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‘‘मीडिया’’ की आलोचना नही आत्ममंथन की जरूरत

प्रेम -रु39यार्मा
भारत का मीडिया स्वतंत्र है। इसकी नि-ुनवजयपक्षता पर उंगली नही उठाई जा सकती। अपवादों को छोड़ दिया जाए तो
हिन्दुस्तान का मीडिया वि-रु39यव का सबसे ताकतवर है। कर-ंउचयनाटक चुनाव से पूर्व लाख मोदी लहर के बावजूद मीडिया
कर-ंउचयनाटक के चुनाव परिणाम का जो अंदाजा लगा रही थी वह ठीक था। केन्द्र की सत्ता मेें भाजपा के होते हुए
भी मीडिया ने यह नही कहा कि कर-ंउचयनाटक में कमल खिल रहा है। त्रि-रु39यांकु सरकार बनने का संकेत कर-ंउचयनाटक की जनता
और राजनैतिक दल दे चुके थे। कर्नाटक की जनता ने इसी चुनाव में 77 अपराधिक प्रवृत्ति के इनमें 54 हत्यारोपी
व्यक्ति को अपना प्रतिनिधित्व सौपा है। यह तो तय है कि केन्द्र में भाजपा की सरकार है। विपक्षी दलों की गैर जिम्मेदारी
और सत्ता में रहते जनता की अनदेखी से नि-िरु39यचत ही आज भाजपा कुछ ताकतवर हुई है और कुछ ताकत वह ‘‘हवा’’ के
आधार पर बनाए हुए है। कर-ंउचयनाटक में जो खेल चल रहा है उसमें भाजपा की भूमिका को कही से नकारा नही जा
सकता। इस बाॅत को मीडिया पूरी तरह से नि-ुनवजयपक्ष रूप से जनता के सामने ला भी रहा है। अगर बैलेट पेपर पर वोटिंग नही हो
रही है। केन्द्र सरकार मनमानी कर रही है। तो इसमें मीडिया को दो-ुनवजया देना कहा तक जायज है। मीडिया द्वारा

कर-ंउचयनाटक चुनाव से लेकर अब तक जो कुछ जनता के सामने रखा गया उसमें दोनों पक्षों को बराबरी का दर्जा दिया
गया। यहाॅ इस बाॅत को जरूर इंगित करना उचित होगा कि सरकार किसी की, कितनी भी ताकतवर हो वह मीडिया को रोक
नही सकती। अड़गा लगा सकती है। क्योकि आज हिन्दुस्तान में मीडिया का इतना कद ब-सजय़ है कि कोई भी सरकार और
ताकतवर -रु39याक्ति अगर दो चार, दस-ंउचयबीस चैनलों और सौ-ंउचयदो सौ समाचार पर सेंसर -िरु39याप लागू करेगा। पचास चैनल और
पाॅच सौ समाचार पत्र ऐसे है जो उसकी बखियाॅ उघड़ने के लिए तैयार बैठे है। अनुचित और -रु39याक्ति का बेजा दुरूप्रयोग
हिन्दुस्तान की मीडिया चलने नही देगीं। अब ऐसे में जनता और विपक्षी दल मीडिया पर दो-ुनवजयाारोपण की जगह
आत्ममंथन करे तो बेहतर होगा। कभी जातिवाद, कभी क्षेत्रवाद और कभी भाई भतीजावाद के आधार पर वोट
देकर जनता ने स्वंय के पैर पर कुल्हाडी भारी है। अब देखिये कि खंडित जनादे-रु39या राजनीतिक दलों को किस तरह मनमानी
का अवसर देता है, इसका ही गवाही कर्नाटक का वर्तमान राजनीतिक परिदृ-रु39यय दे रहा है। कर्नाटक में जैसा जनादे-रु39या आया
उसमें किसी भी दल के लिए यह संभव ही नहीं कि वह बिना जोड़-ंउचयतोड़ सरकार बना सके। कांग्रेस ने जैसे ही यह
देखा कि भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बाद भी बहुमत तक नहीं पहुंच पाएगी उसने आनन-ंउचयफानन उस
जनता दल-ंउचयसेक्युलर के नेतृत्व में सरकार बनाने की चाल चली जिसे उसने चुनाव प्रचार के दौरान खूब खरी-ंउचयखोटी
सुनाई थी। खुद राहुल गांधी ने जद-ंउचयएस को भाजपा की बी टीम बताया था, लेकिन चुनाव बाद कांग्रेस ही उसकी
बी टीम बन गई। क्या यह आद-रु39र्या लोकतांत्रिक तरीका है कि पहले नंबर वाले दल को सत्ता से दूर करने के लिए दूसरे नंबर
वाला दल तीसरे नंबर वाले दल की अगुआई स्वीकार कर ले? क्या जनादे-रु39या का संदे-रु39या यही था? अगर कांग्रेस और जद-ंउचयएस को
