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55 महीने के उच्चतम स्तर पर आई पेट्रोल व डीजल की कीमतें

अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे ऑयल की मूल्य बढ़ने से घरेलू मार्केट में पेट्रोल  डीजल के दाम 55 महीने के अधिकतम स्तर पर पहुंच गई हैं. राष्ट्र की राजधानी में पेट्रोल की कीमतें शुक्रवार को 74.08 रुपये  डीजल की 65.31 रुपये प्रति डीजल पर पहुंच गईं. पेट्रोल के मूल्य ने 74.10 रुपये प्रति लीटर का सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर सितंबर 2013 में छुआ था.

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पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों ने गवर्नमेंट पर भी दबाव बढ़ा दिया है. बढ़ती कीमतों से आम जनता की परेशानियों को देखते हुए एक्साइज ड्यूटी में कमी कर उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग होने लगी है. जानकार मान रहे हैं कि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो महंगाई बढ़ने का भी खतरा ज्यादा होगा. कच्चा ऑयल ही नहीं बल्कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट भी पेट्रोलियम उत्पादों की मूल्य को हवा दे रही है. दरअसल रुपया गिरने से आयातित कच्चे ऑयल का राष्ट्र में मूल्य  बढ़ जाता है. इन वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों को लेकर कांग्रेस पार्टी भी गवर्नमेंट पर हमलावर हो गई है. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने शुक्रवार को एक ट्वीट में बोला कि बीजेपी राष्ट्र के 22 राज्यों में सरकारें चला रही है. इसके बावजूद वह पेट्रोलियम  पेट्रोलियम उत्पादों को GST के दायरे में लाने को तैयार नहीं है.

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अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. सऊदी अरब की तरफ से कच्चे ऑयल की कीमतों को ऊंचा रखने की समाचार से ऐसा हो रहा है. हालांकि शुक्रवार को सऊदी अरब ने इस बात से इन्कार किया है कि उसने कीमतों को ऊंचा बनाये रखने का कोई इशारा ऑयलउत्पादक राष्ट्रों को दिया है.

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अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे ऑयल की कीमतें 74 डॉलर प्रति बैरल (प्रति बैरल करीब 158 लीटर) के करीब पहुंच गई. भारतीय बास्केट में भी क्रूड के भाव 70 डॉलर के आसपास बने हुए हैं. पिछले दिनों इस बात की चर्चा थी कि भारतीय बास्केट में क्रूड के दाम 65 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने पर उत्पाद शुल्क में कटौती पर विचार किया जा सकता है. हालांकि बाद में गवर्नमेंट ने ऐसी किसी आसारसे इन्कार कर दिया था. वित्त मंत्रालय के सूत्र भी बताते हैं कि खजाने की मौजूदा हालत को देखते हुए गवर्नमेंट एक्साइज ड्यूटी में राहत देने की स्थिति में नहीं है.

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