Thursday , November 15 2018
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ताजमहल का संरक्षण माकूल नहीं , सुप्रीम कोर्ट चिन्तित

डा. राधेश्याम द्विवेदी
दुनिया के अजूबों में से एक ताजमहल पर प्रदूषण के प्रभाव को लेकर अक्सर चिंता व्यक्त की जाती है। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी विश्व धरोहर के बदलते रंग पर मंगलवार को चिंता जताते हुए केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सफेद रंग का यह स्मारक पहले पीला हो रहा था लेकिन अब यह भूरा और हरा होने लगा है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा, ‘हमें नहीं पता कि आपके पास इसकी विशेषज्ञता है या शायद नहीं है। यदि आपके पास विशेषज्ञता हो तो भी आप इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं। या शायद आप परवाह नहीं करते।’ न्यायालय ने पर्यावरणविद अधिवक्ता महेश चंद्र मेहता द्वारा पेश तस्वीरों का अवलोकन किया और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से सवाल किया कि ताजमहल का रंग क्यों बदल रहा है। पीठ ने कहा, ‘पहले यह पीला था और अब यह भूरा और हरा हो रहा है।’ नाडकर्णी ने पीठ से कहा कि ताजमहल का प्रबंधन पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को करना होता है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केंद्र को सुझाव दिया कि भारतीय और विदशी विशेषज्ञों की मदद लेकर पहले इसके नुकसान का आकलन किया जाए और फिर इस ऐतिहासिक स्मारक का मूल रूप बहाल करने के लिए कदम उठाए जाएं।
न्यायालय ने पर्यावरणविद अधिवक्ता महेश चंद्र मेहता द्वारा पेश तस्वीरों का अवलोकन किया और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से सवाल किया कि ताजमहल का रंग क्यों बदल रहा है। पीठ ने कहा, ‘पहले यह पीला था और अब यह भूरा और हरा हो रहा है।’ नाडकर्णी ने पीठ से कहा कि ताजमहल का प्रबंधन पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को करना होता है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केंद्र को सुझाव दिया कि भारतीय और विदशी विशेषज्ञों की मदद लेकर पहले इसके नुकसान का आकलन किया जाए और फिर इस ऐतिहासिक स्मारक का मूल रूप बहाल करने के लिए कदम उठाए जाएं।

