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अगर अमेरिका 2015 के परमाणु समझौते से अलग होता है

ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा ऑफिसर ने मंगलवार (24 अप्रैल) को बोला कि अमेरिका अगर 2015 के परमाणु समझौते से अलग होने का निर्णय लेता है तो ऐसी स्थिति में उनका राष्ट्र भी रिएक्शन स्वरूप परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) तोड़ने के कदम पर विचार कर सकता है ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमखानी ने कहा, “एनपीटी के मुताबिक, इस समझौते में शामिल राष्ट्रों को अगर यह लगता है कि यह संधि उनके हित में नहीं है तो वे इससे अलग हो सकते हैं  ईरान के लिए भी यह विकल्प खुला है ”

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शमखानी ने यह टिप्पणी एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस स्थित सोचि के लिए रवाना होने से पहले की उन्होंने बोला कि ईरान को संयुक्त व्यापक काम योजना (जेसीपीओए) के नाम से प्रसिद्ध जनवरी 2016 से प्रभावी परमाणु समझौते से कोई फायदा नहीं हो रहा

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उन्होंने कहा, “दूसरा पक्ष (अमेरिका) यह समझौता लागू होने के पहले दिन से ही इसमें बाधाएं उत्पन्न कर रहा है ” उन्होंने साथ ही परमाणु गतिविधियां फिर प्रारम्भ करने की ईरान की क्षमता को भी उजागर करते हुए बोला कि अगर परमाणु समझौते को तोड़ा जाता है, तो उनका राष्ट्रप्रतिक्रियास्वरूप ऐसे कदम उठाएगा जो सबको हैरानी में डाल देंगे

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ट्रंप, मैक्रों ने ईरान के साथ नये परमाणु समझौते का आह्वान किया
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने 24 अप्रैल को ईरान के साथ एक नए परमाणु समझौते का आह्वान किया अमेरिकी राष्ट्रपति ने तीन वर्ष पुराने समझौते को ‘‘बेतुका’’ बताते हुए उसकी निंदा की वहीं मैक्रों ने ट्रंप के साथ वॉशिंगटन में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं कह सकता हूं कि इसे लेकर हम दोनों के बीच खुलकर चर्चा हुईइसलिए हम अब से ईरान के साथ एक नये समझौते की दिशा में कार्य करना चाहते हैं ’’

ट्रंप के यूरोपीय सहयोगियों ने बार-बार अनुरोध किया था कि वे 2015 के करार से पीछे न हटें जिसमें ईरान को प्रतिबंधों से बड़ी राहत  नागरिक परमाणु प्रोग्राम की गारंटी दी गई थी इसके बदले में ईरान को उन कार्यक्रमों पर रोक लगानी थी जिनका प्रयोग परमाणु हथियार बनाने में हो सकता था

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