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कितने भोपाल, कितने तूतीकोरिन

भारत दुनिया की भी-ुनवजयाण औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक भोपाल गैस कांड का साक्षी और भुक्तभोगी
है। 1984 में हुए उस भयावह हादसे के जख्म अब भी पीड़ितों को तकलीफ देते हैं। लेकिन इससे अधिक विडंबना
क्या होगी कि इस दे-रु39या में अब भी औद्योगिक विकास के नाम पर मासूमों की जान लेने में सरकार को हिचक नहीं हो
रही है। राजनीति में संवेदन-रु39याीलता और दूरद-िरु39र्याता के लिए बिल्कुल भी जगह नहीं बची है और केवल व्यापारियों
की तरह मुनाफा कमाने का लालच ब-सजय़ता जा रहा है। तमिलनाडु के तूतीकोरिन में 12 लोगों की मौत इसी
स्वार्थलिप्सा की देन है। तूतीकोरिन में वेदांता समूह के स्टरलाइट कापर प्लांट के विस्तार के विरोध में स्थानीय
लोगों ने आवाज उठाई तो उसे -रु39याांत करने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाईं। मंगलवार को प्रद-रु39र्यानकारियों की

भीड़ पर पुलिस की गोलीबारी में 11 लोग मारे गए, उसके अगले दिन यानी बुधवार को प्रद-रु39र्यानकारी फिर एकत्र हुए, तो
पुलिस ने तब भी बल प्रयोग किया, जिसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है। ऐसा नहीं है कि इस कारखाने के विस्तार
के खिलाफ एकदम से लोग उठ खड़े हुए। इस साल की -रु39याुरुआत से इस 20 साल पुराने प्लांट के विस्तार के खिलाफ स्थानीय
जनता आवाज उठा रही है। दरअसल इस कारखाने से निकलने वाला लावा जल, थल और वायु प्रदू-ुनवजयाण को ब-सजय़ा रहा है।
2008 में तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज ने एक रिपोर्ट जारी की थी, -रु39यहेल्थ स्टेटस एंड एपिडेमियोलॉजिकल स्टडी
अराउंड 5 किलोमीटर रेडियस ऑफ स्टरलाइट इंडस्ट्रीज (इंडिया) लिमिटेड’ नाम की रिपोर्ट में इस कॉपर इकाई
को यहां के निवासियों में सांस की बीमारियों के ब-सजय़ते मामलों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। रिपोर्ट में
बताया गया था कि कुमारेदियापुरम और थेरकु वीरपनदीयापुरम के भूमिगत जल में आयरन की मात्रा तय सरकारी मानक से
17 से 20 गुना ज्यादा है। जिसके कारण यहां के लोगों में कमजोरी ब-सजय़ रही है, पेट और जोड़ों में दर्द की
-िरु39याकायत हो रही है। इस कारखाने के आसपास सांस के मरीजों की संख्या भी अधिक पाई गई। इसके अलावा -रु39यसाइनस’ और
-रु39यफैरिनगाइटिस’ सहित आंख, नाक व गले के अन्य रोगों से यहां के निवासी पीड़ित पाए गए। खबर यह भी है कि
तमिलनाडु में 2015 में जो भी-ुनवजयाण बा-सजय़ आई थी, उसकी भयावहता ब-सजय़ाने में भी यह फैक्ट्री जिम्मेदार
है। क्योंकि थूथूकुडी जिले में नदी के किनारे जिन जगहों पर कॉपर यूनिट से निकलने वाला स्लैग गिराया गया था,
वहां पानी के ब-सजय़े हुए स्तर के कारण बा-सजय़ ने और अधिक नुकसान पहुंचाया। तमिलनाडु प्रदू-ुनवजयाण नियंत्रण बोर्ड ने
14 मार्च, 2017 को एक कारण बताओ नोटिस जारी कर कंपनी पर पर्यावरण से जुड़े कई मानकों का उल्लंघन करने का