लगातार कमजोर हो रही नींव:-दुनिया में मोहब्बत की निशानी का अगर नाम लिया जाता है तो वो है ताजमहल। लेकिन दुनिया के अजूबों में से एक ताज का वजूद खतरे में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ताजमहल की नींव लगातार कमजोर हो रही है और इसकी वजह है यमुना नदी के जलस्तर में लगातार कमी। नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की माने तो आने वाले कुछ सालों में शायद ताज अपनी जगह पर न दिखे। क्योंकि ताजमहल की नींव लगातार कमजोर हो रही है। जैसे-जैसे यमुना का जलस्तर घट रहा है वैसे-वैसे ताज पर खतरा और बढ़ रहा है। इतिहासकार और पुरातत्व के जानकारों के मुताबिक मुगल काल में बनी ताज की नींव में वही तकनीक इस्तेमाल की गई है जो उस दौर की दूसरी ऐतिहासिक इमारतों को बनाने में की गई थी। ऐसा माना जाता है कि ताजमहल के चारों तरफ एक हजार से भी ज्यादा कुएं खोदे गए हैं। इन कुओं की गहराई करीब 50 फीट है। इन कुओं को ईंट, पत्थर, चूना, गारे और लकड़ी से भर दिया गया है। कुओं में आबनूस और महोगनी की लकडि़यों के लट्ठे डाले गए। ये कुएं ताजमहल की नींव को मजबूत बनाते हैं। इन कुओं को इस तरह बनाया गया कि यमुना नदी के पानी से नमी मिलती रहे। इसकी वजह ये है कि नींव में मौजूद आबनूस और महोगनी की लकड़ी को जितनी नमी मिलेगी वो उतनी ही फौलादी और मजबूत रहेंगी। इससे ताजमहल की नींव भी मजबूत बनी रहेगी। लेकिन खतरे की बात ये है कि अब धीरे-धीरे यमुना का पानी कम होता जा रहा है और ताजमहल की नींव में बने कुओं में मौजूद लकड़ियों को मिल रही नमी में कमी आ गई है। ताजमहल का पूरा वजन इन्हीं नीवों पर टिका है। अगर जल्द ही सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले सालों में ताजमहल गिर भी सकता है। ताज के किनारे बहने वाली यमुना नदी में हो रहा प्रदूषण और जंगलों की कटाई इसके गिरने का मुख्य कारण हो सकता है। नदी के प्रदूषित पानी से ताज की नींव कमज़ोर हो रही है। पिछले साल इसके गुंबद और चार मीनारों में दरार देखी गई थी। जानकारों का कहना है कि 358 साल पुराने ताजमहल की सड़ती बुनियाद को दुरुस्त नहीं किया गया तो लाखों सैलानियों को अपनी ओर खींचने वाली ये इमारत गिर भी सकता है।
नदी की सफाई केवल कागजों में:- यमुना नदी के जलस्तर को वापस लाने और नदी की सफाई के नाम पर अब तक करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन नतीजा सिफर रहा है। हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ रहे हैं। ताज के आसपास बढ़ते प्रदूषण ने पहले ही देश की शान को खतरे में डाल रखा है। अब नींव कमजोर होने की रिपोर्ट से साफ है कि दुनिया के इस अजूबे की हिफाजत के लिए सरकार कितनी संजीदा है। सरकार अब भी न जागी तो कहीं ऐसा न हो कि दुनिया का ये नायाब और अनमोल अजूबा इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाए। ताजमहल ही नहीं, ताजनगरी आगरा भी खतरे में है। अगले कुछ सालों में आगरा रेगिस्तान में बदल सकता है। जानकारों की मानें तो यहां ग्राउंड वॉटर लेवल इतना नीचे चला गया है कि नदी, नाले और तालाब तेजी से सूखने लगे हैं। अगले कुछ सालों में अगर हालात नहीं सुधरे तो तबाह हो जाएगी ताज नगरी।
सुप्रीम कोर्ट की चिंता :- ताजमहल के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर चिंता जाहिर की है. सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल के आसपास बढ़ रही गतिविधियों पर भी सवाल उठाया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर केन्द्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाल रही योगी सरकार को फटकार भी लगाई. सुप्रीम कोर्ट ताज को पर्यावरण से हो रहे नुकसान से बचाने के उपायों का विजन डॉक्यूमेंट दायर न करने पर नाराज थी. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की से ताजमहल के आसपास रोपे गए पौधों की संख्या के साथ ही विजन डॉक्यूमेंट जमा करने के लिए कहा है. इसके अलावा इलाके में चमड़े और कांच की बढ़ती फैक्ट्रियों पर भी जानकारी मांगी है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि ताजमहल को लेकर कोर्ट चिंतित है. सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को यह भी बताने का निर्देश दिया कि ताजमहल के आसपास और ताज ट्रापेजियम जोन (टीटीजेड) के भीतर अनेक गतिविधियों की अचानक बाढ़ सी क्यों आ गई और चमड़ा उद्योग और होटल वहां क्यों आ रहे हैं? टीटीजेड 10,400 वर्गकिमी का क्षेत्र है जो उत्तर प्रदेश के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और इटावा जिले और राजस्थान के भरतपुर तक फैला है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि, ‘‘आप चार हफ्ते के भीतर दृष्टिपत्र पेश करें।’’ प्रदेश की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पीठ ने पूछा कि, ‘‘टीटीजेड में गतिविधियां अचानक बढ़ क्यों गई। क्या इसका कोई विशेष कारण है? चमड़ा उद्योग और होटल वहां क्यों आ रहे हैं?’’ मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस मु्द्दे पर वह निर्देश प्राप्त करके कोर्ट को सूचित करेंगे। इस बीच, राज्य सरकार ने एक अन्य आवेदन देकर आगरा शहर में जल आपूर्ति की खातिर पाइपलाइन बिछाने के लिए 234 पेड़ों को काटने की अनुमति कोर्ट से मांगी। हालांकि, पीठ ने राज्य को यह बताने का निर्देश दिया कि टीटीजेड में कितने पौधों का रोपण किया जा चुका है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ताजमहल को सैकड़ों वर्ष के लिए संरक्षित करने की खातिर ‘अस्थायी’ उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। कोर्ट पर्यावरणविद् और अधिवक्ता महेश चंद्र मेहता द्वारा ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए 1985 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। कोर्ट इस मामले में अब चार सप्ताह बाद सुनवाई करेगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ताजमहल को सैकड़ों वर्ष के लिए संरक्षित करने की खातिर ‘अस्थायी’ उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। कोर्ट पर्यावरणविद् और अधिवक्ता महेश चंद्र मेहता द्वारा ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए 1985 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
किसी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं :- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक सरकार उनके समक्ष विजन डॉक्यूमेंट दायर नहीं करती, तब तक ताजमहल के आस-पास किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. चाहे आगरा वाटर सप्लाई की पाइपलाइन का ही मसला क्यों न हो. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर पाइपलाइन बिछाने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में पेड़ काटे जाते हैं और उनकी जगह पर नए पौधे लगाने के लिए जगह ही नहीं है. इसके लिए क्या कहना चाहेंगे आप?
ताज में खामियां :- शाहजहां एक ऐसी इमारत बनाना चाहते थे जिसमें कोई गलती न हो. लेकिन मुमताज महल की मजार के ठीक ऊपर छत पर एक छेद है. कहा जाता है कि एक शाहजहां द्वारा मजदूरों के हाथ काटने की बात सुन एक कारीगर ने जानबूझकर यह छेद किया ताकि ताज दोषहीन न रह सके. इसी तरह ताज की दीवारों पर बने 11 नक्काशीदार पिल्लरों में से एक का आकार गोल है जबकि अन्य में तिकोनी कटिंग का डिज़ाइन है. प्यार की निशानी के रूप में प्रसिद्ध ताजमहल का निर्माण मुगल शासक शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में करवाया था. ताजमहल भारत की शान है जिसे देखने दुनियाभर से सैलानी आगरा पहुंचते हैं. ताज का इतिहास, ताज की कहानी, यह कितने सालों में बना यह तो हम सभी जानते हैं लेकिन इससे कई रोचक बातें भी जुड़ी हैं जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं.
9 मई को होगी अगली सुनवाई
शीर्ष अदालत ने इस ममले में अब नौ मई को सुनवाई करने का निश्चय किया है। पर्यावरणविद मेहता ने मथुरा तेल शोधक संयंत्र से निकलने वाले धुएं से हो ने वाले वायु प्रदूषण से ताजमहल को हो रहे नुकसान और इसके संरक्षण के लिए जनहित याचिका दायर कर रखी है। शीर्ष अदालत लगातार ताजमहल और इसके आसपास के इलाकों की गतिविधियों की निगरानी कर रही है।

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