Wednesday , December 19 2018
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राहुल तैयार लेकिन सहयोगी दलों को अभी नतीजों का इंतजार

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में बड़ी पार्टी बनकर आने  मौका मिलने पर पीएमबनने की बात कहकर ये साफ कर दिया है कि वे 2019 में मोदी के मुकाबले के लिए तैयार हैं. बीते चार वर्षों में कई राज्यों में सत्ता गंवाने के बावजूद कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष इतना आत्मविश्वास जुटाने में सफल दिख रहे हैं कि वे मोदी के सामने खुद को विकल्प के तौर पर पेश करें.
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कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष का पद संभालने के बाद पार्टी के भीतर भी अब राहुल के नेतृत्व को लेकर उठने वाली आवाजें बंद हो चुकी हैं. पार्टी की पहचान राहुल की कांग्रेस पार्टी के तौर पर होने लगी है.

ऐसे में पूरा दारोमदार उन बीजेपी विरोधी राजनीतिक दलों के नेताओं पर है जिन्हें बीजेपी के विरूद्धएक वैकल्पिक राजनीतिक गुलदस्ते की शक्ल देने की प्रयास कांग्रेस पार्टी पिछले दो वर्षों से कर रही है.

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लिहाजा राहुल के सुर के साथ सहयोगियों के सुर तभी मिलेंगे जब कांग्रेस पार्टी पूर्ण बहुमत से आती है. सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी राहुल के पीएम बनने पर सहयोगी तैयार होंगे इसकी बानगी एनसीपी की रिएक्शन से साफ झलकती है. एनसीपी चुनाव में प्रदर्शन देख लेना चाहती है.

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2019 में पीएम कौन होगा यह लाख टके का सवाल

एनसीपी सांसद माजिद मेनन राहुल को शुभकामनाएं देते हैं साथ ही कहते हैं कि 2019 में पीएमकौन होगा यह लाख टके का सवाल है. कांग्रेस पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बन भी जाएगी तब भी यह महत्वपूर्ण नहीं है कि सभी दल उन्हें लीडर मानने के लिए सहमत हों.

मेनन का कहना है कि उनका मुख्य मकसद बीजेपी को सत्ता से बाहर करना है. एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक कहते हैं कि अगर राष्ट्र के लोग कांग्रेस पार्टी में अपना भरोसा जताते  राष्ट्र में शासन चलाने के लिए चुनते हैं तो राहुल गांधी पीएम बन सकते हैं.

दरअसल एनसीपी नेता शरद पवार हाल में विपक्षी गठजोड़ की पॉलिटिक्स में खुद की दावेदारी छोड़ चुके हैं. साथ ही बीजेपी विरोधी ताकतों को एक मंच पर लाने की प्रक्रिया में उन्होंने ही कांग्रेस पार्टी को अगुवाई करने को बोला था. बावजूद एनसीपी का कहना है कि सबकुछ चुनाव में प्रदर्शन पर निर्भर है.

भारत में पीएम बनने के लिए उत्तर प्रदेश की किरदार हमेशा से अहम रही है. राहुल के सबसे बड़ी पार्टी बनने की बात पर राज्यों खासकर उत्तर प्रदेश में जहां कांग्रेस पार्टी निर्बल होती गई रहै वहां बेहतर प्रदर्शन के लिए दो बड़े क्षेत्रीय दलों सपा-बसपा के सहारे के बिना संभव नहीं है.

ऐसे समय जब दोनों ही दलों ने कांग्रेस पार्टी को अलग रखकर आपस में समझौता कर सीटों का बंटवारा भी प्रारम्भ कर दिया राहुल का पीएम बनने का बयान शायद दोनों दलों के नेता अखिलेश यादव  मायावती को रास आए. ऐसे में सहयोगी पार्टियों का राहुल गांधी को इस पद के लिए समर्थन पूरी तरह से अंकगणित पर निर्भर है.

बिहार से राजद नेता तेजस्वी यादव का बयान कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष का उत्साहवर्धन कर सकता है.तेजस्वी का कहना है कि हम पहले से महागठबंधन में हैं. अगर वे पीएम बनते हैं खुशी की बात है बनना ही चाहिए.

वामपंथी दलों में सीपीएम ने पहले कही भाजपा-कांग्रेस से बराबर की दूरी बनाने की बात कही है.जबकि सीपीई नेता डी राजा का कहना है कि अभी समय सभी धर्मनिरपेक्ष दलों के एक होने का है.बीजेपी को हराने के लिए हमें एकजुट होने की आवश्यकता है. कांग्रेस की ओर से राहुल के बयान पर प्रवक्ता कपिल सिब्बल ने बोला कि वे पीएम क्यों नहीं बनेंगे.

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