आरोप लगाया था, इसमें नदी में कॉपर स्लैग डालना भी -रु39याामिल था। ये तमाम तथ्य स्टरलाइट इंडस्ट्री द्वारा पर्यावरण
की अनदेखी को बयां कर रहे हैं। इसी वजह से उसे महारा-ुनवजयट्र से तमिलनाडु -िरु39याफ्ट होना पड़ा था। दरअसल 1992 में
महारा-ुनवजयट्र उद्योग विकास निगम ने रत्नागिरि में स्टरलाइट लिमिटेड को 500 एकड़ जमीन का आबंटन किया था, बाद
में स्थानीय लोगों ने परियोजना का विरोध किया जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर जांच के लिए एक कमिटी बना
दी। जिसने 1993 में अपनी रिपोर्ट दी और इसके आधार पर जिला अधिकारी ने कंपनी को उस इलाके में निर्माण कार्य
रोकने का आदे-रु39या दिया। बाद में यही फैक्ट्री महारा-ुनवजयट्र से तमिलनाडु -िरु39याफ्घ्ट कर गई। इस तरह के प्रदू-ुनवजयाण की मार
सबसे पहले आम जनता पर ही पड़ती है. क्योंकि न वह 24 घंटे वातानुकूलित कमरों में रह सकती है, न महंगी
म-रु39याीनों से साफ किया पानी का खर्च उठा सकती है, न अपना घर-ंउचयबार छोड़कर कहीं जा सकती है। तूतीकोरिन की जनता
अपने लिए साफ हवा-ंउचयपानी ही तो चाहती है और इसलिए उसने उस उद्योग का विरोध किया, जो पहले ही काफी प्रदू-ुनवजयाण
फैला चुका है। लेकिन सरकार और प्र-रु39याासन ने मामले की गंभीरता को नहीं सम-हजया और जब स्थिति बेकाबू नजर आई
तो हिंसा करने से नहीं -िहजय-हजयकी। अब इस मामले पर राजनीति -रु39याुरू हो चुकी है। कांग्रेस ने इसकी तुलना जलियांवाला बाग
हत्याकांड से की है, जबकि इन पंक्तियों के लिखे जाने तक माननीय मोदी जी का दर्द छलक कर सामने नहीं आया है। वे
औद्योगिक घरानों के खिलाफ -रु39याायद ही कुछ कहें।
इस मामले में तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी सबसे पहले बनती है, जिसे निभाने में वह पूरी तरह असमर्थ दिखी है। यह
प्रदे-रु39या अब तक अपने बेहतरीन प्र-रु39याासन के लिए दे-रु39या में जाना जाता रहा है। चाहे जयललिता हों, करूणानिधि हों या उनके
पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री, सभी ने कु-रु39याल और कठोर प्र-रु39याासक की भूमिका निभाई है, जनहित की अनेक योजनाएं चलाई
हैं, हा-िरु39याए पर पड़े वंचित समूहों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए हैं। लेकिन अभी केवल सत्ता पर बने
रहने का सरोकार राजनीतिक दलों का दिख रहा है। सत्ता में बैठे लोग हों या विपक्ष, सभी की प्राथमिकता अपनी
राजनैतिक स्थिति मजबूत करने की है, जिसमें उद्योगपति उनके काम आते हैं। जो हाल केन्द्र और बाकी राज्यों का है,
वही तमिलनाडु का भी है। लेकिन सरकार को सोचना होगा कि भोपाल, नंदीग्राम, सिंगूर, कुडनकुलम और
तूतीकोरिन जैसे -रु39याहरों की सूची उसे कितनी लंबी होने देनी है।
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दल बदल से संसदीय लोकतंत्र की जड़ें कमजोर

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संविदा सरकार के अपदस्थ होने के बाद मिश्रजी को ही मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था परंतु ऐसा नहीं हो सका
