जाते समय, ऑपरेशन के समय  ऑपरेशन से लौटते समय सैनिकों पर सबसे ज्यादा पत्थरबाज़ी होती है लेकिन सेना, पत्थरबाज़ों पर फायरिंग नहीं करती क्योंकि ऐसा करने से भारी नुकसान हो सकता है अगर आप चारों तरफ से पत्थरबाज़ों से घिरे हुए हों  आप पर ईंट  पत्थरों की बरसात हो रही हो तो आप क्या करेंगे ? इंडियन सेना हर रोज़ पूरे संयम के साथ इस मुसीबत से लड़ती है इंडियन सैनिक पत्थरों की चोट सहते हैं, लेकिन इसके बावजूद पत्थरबाज़ों की जान नहीं लेते

रमज़ान के पवित्र महीने में आतंकियों  पत्थरबाज़ों को सीज़फायर का फायदा मिल रहा है  जबकि हमारे सैनिकों के हाथ बंधे हुए हैं  वो बहुत कठिन परिस्थितियों में बिना हमला किए, खुद को बचा रहे हैं इस हालात को  करीब से समझने के लिए आज आपको हमारे साथ पत्थरबाज़ों के गढ़ कहे जाने वाले दक्षिण कश्मीर चलना होगा वहां से हमारी टीम ने पत्थरों की बरसात के बीच Ground Reporting की है ये दक्षिण कश्मीर का वही शोपियां हैं, जहां आतंकियों ने आज IED ब्लास्ट किया है

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