यही करना था तो वे मिलकर चुनाव क्यों नहीं लड़े? क्या यह जनता के साथ छल नहीं कि एक-ंउचयदूसरे के खिलाफ चुनाव
लड़े दल नतीजे आते ही एक हो जाएं? इन सवालों का कोई जवाब इसलिए नहीं, क्योंकि संविधान इस पर मौन है कि
खंडित जनादे-रु39या की स्थिति में सरकार का गठन कैसे होना चाहिए? क्या राजनीतिक दलों का यह दायित्व नहीं कि वे तू
तू-ंउचयमैं मैं करने के बजाय खंडित जनादे-रु39या की हालत में सरकार गठन संबंधी नियम-ंउचयकानूनों के अभाव को
प्राथमिकता के आधार पर दूर करें? यह न जाने कब से स्प-ुनवजयट है कि खंडित जनादे-रु39या में सरकार गठन की प्रक्रिया बिना नियमों
वाले खेल में तब्दील हो जाती है और जोड़-ंउचयतोड़, छल-ंउचयछद्म के बिना सरकार नहीं बनती, लेकिन अपने स्वार्थो
के चलते किसी भी राजनीतिक दलों ने इसके लिए कभी कोई को-िरु39या-रु39या ही नहीं की कि त्रि-रु39यांकु सदन में सरकार गठन के
उचित तौर-ंउचयतरीके तय हों। वे चुनाव पूर्व गठबंधन के मामले में भी इसीलिए उदासीन बने रहे ताकि उन्हें
जनादे-रु39या की मनमानी व्याख्या करने का मौका मिल सके।यहाॅ यह कहना भी गलत न होगा कि कर्नाटक के राज्यपाल ने न
केवल भाजपा के मन मुताबिक फैसला लिया, बल्कि यह भी सुनि-िरु39यचत किया कि येद्दयुरप्पा जल्द से जल्द मुख्यमंत्री पद की -रु39यापथ ले
लें, लेकिन उनके फैसले पर यह कहने का कोई मतलब नहीं कि उन्होंने लोकतंत्र की हत्या कर दी। आखिर वे लोग
ऐसा कैसे कह सकते हैं जो अपने समय राज्यपालों से मन मुताबिक फैसले कराते रहे और पसंदीदा दल की सरकारें बनवाते
रहे? कर्नाटक के राज्यपाल ने तो ठीक वही किया जो कांग्रेस के जमाने के राज्यपाल किया करते थे। किसी दल और खासकर
कांग्रेस को अपने विरोधी दल से यह अपेक्षा नहीं करनी चाहिए कि वह उसकी तरह के काम न करे। भले ही सुप्रीम कोर्ट
कांग्रेस की यह -िरु39याकायत सुनने को तैयार हो कि सबसे बड़े दल को सरकार गठन के लिए क्यों बुलाया गया, लेकिन सभी को
पता है कि गोवा और मणिपुर के चुनावों के बाद उसका सवाल यह था कि सबसे बड़े दल को सरकार गठन के लिए क्यों
नहीं बुलाया गया? अच्छा हो कि कांग्रेस यह स्प-ुनवजयट करे कि वह तब सही सवाल पूछ रही थी या अब? अब कांग्रेस के सामने
कर्नाटक की तर्ज पर गोवा, मणिपुर,मेघालय और बिहार सरकार का घेरने का बेहतर मौका है। ऐसे में हार और त्रि-रु39यांकु
वाली स्थिति पैदा होने पर केवल मीडिया पर दो-ुनवजयाारोपण करने से पूर्व राजनैतिक दलों और जनता को आत्ममंथन तय
कर यह सुनि-िरु39यचत करना होगा कि वे एकतरफा चले ताकि परिणाम जो भी आए वह बहुमत में हो और इस तरह का पेंच न
फॅसें।
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रामायण सर्किट भारत -ंउचय नेपाल दोनों के लिए अहम
डॉ गौरी-रु39यांकर राजहंस

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अभी अभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल की ऐतिहासिक यात्रा समाप्त की है। उनकी इस यात्रा को चिरकाल तक
दोनों दे-रु39याों के लोग याद रखेंगे। उन्होंने अपनी यात्रा सीताजी की जन्मस्थली जनकपुर धाम से -रु39याुरू की और
अपने विभिन्न संबोधनों में यह बताया कि भारत और नेपाल के बीच प्रगा-सजय़ मित्रता त्रेता युग से चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि भारत की नई विदे-रु39या नीति में पड़ोसी दे-रु39याों को प्राथमिकता दी गई और उनमें नेपाल का
