Monday , August 20 2018
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बिटकॉइन को बंद करो

डॉ. भरत -हजयुन-हजयुनवाला
रिजर्व बैंक ने दे-रु39या के बैंकों को आदे-रु39या दिया है कि इलेक्ट्रॉनिक करेंसी जैसे बिटकॉइन में वे व्यापार न करें। इस
इलेक्ट्रॉनिक करेंसी का इजाद कुछ लोगों ने यह सोच कर किया था कि सरकार द्वारा बनाई गई करेंसी के अतिरिक्त
लेन-ंउचयदेन का कोई दूसरा माध्यम बनाया जाये। लेकिन रिजर्व बैंक के प्रतिबंध से यह स्प-ुनवजयट हो गया है कि सरकार के ऊपर
होकर नहीं चला जा सकता है।
पहले यह सम-हजयें कि इलेक्ट्रॉनिक करेंसी क्या है? मान लीजिये एक कमरे के अन्दर 100 सुडोकु के खिलाड़ी अलग-ंउचयअलग
क्यूबिकल में बैठ जाते हैं और किसी सुडोकु को हल करने का प्रयास करते हैं। जो खिलाड़ी सबसे पहले सुडोकु
को हल करता है वह घो-िुनवजयात करता है और बाकी सभी 99 स्वीकार करते हैं कि उसने सबसे पहले उस सुडोकु को हल
किया। ये 99 उसे एक बिटकॉइन इनाम स्वरूप दे देते हैं। यह बिटकॉइन सभी 100 खिलाड़ियों द्वारा सम्मिलित रूप से दिया
जाता है और इसे उन सभी की मान्यता होती है। वे आपस में लेन-ंउचयदेन के लिए इस बिटकॉइन का उपयोग कर सकते हैं।
एक सुडोकु हल हो जाने के बाद सभी खिलाड़ी इसमें एक नई लाइन या कुछ परिवर्तन करके और कठिन सुडोकु
बनाते हैं। इस नये सुडोकु की फिर से प्रतियोगिता चालू होती है और जो खिलाड़ी इस नये सुडोकु को सबसे पहले
हल कर दे उसे पुनरू इनाम स्वरूप एक बिटकॉइन दे दिया जाता है। इस प्रकार एक नई करेंसी प्रचलन में आ जाती है। इसी प्रकार
कम्प्यूटरों के खिलाड़ियों द्वारा बिटकॉइन बनाया जाता है। -रु39याुरू में दस कम्प्यूटरों ने कोई पहेली बनाई और एक
सुपर कम्प्यूटर ने इस पहेली को आपस में जोड़ करके सबसे जादा कठिन पहेली बनाई। फिर दस कम्प्यूटर चालकों ने इस

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कठिन पहेली को हल करने का प्रयास -रु39याुरू किया। इन दस कम्प्यूटर चालकों में से जिसने सबसे पहले उस पहेली को हल किया,
उसने -रु39यो-ुनवजया सभी कम्प्यूटरों को सूचित किया कि मैंने पहेली को हल कर लिया है। -रु39यो-ुनवजया कम्प्यूटरों ने उसके द्वारा
दिये गये हल को जांचा और सबने पाया कि हां यह पहेली वास्तव में हल हो गई है। सबने अपनी स्वीकृति दे दी। सब
कम्प्यूटरों द्वारा इस विजेता कम्प्यूटर को एक बिटकॉइन इनाम स्वरूप दे दिया गया। इसके बाद सभी खिलाड़ियों ने उस
पहेली में कुछ परिवर्तन करके एक और जटिल पहेली बनाई। एक सुपर कम्प्यूटर ने इन सब सु-हजयावों को जोड़ करके एक
वि-रु39यो-ुनवजया जटिल पहेली बनाई जिसको पुनरू सब कम्प्यूटरों को हल करने के लिए दिया गया। दूसरे चक्र में जिस कम्प्यूटर ने इस
पहेली को हल किया उसे विजेता घो-िुनवजयात किया गया और उसे पुनरू एक बिटकॉइन दिया गया। कम्प्यूटरों के इस जाल में
बहुत सारे कम्प्यूटर जुड़ गये हैं और यह एक प्रकार का वै-िरु39यवक खेल बन गया है। इस खेल की वि-रु39यो-ुनवजयाता यह है कि चुनौती
