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ऐतिहासिक वार्ता ने शांति के लिए नए युग का मार्ग प्रशस्त किया

 प्योंगयोंग की सरकारी मीडिया ने शनिवार (28 अप्रैल) को बोला कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन  दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जेई-इन के बीच हुई अंतर-कोरियाई ‘ऐतिहासिक’ शिखर बातचीत ने एक नए युग के लिए मार्ग प्रशस्त किया है उत्तर कोरिया की आधिकारिक खबर एजेंसी ‘केसीएनए’ ने बोला ‘‘ऐतिहासिक बातचीत ने राष्ट्रीय सुलह, एकता, शांति एवं समृद्धि के एक नए युग की आरंभ की है ’’

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दस्तावेजों में दोनों नेताओं ने इस बात की पुष्टि की कि ‘‘परमाणु मुक्त कोरियाई प्रायद्वीप का साझा लक्ष्य पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के जरिए ही पूरा हो सकता है ’’ प्योंगयांग कई सालों से इस बात पर जोर देता रहा है कि वह परमाणु हथियारों का अपना ‘खजाना’ नहीं छोड़ेगा उसका कहना है कि उसे अमेरिकी आक्रमण से निपटने के लिए इसकी जरूरत है

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दक्षिण कोरिया के अनुसार सुरक्षा की गारंटी देने पर वह इस पर वार्ता को तैयार है हालांकि किम ने शुक्रवार (27 अप्रैल) को हुई शिखर बातचीत में सार्वजनिक तौर पर इसका कोई जिक्र नहीं कियाकोरिया युद्ध के बाद कोरियाई राष्ट्रों को बांटने वाली सैन्य सीमा पार कर दक्षिण जाने वाले किम पहले नेता हैं शिखर बातचीत के लिए पनमुंजम की युद्धविराम संधि के गुलाम आने वाले गांव के दक्षिणी किनारे पर स्थित ‘पीस हाउस बिल्डिंग’ में दाखिल होने से पहले किम के आमंत्रण पर दोनों नेता एक साथ उत्तर कोरिया में दाखिल हुए थे

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कोरियाई राष्ट्रों के सुधरते रिश्तों का ईरान ने किया स्वागत
वहीं दूसरी ओर ईरान ने उत्तर कोरिया  दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में उठ रहे कदमों का शनिवार (28 अप्रैल) को स्वागत किया, लेकिन चेतावनी दी कि अमेरिका इस विषय मेंकिसी भी किरदार के लिए पात्र नहीं है क्योंकि उसने अपने वचनों का सम्मान नहीं किया है ईरान के विदेश मंत्रालय ने बोला कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन  दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के बीच भेंटवार्ता क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्थायित्व की दिशा में जिम्मेदार एवं प्रभावी कदम है

वैसे मंत्रालय के प्रवक्ता बहराम घासेमी ने बोला कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति कायम करने की ऐतिहासिक नई पृष्ठभूमि दोनों मुख्य पक्ष ही बिना किसी अन्य राष्ट्र के दखल के तैयार करें उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘खासकर परमाणु करार के विषय में ईरान का पिछले 40 वर्ष का अनुभव यह है कि अमेरिकी गवर्नमेंट मर्यादापूर्ण  भरोसेमंद नहीं है  वह अंतर्राष्ट्रीय वादों का सम्मान नहीं करती है ’’

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