स्थान सर्वोपरि है। जनकपुर धाम में उनका स्वागत नेपाल के प्रधानमंत्री के पी ओली ने किया जहां प्रधानमंत्री
मोदी ने कहा कि नेपाल के बिना भारत के धाम और राम दोनों अधूरे हैं। जनकपुर में सीता मंदिर में
प्रधानमंत्री मोदी को मिथिला की चिरपरिचित पाग (टोपी) पहनाई गई। जो लोग मैथिल संस्कृति से परिचित हैं
उन्हें यह पता है कि जिस भी व्यक्ति को गुलाबी रंग की पाग पहनाई जाती है उसे समाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त होता
है। त्रेता युग से ही जनकपुर मिथिला की राजधानी रही है जहां सीताजी का जन्म हुआ था। परन्तु मिथिला का एक बहुत
बड़ा भूभाग भारत में बिहार में भी है। बिहार में दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, सीताम-सजय़ी, मधेपुरा
आदि जिलों में सदियों से मैथिल संस्कृति विद्यमान है। भारत में इस क्षेत्र को मिथिला या मिथिलांचल भी कहते
हैें। नेपाल में व-ुनवजर्याों से मैथिली भा-ुनवजयाा को द्वितीय राजभा-ुनवजयाा का दर्जा प्राप्त है। परन्तु भारत के कुछ संासदों
के अथक प्रयासों के कारण मैथिली को भारत में 8वीं सूची में स्थान दिया गया है जिसका अर्थ है कि अब मैथिली
भा-ुनवजयाा में भी सरकारी कारोबार हो सकता है। बिहार में मिथिला क्षेत्र में करोड़ों लोग रहे रहे हैं। घर के
अन्दर और बाहर वे मैथिली में ही अपना कारोबार करते हैं। उनकी बोलचाल की भा-ुनवजयाा भी मैथिली ही है और
व-ुनवजर्याों से बिहार में सिविल सर्विस की परीक्षा में मैथिली को प्रमुख स्थान मिला हुआ है। विभिन्न कारणों से,
कुछ तो बा-सजय़ की त्रासदी और कुछ तत्कालीन बिहार सरकार की कोपदृ-िुनवजयट से बिहार के मैथिली भा-ुनवजयाा भा-ुनवजयाी क्षेत्र के
40 से 50 लाख लोग पलायन कर रोजी रोटी की तला-रु39या में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब आदि राज्यों में आ गये। यहां
भी उन्होंने मैथिली भा-ुनवजयाा और मैथिली संस्कृति को जिन्दा रखा। हर रोज सुबह हजारेां मजदूर जब काम के लिये
निकलते हैं तो विद्यापति के गीत गाते हुए आगे निकल जाते हैं। यह दृ-रु39यय अत्यन्त ही मनोरम होता है और जिन लोगों
को मैथिली भा-ुनवजयाा और मैथिली संस्कृति का ज्ञान है उन्हें यह देखकर परम ह-ुनवजर्या होता है कि आज दिल्ली और
एनसीआर में भी एक छोटा मिथिला बसा हुआ है। बिहार में दू-िुनवजयात राजनेताओं ने अपने स्वार्थ के लिये जात-ंउचयपात
को तरजीह दे दी है। लेकिन यह परम आ-रु39यचर्य की बात है कि बिहार से बाहर निकल कर दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में जो
मिथिलावासी रह रहे हैं उनमें जात-ंउचयपात का कोई भेद नहीं दीखता है। किसी भी विवाह समारोह में आसपास के
लोग एकत्रत होते हैं। विद्यापति के रचित मंगल गीत गाते हैं और निर्विघ्न विवाह या उपनयन समरोह संपन्न हो जाता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि दिल्ली में रह रहे कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मिथिला से आए हुए लोगों
में यह भावना कूट कूटकर भरदी है कि -रु39याादी-ंउचयविवाह या उपनयन जैसे आयोजनों पर गा-सजय़ी कमाई को खर्च नहीं
किया जाए। बिहार में मिथिला में लोग -हजयूठे दिखावे के कारण इन आयोजनों में भारी खर्च कर डालते हैं और
पु-रु39यत दर पु-रु39यत उनका खर्च चलता ही रहता है। दिल्ली आकर मिथिलावासियों में जागृति आ गई है और वे साल में एक बार
