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ई-वे बिल की सुविधा के लिए निगरानी रख रहे हैं कर अधिकारी

GST चोरी रोकने के इरादे से ‘ई-वे बिल’ लागू करने के बाद गवर्नमेंट अब यह सुनिश्चित करने में जुट गयी है कि इस व्यवस्था से व्यापारियों को किसी भी तरह की दिक्कत न आए. इसी दिशा में कदम उठाते हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट कर एंड कस्टम (सीबीआइसी) की अध्यक्ष वनजा एन सरना ने GST के मुख्य आयुक्तों को ई-वे बिल के क्रियान्वयन की निरंतर निगरानी करने  व्यापारियों को आने वाली दिक्कतों को तत्काल दूर करने का आदेश दिया है.

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सूत्रों के अनुसार सरना ने सीबीआइसी के शीर्ष अधिकारियों को लिखे लेटर में साफ बोला है कि अगर किसी राज्य के किसी एरिया में या किसी चीज की ढुलाई के लिए ई-वे बिल जेनरेट करने में दिक्कत आ रही है तो वे संबंधित राज्य के कर अधिकारियों के साथ संपर्क कर उसे तत्काल दूर करें. उनका कहना है कि रीयल टाइम मॉनिटरिंग के जरिये ई-वे बिल का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा जिससे राष्ट्र में कारोबार करने की प्रक्रिया भी आसान  सुगम बनेगी.

उल्लेखनीय है कि GST कानून के तहत 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य के माल की ढुलाई के लिए ई-वे बिल साथ में होना आवश्यक है. GST काउंसिल ने इस वर्ष 10 मार्च को हुई मीटिंग में एक अप्रैल से राष्ट्र भर में इंटरस्टेट व्यापार के लिए ई-वे बिल लागू हुआ है. इंट्रा-स्टेट ई-वे बिल का क्रियान्वयन चुनिंदा राज्यों में चरणबद्ध ढंग से लागू किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश, बिहार  उत्तराखंड समेत अब तक 12 राज्यों में इंट्रास्टेट व्यापार के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था लागू कर दी है.

सीबीआइसी के अनुसार शुरुआती 20 दिनों में ही डेढ़ करोड़ से अधिक ई-वे बिल जेनरेट किए जा चुके हैं. हर दिन औसतन 11 लाख ई-वे बिल जेनरेट हो रहे हैं. माना जा रहा है कि जब बाकी राज्यों में भी इंट्रास्टेट कारोबार के लिए ई-वे बिल लागू किया जाएगा तो यह आंकड़ा दोगुने से अधिक हो सकता है.

 

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