को हल करने के लिए बड़े-ंउचयबड़े कम्प्यूटर लगाये गये हैं जिससे कि पहेली को -रु39याीघ्राति-रु39याीघ्र हल किया जा सके। तिब्बत
में बिजली का दाम कम होने से कई कम्प्यूटर खिलाड़ियों ने वहां बड़े-ंउचयबड़े दफ्तर बनाये हैं जहां इन
पहेलियों को बनाया और हल किया जाता है और बिटकॉइन का उत्पादन होता है जिसे बिटकॉइन का खनन कहते हैं।
स्प-ुनवजयट होगा कि सुडोकु के विजेता द्वारा जीता गया बिटकॉइन अथवा कम्प्यूटरों द्वारा बनाया गया बिटकॉइन की मान्यता इस
बात पर टिकी है कि बाकी सब खिलाड़ी उस बिटकॉइन को स्वीकार करेंगे। जैसे आपके पड़ोस में यदि 100 लोग बैठ के
सुडोकु की पहेली बना ले और हल कर लें और किसी को बिटकॉइन इनाम स्वरूप दे दें तो आपके लिये जरूरी नहीं है कि
आप उस बिटकॉइन को मान्यता दें। लेकिन तमाम ऐसे लोग हैं जो इन बिटकॉइन को मान्यता देने को तैयार हैं और
वे नकद पेमेंट करके बिटकॉइन खरीदते भी हैं। इस नकद पेमेंट करने से बिटकॉइन का रूप मुद्रा जैसा हो जाता है।
बिटकॉइन उसी प्रकार है जैसे किसी ओलम्पिक मेडल को कोई व्यक्ति लाखों रुपये देकर खरीदने को तैयार हो सकते
हैं। इसी प्रकार कुछ लोग बिटकॉइन खरीदने को तैयार हो जाते हैं। जिस प्रकार हम डालर या रुपये में लेन-ंउचयदेन करते हैं
उसी प्रकार हम बिटकॉइन का उपयोग भी लेन-ंउचयदेन के लिये कर सकते हैं। बिटकॉइन की मुद्रा, सोने अथवा सरकार द्वारा
जारी नोट की तरह नहीं है। सोने की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि स्वर्ण मुद्रा में जो सोना है उसकी अपनी
कितनी कीमत है, जैसे पांच ग्राम सोने की मुद्रा का दाम कम होता है और दस ग्राम सोने की मुद्रा का दाम ज्यादा
होता है। सरकार द्वारा जारी किये गये नोट की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार की मान्यता कितनी है। जैसे आपके
नोट पर रिजर्व बैंक के गवर्नर लिखते हैं कि मैं नोट धारक को अमुक रकम अदा करूंगा। यानि कि आपके हाथ में जो
नोट है उसकी कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि रिजर्व बैंक उस नोट के बदले आपको अमुक माल या मुद्रा देने को
तैयार है। बिटकॉइन का चरित्र ऐसा नहीं है। न तो इसके पीछे सोने जैसी कोई धातु है न ही इसके पीछे सर्वमान्य
रिजर्व बैंक जैसी कोई अधिकृत संस्था है। जैसे आपके घर में दस आदमी आपस में मिलकर कुछ निर्णय कर लें तो
उसकी सामाजिक मान्यता नहीं होती है। इसलिये बिटकॉइन टिकाऊ नहीं है।
बिटकॉइन में दूसरी समस्या यह है कि जैसे एक कमरे में सौ खिलाड़ी बैठ कर सुडोकु की पहेली को हल करते हैं, वैसे
ही दूसरे कमरे में दूसरे 100 खिलाड़ी सुडोकु हल कर सकते हैं और तीसरे कमरे में तीसरे। इस प्रकार तमाम
इलेक्ट्रॉनिक करेंसियां चालू हो गई हैं जिसमें बिटकॉइन प्रमुख हैं। दूसरी करेंसी हैं ऐथेरियन, लाइटकायन,
डै-रु39या, न्यू, इत्यादि। इलेक्ट्रॉनिक करेंसी के पीछे कोई अधिकृत संस्था नहीं होती इसलिये इसकी कीमत पानी पर बह