दुर्गा पूजा के अवसर पर जब अपने गांव लौटते हैं तो लोगों को बताते हैं कि दिल्ली एनसीआर में वे कितने सुखी
संपन्न हैं और लोगों को प्रेरित करते हैं कि वे अपने रहन सहन का -सजयंग बदलें। बात जब प्रधानमंत्री मोदी की नेपाल
यात्रा की आती है तब उनका यह कहना -रु39यात प्रति-रु39यात सही प्रतीत होता है कि भारत और नेपाल की मित्रता आज की नहीं बल्कि
त्रेता युग है। राजा द-रु39यारथ और राजा जनक ने अयोध्या और जनकपुर को ही नहीं बल्कि नेपाल और भारत को भी एक
अटूट बंधन में बांध दिया था। राम चरित मानस की चैपाइयों का उदाहरण देकर उन्होंने कहा कि भारत और
नेपाल ने हर मु-िरु39यकल घड़ी में एक दूसरे का साथ दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सदियों से अयोध्या और
जनकपुर का नाता अटूट रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों दे-रु39या -रु39यरामायण सर्किट-रु39य बनाने की दि-रु39याा में काम करेंगे।
रामायण सर्किट भारत और नेपाल दोनों केे लिये अहम है और इससे पर्यटन को ब-सजय़ावा मिलेगा। भारत के प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने एक साथ जनकपुर से अयोध्या जाने वाली पहली बस को हरी -हजयंडी
दिखाकर रवाना किया। जनकपुर धाम की यात्रा करने के बाद उन्होंने आगन्तुक रजिस्टर में अत्यन्त ही भावनात्मक
संदे-रु39या लिखा और कहा कि जनकपुर धाम की यात्रा करने की उनकी बचपन से जो इच्छा थी वह आज पूरी हुई और यह एक
यादगार अनुभव रहेगा।

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नेपाल किसी परिभा-ुनवजयाा से नहीं बल्कि उस भा-ुनवजयाा से बंधे हैं जो बात वि-रु39यवास
की है, रोटी-ंउचयबेटी की है। उन्होंने कहा कि हमारी प्रकृति भी एक है, संस्कृति भी एक है और दृ-िुनवजयट भी समान
है। चाह और राह भी समान है। नेपाल के बिना भारत की आस्था भी अधूरी है। नेपाल के बिना हमारे धाम
अधूरे हैं और राम भी अधूरे हैं। उन्होंने कहा कि जनकपुर आकर ऐसा नहीं लगा कि वह किसी दूसरे दे-रु39या में
आए हैं। यहां सब अपने ही लोग हैं। नेपाल सदा से आध्यात्म और द-रु39र्यान का स्थल रहा है। अपनी नेपाल यात्रा में
प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के साथ सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के साथ साथ आर्थिक और व्यापारिक
संबंधों को भी मजबूत करने का दृ-सजय संकल्प किया। नेपाल के प्रधानमंत्री ओली के साथ मिलकर रिमोट के माध्यम से
उन्होंने 900 मेगावाट के -रु39यअरूण-ंउचय3 जलविद्युत संयंत्र-रु39य की आधार-िरु39याला रखी। इसके चालू होने से नेपाल में बिजली की
कमी बहुत हद तक दूर हो जाएगी और हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। भारत सदा से यह कहता रहा है कि यदि नेपाल
से निकलने वाली नदियों को उनके उदगम स्थान पर ही बांधा जाए तो इतनी अधिक बिजली का उत्पादन होगा जिसकी
कल्पना भी नहीं की जा सकती है और उस बिजली के कारण नेपाल और भारत दोनों का अभूतूपर्व आर्थिक विकास
होगा। इस सिलसिले में भारत ने हमे-रु39याा भूटान का उदाहरण दिया है। समय आ गया है जब इस दि-रु39याा में फिर से भारत
सरकार मजबूती से प्रयास करे। इस प्रयास के कारण दोनों दे-रु39याों के संबंध नि-िरु39यचत रूप से अत्यन्त ही मधुर हो जाएंगे। कुल
मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की नेपाल यात्रा हर दृ-िुनवजयटकोण से सफल रही और उन्होंने इस गलतफहमी को भी बहुत हद तक
