Wednesday , September 19 2018
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35 वर्ष बाद यहाँ के सिनेमाघर में दिखाई फिल्म

सऊदी अरब ने पिछले 35 सालों से अपने सिनेमा Halls में ताला लगाया हुआ था लेकिन खुशी की बात ये है, कि ये ताला अब खुल चुका है 35 सालों के इंतज़ार के बाद 18 अप्रैल 2018 को सऊदी अरब में पहली बार किसी सिनेमाघर में कोई फ़िल्म दिखाई गई  इसी के साथ 18 अप्रैल का दिन वहां के हर नागरिक के लिए एक ऐतिहासिक तारीख बन गया आज इस क्रांतिकारी कदम को समझना आपके लिए ज़रूरी है क्योंकि अब सऊदी अरब, आगे बढ़ने के लिए, Soft Islam का सहारा ले रहा है ये पूरी संसार के लिए एक बहुत सकारात्मक ख़बर है  इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है, वहां के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जिनकी आयु सिर्फ 32 वर्ष है  वो अपने राष्ट्रकी सामाजिक  आर्थिक स्थिति को सुधारना चाहते हैं

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सऊदी अरब की कुल आबादी लगभग सवा 3 करोड़ है  इसमें से डेढ़ करोड़ से ज़्यादा लोगों की आयु 30 साल से  कम है इसीलिए ये भी बोला जा रहा है, कि मोहम्मद बिन सलमान अपने Vision 2030 के तहत, सऊदी अरब के युवाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं ताकि वो बदलती संसार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें ऐसे में सिनेमा को आज़ाद करना एक बड़ा सांस्कृतिक निर्णय है

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वर्ष 1980 के आसपास वहाबी कट्टरपंथियों के दबाव में सऊदी अरब में Cinema Halls पर प्रतिबंध लगा दिया गया था   तब से लेकर अब तक सऊदी अरब के तमाम लोग मनोरंजन के लिए UAE, Bahrain  कई दूसरे राष्ट्रों की यात्रा करते थे

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लेकिन, आज की तस्वीर ये है, कि वहां पर धार्मिक नेताओं का असर बहुत ज्यादा कम हो गया है कई दशकों तक सऊदी के लोग रूढिवादी रहे लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वहां की सत्ता  वहां का समाज, दोनों पहले की अपेक्षा ज़्यादा उदारवादी हो गये हैं    ये उदारवाद ही सऊदी अरब के भविष्य की कुंजी है

सऊदी अरब में 35 सालों के बाद Cinema Halls पर लगा ताला हट चुका है ये बात तो आपको पता चल गई  लेकिन क्या आपको ये पता है कि हमारे राष्ट्र में भी एक ऐसी स्थान है जहां पिछले 28 सालोंसे Cinema Halls पर तालें लटक रहे हैं  ये स्थान है कश्मीर  बहुत से लोगों को ये बात नहीं पता होगी कि श्रीनगर समेत पूरी कश्मीर घाटी में साल 1990 से Cinema Halls बंद पड़े हुए हैं 

वर्ष 1990 के आसपास कश्मीर के कट्टरपंथियों ने  कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार करके उन्हें कश्मीर से बाहर निकाल दिया था  इसी दौरान कश्मीर में Cinema Halls पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था  तब से आज तक कश्मीर घाटी में Cinema Halls बंद हैं  ये बहुत दुर्भाग्य की बात है कि आतंकी कश्मीर पर अपनी विचारधारा को थोपने में सफल हो गए  कट्टरपंथ जीत गया  उदारवाद पराजय गया 

यहां आपको ये बात भी समझनी चाहिए कि राष्ट्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए आंदोलन करने वाले  मोमबत्ती जलाने वाले लोगों को कश्मीर में बंद पड़े Cinema Halls नहीं दिखाई देते हैं ये ऐसा बुद्धिजीवी वर्ग है जो उन्हीं पत्थरबाजों का समर्थन करता है  जिनकी कट्टरपंथी मानसिकता की वजह से आज कश्मीर घाटी में Cinema Halls बंद पड़े हैं

देश को वो सुनहरा दौर भी याद है  जब कश्मीर में Romantic Films की Shooting हुआ करती थी  साल 1964 की फिल्म ‘कश्मीर की कली’  में डल झील पर Shoot किया गया गाना आज भी बहुत सारे लोगों को याद होगा  इसके बाद भी कश्मीर में बहुत सी फिल्मों की शूटिंग हुई है  जिनमें कश्मीर पर बनी फिल्में हैदर  मिशन कश्मीर भी शामिल हैं लेकिन विडंबना ये है कि कश्मीर में शूट होने वाली फिल्में भी वहां के सिनेमा हॉल्स  में रिलीज़ नहीं हो सकतीं

यानी वो कश्मीर जिसे संसार का स्वर्ग बोला जाता है  वो वहाबी कट्टरपंथ की वजह से अपने सिनेमा halls पर ताला लगा चुका है ये हिंदुस्तान के लिए शर्म की बात है कि एक आज़ाद राष्ट्र होने के बावजूद  इसी आज़ाद राष्ट्र के एक हिस्से में हिंदुस्तान के कानून नहीं चलते   अभिव्यक्ति की आज़ादी के होने के बावजूद  इसी राष्ट्र के एक हिस्से में आपको सिनेमा हॉल में फिल्म देखने की आज़ादी नहीं है

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