क्योंकि एक चुनाव याचिका पर निर्णय देते हुए उच्च न्यायालय ने मिश्रजी के 1963 के निर्वाचन को रद्द कर दिया। फलस्वरूप
-रु39ययामाचरण -रु39याुक्ल मुख्यमंत्री चुने गए। चुनी गई सरकार के बर्खास्त करने और दलबदलुओं की मदद से सरकार बनने के
घटनाक्रम से राजनीति के तौर-ंउचयतरीकों में भारी परिवर्तन आ गया। सत्ता पर राजनैतिक अवसरवादिता और भ्र-ुनवजयटाचार छा
गए। यदि मिश्रजी का सु-हजयाव मान लिया जाता तो दलबदल की बीमारी सदा के लिए समाप्त हो जाती।
दलबदल ने हमारे संसदीय लोकतंत्र की जड़ों को काफी कमजोर किया है। दलबदल के कारण मतदान के द्वारा चुनी गई
संसद और विधानमंडल लगभग अप्रासंगिक हो गए हैं। मतदाता किसी के हाथ में सत्ता सौंपे दलबदल से इस जनादे-रु39या को
बदला जा सकता है। पिछले व-ुनवजर्याों में दलबदल के रोग पर नियंत्रण पाने के अनेक प्रयास किए गए हैं परंतु अभी तक अपेक्षित
सफलता नहीं मिली है। यदि संसदीय व्यवस्था को पूरी तरह -रु39याक्ति-ंउचयसंपन्न बनाना है तो यह उसी समय होगा जब दलबदल के
रोग से सौ प्रति-रु39यात छुटकारा पा लिया जाए। इस संबंध में मैं सन् 1967 में हुए एक घटनाक्रम का उल्लेख करना
चाहूंगा। सन् 1967 में अनेक राज्यों की निर्वाचित सरकारों को अपदस्थ कर दिया गया था। इनमें मध्यप्रदे-रु39या की
कांग्रेस सरकार भी -रु39याामिल थी। व-ुनवजर्या 1963 में पंडित द्वारिका प्रसाद मिश्र मुख्यमंत्री बने थे। लगभग 12 व-ुनवजर्या के
वनवास के बाद उनकी कांग्रेस में वापिसी हुई थी। 1967 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने उनके ही नेतृत्व
में लड़ा था। उस समय राजमाता विजयाराजे सिंधिया भी कांग्रेस में थीं। टिकटों के वितरण के मुद्दे को लेकर
राजमाता से उनके गंभीर मतभेद हो गए। चुनाव के पूर्व कांग्रेस के टिकटों के वितरण के मुद्दे पर चर्चा के लिए
राजमाता ने मिश्र से भेंट की। उन्होंने मिश्रजी से कहा कि मैं अपने राज्य की सीटों के संबंध में बात करने आई
हूं। मिश्रजी ने उनसे पूछा कि आपका राज्य कहां है? राजमाता ने कहा कि ग्वालियर राज्य। इस पर मिश्र जी ने कहा कि ग्वालियर
(सिंधिया) राज्य का भारत में विलय हो चुका है इसलिए उस क्षेत्र की टिकटों का फैसला पार्टी करेगी। आप स्वयं कहां
से लड़ना चाहती हैं यह बताएं हम उस पर पूरी गंभीरता से विचार करेंगे।
मिश्रजी के इस रवैये से राजमाता ख$फा हो गईं। कुछ समय बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और अलग से चुनाव
लड़ने का फैसला किया। राजमाता ने पूरे पूर्व सिंधिया राज्य में अपने उम्मीदवार खड़े किए। उन्होंने जनसंघ का
भी सहयोग लिया। उनके उम्मीदवारों को जबरदस्त जनसमर्थन मिला और सिंधिया राज्य की सीटों से चुनाव लड़ने
वाले सभी कांग्रेस उम्मीदवारों की जमानतें जप्त हो गईं।
राजमाता को उम्मीद थी कि संपूर्ण मध्यप्रदे-रु39या में कांग्रेस चुनाव हार जाएगी। चुनाव नतीजों का अनुमान लगाने
