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ताज को तस्वीर कैद कर बोले- आफरीन आफरीन

नीला आकाश, हरी-भरी घास और पौधे, इन दोनों के बीच में धवल ताजमहल। संगमरमर में गढ़ी मुहब्बत की निशानी को जैसे ही अपने सामने पाया तो अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई बोल उठे- आफरीन, आफरीन। दीदार-ए-ताज के दौरान उन्होंने अपने जज्बातों को विजिटर बुक में उर्दू और अंग्रेजी में बयां किया। गुरु रवींद्र नाथ टैगोर के शब्दों को लिखते हुए करजई ने लिखा कि ताज वक्त के गाल पर मोती की तरह है।
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अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई सुबह 9.20 बजे ताजमहल पहुंचे। उन्होंने फोरकोर्ट से ताज में तूफान से हुए नुकसान और गुलदस्ता पिलर गिरने के बारे में पूछा। रॉयल गेट पर एक-एक कदम आगे बढ़कर ताज की खूबसूरती देखी तो मुख्य गुंबद पर शाहजहां-मुमताज की कब्रों पर उकेरे गए शब्दों को पढ़ा। ताज की पच्चीकारी, मीनारों, यमुना किनारे पर महताब बाग और सेंट्रल टैंक पर उन्होंने फोटोग्राफी कराई।

कोई गले लगा तो किसी ने चूमा हाथ
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई के प्रशंसक दुनिया भर में हैं। इसका नमूना ताजमहल और आगरा किला पर मिला। मलयेशिया, इंडोनेशिया, कोरिया, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा के पर्यटकों ने जैसे ही करजई को अपने नजदीक देखा तो सेल्फी लेने की होड़ लग गई। मलयेशिया की महिलाओं ने गले लगने की ख्वाहिश जताई तो करजई इंकार न कर सके। मुस्कराते हुए करजई ने सभी के साथ फोटो खिंचवाए। अफगानिस्तान के युवा और बुजुर्ग मिले तो उनसे पश्तो में बात की और उनकी सेहत के बारे में पूछा। करजई को अपने बीच में पाकर सैलानियों ने उनका हाथ चूमा और अफगानिस्तान के सुनहरे भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

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