Monday , November 19 2018
Loading...
Breaking News

93 हैरिटेज इमारतों को व्यक्तिगत हाथों में देगी केंद्र सरकार

दिल्ली के लाल किले को पांच वर्ष के लिए डालमिया ग्रुप को ठेके पर देने के बाद केंद्र गवर्नमेंट अब मप्र सहित देशभर की कई ऐतिहासिक महत्व की इमारतों को भी व्यक्तिगत हाथों में दे रही है. इसमें मप्र में स्थित विश्व धरोहर भीमबैठका, ग्वालियर का किला समेत 7 ऐतिहासिक महत्व की इमारतें शामिल हैं. बताया जा रहा है कि व्यक्तिगत कंपनियां सिर्फ पर्यटन गतिविधियां ही संचालित कर सकेंगी. वे इन धरोहरों से छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगी.

Image result for लाल किला

दरअसल, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने ‘एडॉप्ट अ हैरिटेज’ नाम से एक योजना प्रारम्भ की है. इसमें देशभर के 93 हैरिटेज मोन्यूमेंट व्यक्तिगत हाथों में दिए जा रहे हैं. इसकी सूची हिंदुस्तान गवर्नमेंट की एडॉप्ट अ हैरिटेज वेबसाइट पर दी गई है. केंद्र गवर्नमेंट के मुताबिक इन पर्यटन स्थलों को पर्यटकों के लिए  सुविधाजनक बनाने के लिए यह योजना प्रारम्भ की गई है. केंद्र गवर्नमेंट ने इनके लिए आवेदन मंगाए हैं.

Loading...

मध्य प्रदेश की ये इमारतें दी जाएंगी व्यक्तिगत हाथों में

loading...

भीम बैठका: आदि मानव द्वारा बनाए गए शैलचित्रों के लिए प्रसिद्ध है. यूनेस्को ने व‌र्ल्ड हैरिटेज साइट घोषिषत किया है. कई कलाकृतियां 30 हजार वर्ष पुरानी हैं.

ग्वालियर का किला: इस किले का निर्माण सन् 727 ईस्वी में सूर्यसेन नामक एक लोकल सरदार ने किया. लाल बलुए के पत्थर से निर्मित यह किला राष्ट्र के सबसे बड़े किले में से एक माना जाता है.

मांडू के शाही किले: छठवीं शताब्दी में स्थापित. रानी रूपमती  बाज बहादुर के प्रेम के साक्षी मांडू शहर के कई किले व्यक्तिगत हाथों में जाएंगे. जहाज महल, हिंडोला महल, नीलकंठ महल इसमें शामिल है.

दतिया महल: इसका निर्माण राजा बीर सिंह देव ने मुगल शासक जहांगीर के स्वागत के लिए करवाया था. इसमें 440 कमरे हैं. इसे बनवाने में करीब 9 वर्ष लगे. भारत-इस्लामिक वास्तुकला का उदाहरण.

रानी रूपमती पवैलियन: मांडू में स्थित रानी रूपमति पवैलियन सेना के अवलोकन के लिए बनाया गया था. बोला जाता है कि यहां से रानी रूपमती नर्मदा नदी के दर्शन करती थीं.

होशंगशाह का मकबरा: मांडू में स्थित होशंगशाह का मकबरा संगमरमर से बना हिंदुस्तान का पहला मकबरा माना जाता है. होशंगशाह का मालवा एरिया का पहला मुस्लिम शासक था.

शाही किला: बुरहानपुर स्थित शाहजहां  मुमताज के प्रेम कहानी का गवाह है शाही किला. शाहजहां यहां पांच वर्ष रहे. मुमताज की मौत यहीं हुई थी. फारूखी काल का किला है.

एक्सपर्ट व्यू- व्यक्तिगत हाथों में देना सही नहीं

पुरातत्वविद् के नरायण व्यास का कहना है किकेंद्र गवर्नमेंट के पास हैरिटेज साइट को संरक्षित करने  पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बहुत बड़ा अमला है. इन ऐतिहासिक महत्व की इमारतों को व्यक्तिगत हाथों में नहीं दिया जाना चाहिए. गवर्नमेंट के पास ज्यादा बेहतर लोग हैं.

Loading...
loading...