दूर कर दिया कि नेपाल के कुछ राजनेता भारत के खिलाफ हैं। जिस गर्मजो-रु39याी से नेपाल के राजनेताओं ने और नेपाल
की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया वह चिरस्मरणीय रहेगा।
(लेखक पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत हैं)
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आज का रा-िरु39या फल
मे-ुनवजया:-ंउचय आर्थिक क्षेत्र में परिश्रम का लाभ प्राप्त होगा। महत्वाकांक्षाओं को फलित करने में असमर्थता संभव।
स्वास्य के प्रति सचेत रहें। सामान्य दिनर्चया के साथ बीत रहे जीवन में उत्साह का अभाव रहेगा।
बृ-ुनवजयाभ:-ंउचय कोई महत्वपूर्ण कार्य सार्थक होने का योग है। दायित्वों की समयानुकूल पूर्ति हेतु प्रयत्न-रु39याील
होंगे। महत्वपूर्ण क्षेत्र में आलस्य का त्याग करें। जीविका क्षेत्र में लाभ के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। मिथुन:-ंउचय
आर्थिक प्रगति के आसार बनेंगे। महत्वपूर्ण दायित्व अपनी पूर्ति हेतु मन पर दबाव बनाएंगे। कार्यक्षेत्र में अपनी
वाकपटुता का भरपूर लाभ प्राप्त करेंगे। नौकरी का वातावरण सुखद होगा।
कर्क:-ंउचय भौतिक आकांक्षाएं मन को उद्वेलित करेंगी। किसी पुराने मित्र से मिलने की इच्छा प्रबल होगी। निकट
संबंधों में कुछ अप्रिय बातें दूरी पैदा करेंगी। मूल्यवान समय को व्यर्थ में जाया न होने दें। सिंह:-ंउचय किसी
इच्छित कार्य की पूर्ति से प्रसन्नता संभव। पूरा दिन अध्यात्मिक व पारंपरिक कायरें में व्यतीत होगा। भवि-ुनवजयय के प्रति
नकारात्मक विचार उत्साह में कमी लाएंगे। नयी आकांक्षाएं मन को उद्वेलित करेंगी।
कन्या:-ंउचय कायरे के अत्याधिक बो-हजय से मन परे-रु39याान होगा। अपनी समय की महत्ता को पहचाने और अपनी गुणवत्ता व
क्षमता का भरपूर लाभ उठाने का प्रयास करें। जीवनसाथी का भावनात्मक सहयोग मिलेगा।
तुला:-ंउचय कल्पनाओं से परे यथार्थता में जीने का प्रयत्न करें। अच्छे आचार-ंउचयविचार से संबंधों में लोकप्रिय
होंगे। अपने स्वास्य का पूरा ख्याल रखें। पुरानी बातों को भूल कर मन को सकारात्मक दि-रु39याा दें। वृ-िरु39यचकः-ंउचय
मधुरवाणी से सगे-ंउचयसंबंधों में प्रगा-सजय़ता ब-सजय़ाएंगे। उच्च महत्वाकांक्षा ऊंची प्रगति के लिए प्रेरित करेगी। किसी नई
योजना पर विचारमग्न होंगे। कार्यक्षेत्र में लाभकारी स्थिति से प्रसन्न होंगे।

धनु:-ंउचय सब कुछ सामान्य होते हुए भी मन अरुचि का -िरु39याकार होगा। पुराने संबंधों में प्रगा-सजय़ता ब-सजय़ेगी।
राजनीतिज्ञों के लिए लाभप्रद स्थितियों के आसार हैं। जीवन साथी का भावनात्मक सहयोग उत्साहित करेगा।
मकर:-ंउचय ईरीय आस्था में वृद्धि होगी। सगे-ंउचयसंबंधों में नैतिक कर्त्तव्यों से विमुख न हों। भावुकता
व्यावहारिक जगत के अनुकूल चलने में बाधक होगी। नये कायरें में संलग्नता से लाभ संभव।
कुंभ:-ंउचय आलस्य महत्वपूर्ण क्षेत्र में अवरोधक होगा। नये कायरें में ब्यस्तता ब-सजय़ेगी। किसी संबंधी अथवा स्वयं
की अस्वस्थता से परे-रु39याान हो सकते हैं। सत्ता व राजकीय क्षेत्र के लोगों की क्रिया-रु39याीलता ब-सजय़ेगी।
मीन:-ंउचय निरा-रु39याावादी विचारों का त्याग करें। परिजनों की छोटी-ंउचयछोटी बातों का बुरा न माने। जीवनसाथी से
वैचारिक मतभेद संभव। माता के स्वास्य के प्रति सचेत रहें।

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