Monday , September 24 2018
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न्यायपालिका के भरोसे पर आंच नहीं आने दी जाएगी

उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने जैसे ही चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) दीपक मिश्रा के विरूद्धलाए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज किया था. इसके बाद सीजेआई ने जजों के साथ एक मीटिंग की. इस मीटिंग में संस्थान की गिरती छवि को सुधारने के लिए चार जजों की एक टीम बनाने का फैसला लिया गया. यह टीम जजों से अनौपचारिक तौर पर उनकी चिंताओं को सुनेगी  सुझाव मांगेगी. इस टीम के सदस्य जस्टिस एके सीकरी, यूयू ललित, डीवाई चंद्रचूड़  संजय किशन कौल हैं.
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जजों की मॉर्निंग बैठक वैसे तो एक नियमित प्रक्रिया है जो हर वीक डे पर बुधवार छोड़कर होती है लेकिन सोमवार कोई साधारण दिन नहीं था इसलिए पांच मिनट की मीटिंग 20 मिनट तक चली.इससे सभी सिटिंग जज अपने कोर्टरूम में 15 मिनट देरी से पहुंचे. नायडू ने मीटिंग से कुछ मिनट पहले ही महाभियोग प्रस्ताव को ठोस सबूतों की कमी का हवाला देते हुए खारिज कर दिया था. इस मीटिंग में जस्टिस रंजन गोगोई ने सीजेआई से आग्रह किया कि जितनी जल्दी हो सके वह जजों की चिंताओं  मुद्दों पर बात करें. हालांकि दीपक मिश्रा के बाद सीजेआई बनने वाले जस्टिस गोगोई ने बोला कि जो कुछ भी अतीत में हुआ उसे पीछे छोड़ देना चाहिए.

अक्टूबर में गोगोई सीजेआई का कार्यभार संभालेंगे. उन्होंने बोला कि जजों को आगे बढ़कर संस्थान की छवि को उज्जवल बनाने के लिए कार्य करना चाहिए. सूत्रों ने बताया कि मीटिंग में सीजेआई को जजों की चिंताओं के बारे में पता चला. उन्होंने बोला कि इन्हें जल्द ही अनौपचारिक वार्ता के जरिए सुलझा लिया जाएगा. इसके लिए न्यायालय बैठक की आवश्यकता नहीं है. जस्टिस मिश्रा ने बोलाकि मैं अपनी पूरी प्रयास कर रहा हूं. जहां बहुत सारे जजों ने मीटिंग के दौरान अपनी बात रखी. वहीं जस्टिस चेलमेश्वर ने कुछ नहीं कहा.

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