वाली एजेंसियों ने भी ऐसी ही भवि-ुनवजययवाणी की थी। परंतु ऐसा नहीं हुआ और कांग्रेस चुनाव जीत गई व मिश्रजी
पुनरू मुख्यमंत्री बन गए। परंतु राजमाता का आक्रो-रु39या कम नहीं हुआ। उन्होंने मिश्रजी की सरकार का तख्ता पलटने की कसम
खा ली। परिस्थितियों ने कुछ ऐसा मोड़ लिया मिश्रजी से नाराज विधायकों की संख्या धीरे-ंउचयधीरे ब-सजय़ती गई। अंततः
ऐसे विधायकों की संख्या 36 हो गई। यह बात सबको ज्ञात हो गई कि ये विधायक किसी भी दिन कांग्रेस छोड़ सकते
हैं।
इन विधायकों को अनु-रु39याासित करने के लिए मिश्रजी ने सु-हजयाव दिया कि विधानसभा को ही भंग कर दिया जाए। उनका दृ-सजय़
मत था कि यदि विधानसभा भंग कर दुबारा चुनाव कर लिए जाएं तो इससे दलबदल की अनैतिक प्रवृत्ति पर पूरी तरह से
नियंत्रण पाया जा सकेगा। मिश्रजी ने इस संबंध में कांग्रेस हाईकमान से अनुमति मांगी। मिश्रजी के सु-हजयाव पर विचार करने
के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई। बैठक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी मौजूद थीं।
विचार-ंउचयविम-रु39र्या के प-रु39यचात यह निर्णय हुआ कि मिश्रजी को इस बात के लिए अधिकृत किया जाए कि वे राज्यपाल से विधानसभा भंग
करने की सिफारि-रु39या करें। इसके बाद मिश्रजी ट्रेन से भोपाल के लिए रवाना हो गए। मिश्रजी के रवाना होने के बाद भी
कार्यसमिति की बैठक जारी रही और पूर्व के निर्णय को पलटते हुए और अंतिम निर्णय यह हुआ कि विधानसभा को भंग
न करवाया जाए। अंततरू 36 विधायकों ने कांग्रेस छोड़ दी जिससे मिश्रजी की सरकार गिर गई। कांग्रेस सरकार के अपदस्थ
होने के बाद दलबदलुओं के नेता गोविंद नारायण सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया। नई सरकार को समर्थन देने के
लिए संयुक्त विधायक दल (संविद) का गठन किया गया। इस दल का नेता राजमाता को बनाया गया परंतु उन्होंने कोई पद

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स्वीकार नहीं किया। जनसंघ के नेता वीरेन्द्र कुमार सकलेचा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। संविद सरकार लगभग दो
व-ुनवजर्या तक ही चल सकी। सभी दलबदलू विधायक कांग्रेस में वापिस आ गए और गोविंद नारायण ने मुख्यमंत्री पद से
इस्तीफा दे दिया। संविद सरकार के अपदस्थ होने के बाद मिश्रजी को ही मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था परंतु ऐसा
नहीं हो सका क्योंकि एक चुनाव याचिका पर निर्णय देते हुए उच्च न्यायालय ने मिश्रजी के 1963 के निर्वाचन को रद्द कर
दिया। फलस्वरूप -रु39ययामाचरण -रु39याुक्ल मुख्यमंत्री चुने गए। चुनी गई सरकार के बर्खास्त करने और दलबदलुओं की मदद से
सरकार बनने के घटनाक्रम से राजनीति के तौर-ंउचयतरीकों में भारी परिवर्तन आ गया। सत्ता पर राजनैतिक अवसरवादिता और
भ्र-ुनवजयटाचार छा गए। यदि मिश्रजी का सु-हजयाव मान लिया जाता तो दलबदल की बीमारी सदा के लिए समाप्त हो जाती।
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आज का रा-िरु39या फल
