Friday , September 21 2018
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RBI की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

नोटबंदी के डेढ़ वर्ष बाद भी राष्ट्र के कुछ स्थानों पर एक बार फिर से नोट तंगी के जो दशा बने, उसके लिए रिजर्व बैंक के आकलन की योग्यता पर सवाल उठने लगा है. यह सवाल राष्ट्र के पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा ने तो उठाया ही है, सरकारी ऑफिसर भी इस तरह की बातें करने लगे हैं. हालांकि रिजर्व बैंक ने इस तरह की किसी भी बात को सिरे से खारिज किया है.
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केंद्रीय वित्त मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ ऑफिसर ने बोला कि पूरे प्रकरण में रिजर्व बैंक के आकलन की योग्यता पर सवाल उठता है. उसका कार्य बैंकिंग एरिया का नियमन तो है ही, अर्थव्यवस्था में नोट की कितनी मांग है, इसका आकलन कर उस हिसाब से करेंसी नोट छपवाने का प्रबंध करना भी है.लेकिन पिछले कुछ महीनों में इस बारे में रिजर्व बैंक का प्रदर्शन अच्छा नहीं लग रहा है.

दिख रहा है कैजुअल अप्रोच

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उन्होंने बोला कि चाहे करेंसी नोट छपवाना हो या सिक्का ढलवाना, सबमें रिजर्व बैंक कैजुअल अप्रोच अपना रहा है. उदाहरण के लिए कभी छापेखाने को 90 लाख पीस नोट छापने का आर्डर मिलता है बाद में उसे घटा कर 70 लाख पीस कर दिया जाता है. यही हालत सिक्के में भी है. इससे छापेखाने टकसाल के ऑफिसर भी ढंग से कार्य नहीं कर पाते हैं. यही नहीं, छपे नोटों को छापेखाने से उठाने में भी ढिलाई होती है  छपे नोटों को बहुत ज्यादा दिन तक गोदामों में रखना पड़ता है.

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बीते जून से नहीं छप रहा है 2000 रुपये का नोट

सूत्र के मुताबिक बीते जून से ही रिजर्व बैंक ने 2000 रुपये के नोट छपवाने बंद कर दिए. इसके अतिरिक्त 500 रुपये के नोट भी बहुत कम छप रहे हैं. 100 रुपये का तो नया नोट अभी आया ही नहीं है. इसलिए नोट छापने वाले प्रेस ले दे कर दस, बीस  पचास रुपये के नोट छाप रहे हैं. पर्याप्त कार्यनहीं रहने से करेंसी नोट प्रेस में कर्मचारियों का भी इंसेंटिव प्रभावित होता है.

रिजर्व बैंक  गवर्नमेंट की है विफलता

बीजेपी के वरिष्ठ नेता  अटल बिहारी वाजयेयी गवर्नमेंट में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने शुक्रवार को बोला कि यह पूर्ण रूप से कुप्रबंधन है. एक टीवी चैनल से वार्ता में उन्होंने बोला कि चाहे रिजर्व बैंक की बात करें या गवर्नमेंट की, दोनों अपनी किरदार के निर्वाह में विफल रहे हैं. उनके मुताबिक रिजर्व बैंक के पास ऐसी स्थिति सेे निपटने की कोई योजना नहीं थी. यह शुद्घ रूप से करेंसी नोट के वितरण तंत्र की विफलता है. उन्होंने गवर्नमेंट को भी आड़े हाथों लेते हुए बोला कि यदि अर्थव्यवस्था में 70 हजार या एक लाख करोड़ रुपये के करेंसी नोट की कमी थी तो उसे दूर करने की प्रयास क्यों नहीं हुई.

आरबीआई ने आरोप को किया खारिज

रिजर्व बैंक के प्रवक्ता से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज किया. उनका कहना है कि यह आरोप गलत है, रिजर्व बैंक अपना कार्य बेहतर ढंग से कर रहा है  आकलन में कहीं कोई खामी नहीं है. अप्रैल के पहल पखवाड़े में जो नोट की किल्लत हुई, उसके पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं. अब पूरे राष्ट्र में नोटों की किल्लत दूर हो गई है.

सरकार स्थिति संभाले नहीं तो आंदोलन होगा

बैंक कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन एआईबीईए के महासचिव सीएच वेंकटचलम का कहना है कि नोटों की किल्लत के लिए गवर्नमेंट या रिजर्व बैंक दोषी हैं, जबकि इसका खामियाजा बैंक कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है. अक्सर ग्राहक बैंक कर्मचारियों को भला-बुरा कह देते हैं. इसलिए गवर्नमेंट इस स्थिति को अच्छा करे नहीं तो बैंक कर्मचारी आंदोलन की राह पर उतर सकते हैं.

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