Thursday , September 20 2018
Loading...

समुद्र में समा जाएंगे कई शहर

अंटार्कटिका में एक विशालकाय ग्‍लेशियर के सिकुड़ने की समाचार से घबराए विज्ञानियों ने उसके अध्‍ययन के लिए एक परियोजना की आरंभ की है इसकी लागत ढाई करोड़ डॉलर के करीब आएगी इसमें ब्रिटेन  अमेरिका के वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं, जो अंटार्कटिका स्थित थ्‍वेट्स ग्‍लेशियर के सिकुड़ने का कारण जानेंगे इसके पिघलने से समुद्र का जलस्‍तर भी तेजी से बढ़ रहा है़, जिससे शंघाई से लेकर सैन फांसिस्‍को तक डूब जाएंगे इस बीच यह भी समाचार है कि अंटार्कटिका के पूर्वी हिस्से में स्थित दक्षिण गंगोत्री ग्लेशियर 10 वर्ष में 14 मीटर सिकुड़ गया है इसका पता हालिया रिपोर्ट में चला है यही नहीं दक्षिणी ध्रुव के एरिया का हर वर्ष 10 मीटर वेडल समुद्र की तरफ उत्तर में खिसकने की भी जानकारी हुई है

Image result for समुद्र में समा जाएंगे कई शहर

पांच वर्ष तक चलेगा शोध
ब्रिटेन के विज्ञान मंत्री सैम गिमाह के मुताबिक इस शोध में पांच वर्ष का वक्‍त लगेगा इसमें करीब 100 वैज्ञानिकों की मदद ली जाएगी यह 1940 के बाद का सबसे बड़ा प्रोजेक्‍ट होगा उन्‍होंने बोलाकि जलवायु बदलाव से अंटार्कटिका का यह ग्‍लेशियर तेजी से पिघल रहा है, जिससे समुद्रीय तटीय इलाकों के डूबने का खतरा बढ़ गया है  हम अध्‍ययन में पता लगाएंगे कि ग्‍लेशियर पिघलने का सही कारण क्‍या है

Loading...

दो ग्‍लेशियर तेजी से पिघल रहे
द हिन्‍दू में छपी समाचार में ब्रिटिश मंत्री सैम के हवाले से बोला गया है कि थ्‍वेट्स  उसके पास स्थित पाइन आइलैंड ग्‍लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं इससे समुद्र का जलस्‍तर तेजी से बढ़ रहा है अनुमान के मुताबिक समुद्री जलस्‍तर में तीन फुट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है इससे शंघाई से लेकर सैन फ्रांसिस्‍को  अन्‍य निचले इलाकों को खतरा हो रहा है

loading...

1985 में नाम दिया था दक्षिण गंगोत्री
साल 1985 में पूर्वी अंटार्कटिका के एक हिमनद को दक्षिणी गंगोत्री का नाम दिया गया था तब से इसकी मॉनीटरिंग चल रही है जलवायु बदलाव के असर से यह ग्लेशियर एक दशक में 14 मीटर सिकुड़ा है यहां माइनस 53 डिग्री सेल्सियस तापमान रहता है दक्षिणी ध्रुव में जलवायु बदलाव का असर कम है यहां बर्फ की मोटाई चार किमी है, जिससे यहां ‘मेल्टिंग’ कम होती है

Loading...
loading...