मे-ुनवजया:-ंउचय पुराने संबंधों में प्रगा-सजय़ता ब-सजय़ेगी। सब कुछ सामान्य होते हुए भी मन अरुचि का -िरु39याकार होगा।
-रु39याासन-ंउचयसत्ता व राजकीय क्षेत्र से जुड़े लोगों की क्रिया-रु39याीलता ब-सजय़ेगी। कार्यक्षेत्र में लाभ के आसार हैं। बृ-ुनवजयाभ
ः-ंउचय किसी नई योजना पर विचारमग्न होंगे। पुरानी बातों को भूलने की चे-ुनवजयठा करें। उच्च महत्वाकांक्षा जल्द
ऊंची प्रगति के लिए प्रेरित करेंगी। दायित्वों की समयानुकूल पूर्ति हेतु प्रयत्न-रु39याील होंगे।
मिथुन:-ंउचय कोई अप्रत्यासित समाचार अचम्भित कर सकता है। कहीं-ंउचयकहीं अत्याधिक बोलना आपके लिए हानिकारक हो
सकता है। महत्वपूर्ण जगहों पर वाणी पर संयम रखने की चे-ुनवजयठा करें।
कर्क:-ंउचय राजनीतिज्ञों के लिए समय लाभकारी रहेगा। निकट संबंधों में कुछ अप्रिय बातें दूरी पैदा करेंगी। नौकरी
का वातावरण सुखद होगा। असमाजिक तत्वों से दूरी बनायें। घर-ंउचयपरिवार में उत्साहपूर्ण माहौल होगा।
सिंह:-ंउचय भौतिक आकांक्षाएं मन को उद्वेलित करेंगी। मूल्यवान समय को व्यर्थ में जाया न करें। ईरीय आस्था में
वृद्धि होगी। आर्थिक क्षेत्र में परिश्रम का लाभ प्राप्त होगा। अपने स्वास्य के प्रति सचेत रहें। कन्या:-ंउचय परिजनों की
छोटी-ंउचयछोटी बातों का बुरा न माने। महत्वाकांक्षाओं को फलित करने में असमर्थता संभव। निरा-रु39याावादी
विचारों का त्याग करें। जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव। स्वास्य का ध्यान रखें।
तुला:-ंउचय पुरानी मर्मस्प-रु39र्याी बातें आपको भावनात्मक रूप से नीरस बना सकती हैं। कुछ पारिवारिक चिंताएं मन को
दुखित करेंगी। कुछ स्वास्य संबंधी कठिनाइयां मन को दुखित कर सकती हैं।
वृ-िरु39यचक:-ंउचय कायरे के अत्याधिक बो-हजय से मन बो-िहजयल होगा। मन को सकारात्मक दि-रु39याा में सक्रिय करते हुए स्वयं को
ऊर्जावान बनाए रखें। महत्वपूर्ण दायित्व अपनी पूर्ति हेतु मन पर दबाव बनाएंगे।
धनु:-ंउचय कोई महत्वपूर्ण कार्य सार्थक होने का योग है। मधुरवाणी से सगे-ंउचयसंबंधों में प्रगा-सजय़ता
ब-सजय़ाएंगे। आलस्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अवरोधक होगा। जीवनसाथी के भावनात्मक सहयोग उत्साहित होंगे।
मकर:-ंउचय जीविका क्षेत्र में लाभ के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। सामान्य दिनर्चया के साथ बीत रहे जीवन में उत्साह का
अभाव रहेगा। किसी संबंधी अथवा खुद की अस्वस्थता से परे-रु39याान हो सकते हैं।
कुंभ:-ंउचय किसी इच्छित कार्य की पूर्ति से प्रसन्नता संभव। सगे-ंउचयसंबंधों में नैतिक कर्तव्यों से विमुख न हो।
पूरा दिन अध्यात्मिक व पारंपरिक कायरें में व्यतीत होगा। नये कायरे में ब्यस्तता ब-सजय़ेगी।
मीन:-ंउचय नयी आकांक्षाएं मन को उद्वेलित करेंगी। अच्छे आचार-ंउचयविचार से सगे-ंउचयसंबंधों में लोकप्रिय बनेंगे।
स्वास्थ का पूरा ख्याल करें। भावुकता व्यावहारिक जगत के अनुकूल चलने में बाधक होगी।

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