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मंत्रोच्‍चार के बीच खुले बाबा केदारनाथ के कपाट

भक्तों के लिए रविवार (29 अप्रैल) प्रातः काल 6:15 से ईश्वर केदारनाथ के कपाट मंत्रोच्चार के साथ खुल गए इस मौके पर गवर्नर डॉ के के पॉल, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल हरिद्वार से सांसद डा निशंक मौजूद रहे इस बार मंदिर परिसर कुछ अलग नजर आएगा दरअसल, राज्य गवर्नमेंट द्वारा केदारनाथ धाम के आसपास निर्माण काम कराया गया है बता दें कि मंदिर के प्रवेश द्वार को विशेष रूप से सुसज्जित कराया गया है, जिसकी धाम से दूरी 273 मीटर की है हजारों भक्तों की मौजूदगी में मंदिर के कपाट प्रातः काल 6.15 बजे खोले गए तड़के चार बजे से कपाट खुलने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो गई थी जलाभिषेक, रुद्राभिषेक समेत सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद प्रातः काल सवा छह बजे 12वें ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए

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केदारनाथ के जुड़े तथ्य

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* मान्यता है कि पांडवों ने की थी केदारनाथ मंदिर की स्थापना
* 8वीं सदी में आदिशंकराचार्य ने मंदिर का नवनिर्माण  जीर्णोद्धार किया
* केदारनाथ के कपाट अक्ष्य तृतीय से लेकर भाई दूज तक श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं
* केदारनाथ उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है यह जगह समुद्रतल से 3584 मीटर की ऊँचाई पर हिमालय पर्वत के गढ़वाल एरिया में स्थित हैसमुद्रतल से 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित होने के कारण चारों धामों में से यहाँ पहुँचना सबसे मुश्किल है
* केदारनाथ को हिन्दुओं के पवित्रतम स्थानों यानी चार धामों में से एक माना जाता है  धार्मिक ग्रंथों में उल्लिखित बारह ज्योतिर्लिंगों में से सबसे ऊँचा ज्योतिर्लिंग यहीं पर स्थित है
* चार धाम यात्रा उत्तराखंड राज्य में स्थित गंगोत्री, यमनोत्री, केदारनाथ  बद्रीनाथ की यात्रा को कहते हैं
* 30 अप्रैल मतलब को बद्रीनाथ के कपाट भी खुलने हैं  केदारनाथ के विषय में मान्यता है कि जो आदमी केदारनाथ के दर्शन किये बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है, उसकी यात्रा निष्फल जाती है
* ऐसा माना जाता है कि जब ईश्वर शंकर बैल के रूप में अंतर्धान हुए, तो उनके धड़ से ऊपर का भागकाठमाण्डू में प्रकट हुआ अब वहां पशुपतिनाथ का मंदिर है शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मद्महेश्वर में  जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए इसलिए इन चार स्थानों सहित केदारनाथ को पंचकेदार बोला जाता है यहां शिवजी के भव्य मंदिर बने हुए हैं

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दर्शन का समय

* केदारनाथ मन्दिर दर्शनार्थियों के लिए प्रात: 6:00 बजे खुलता है
* दोपहर तीन से पाँच बजे तक विशेष पूजा होती है  उसके बाद विश्राम के लिए मन्दिर बन्द कर दिया जाता है
* शाम 5 बजे जनता के दर्शन के लिए मन्दिर खोला जाता है
* पाँच मुख वाली ईश्वर शिव की प्रतिमा का विधिवत श्रृंगार करके 7:30 बजे से 8:30 बजे तक नियमित आरती होती है, रात्रि 8:30 बजे केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग का मन्दिर बन्द कर दिया जाता है
* कपाट बंद होने के बाद केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को ‘उखीमठ’ में लाया जाता हैं इसी प्रतिमा की पूजा यहाँ भी रावल करते हैं

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