रहे तेल जैसी है इसमें कोई गहराई नहीं होती है। सामाजिक दृ-िुनवजयट से भी बिटकॉइन हानिप्रद है। बड़े कम्प्यूटरों
में भारी मात्रा में बिजली की बर्बादी केवल एक आटिफि-िरु39यायल पहेली को हल करने में लगाई जाती है। जैसे हमने एक
कागज पर लाइन बनाई फिर मिटाई फिर लाइन बनाई फिर मिटाई। हमने इस लाइन को बनाने और मिटाने में आनन्द
पाया। इसी प्रकार बिटकॉइन की पहेली बनाने और हल करने में लोग आनन्द प्राप्त करते हैं। इसे बौद्धिक विलासिता कहा जा
सकता है। इसका सामाजिक दु-ुनवजयप्रभाव यह है कि इसमें बिजली और संसार के प्राकृतिक संसाधनों की भयंकर बर्बादी हो
रही है। अतरू रिजर्व बैंक द्वारा बिटकॉइन पर प्रतिबन्ध लगाना सही है और इसको आगे ब-सजय़ाना चाहिये।
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कठुआ कांड के गहरे निहितार्थ

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ललित सुरजन
इन चार सालों में सुनते-ंउचयसुनते कान पक गए कि जो सत्तर साल में नहीं हुआ वह अब हो रहा है। प्रधानमंत्री ने यह बात
कम से कम चार हजार बार कही होगी तो उनके पार्टीजन और भक्तजनों ने चार अरब बार इसे मंत्र की तरह उच्चारित किया
होगा। आज मैं कहना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री जी! हां, जो पिछले सत्तर साल में नहीं हुआ वह आज हो रहा है।
कठुआ में जो कुछ हुआ वह इस बात का वीभत्स प्रमाण है। ऐसा पहले तो कभी नहीं हुआ था कि भारत में किसी
स्त्री के साथ बलात्कार हो और उसकी अनुगूंज संयुक्त रा-ुनवजयट्र संघ तक सुनाई दे। वह एक ऐसी भयावह चीख हो कि
संयुक्त रा-ुनवजयट्र संघ के महासचिव तक को बयान देने की नौबत आ जाए जिसमें भारत से उम्मीद की जाए कि इस दरिंदगी और
वह-रु39याीपन को अंजाम देने वालों को कानून के दायरे में लाकर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। हमें याद
नहीं आता कि एंटोनियो गुट्टारेस या उनके पूर्व के किसी महासचिव ने किसी सदस्य दे-रु39या के बारे में सामान्य -रु39याांति के
दौर में ऐसी प्रतिक्रिया व्यक्त की हो।
भारत तो संयुक्त रा-ुनवजयट्र संघ का संस्थापक सदस्य है। जनतांत्रिक मूल्यों के प्रति नि-ुनवजयठा के कारण वि-रु39यव समाज में उसने अलग
प्रति-ुनवजयठा कायम की है। तीसरी दुनिया के दे-रु39याों में तो उसे एक आद-रु39र्या ही माना जाता रहा है। भारत की जनता भी
अपनी सैकड़ों कमियों के बावजूद अपनी बहुलतावादी संस्कृति पर गर्व करती आई है। इसके बाद अगर आज हमें वि-रु39यव
बिरादरी के मुखिया से नसीहत मिल रही है और हम -रु39यार्म से सिर -हजयुकाए खड़े हैं तो यह हमारे लिए गहरे आत्ममंथन का समय
है। रा-ुनवजयट्रीय -रु39यार्मिन्दगी के इस क्षण को सो-रु39याल मीडिया पर ऊलजलूल टिप्पणियां कर या मौनव्रत धारण कर हवा में नहीं
उड़ाया जा सकता। इस समय दो घटनाएं चर्चा में हैं जिन्होंने सभ्य समाज को आंदोलित कर रखा है। एक घटना
उन्नाव की है जिसने उत्तरप्रदे-रु39या की -रु39याासन व्यवस्था, सत्ताधारी वर्ग का अहंकार, और ऐसे कई सवाल खड़े किए हैं,
लेकिन मैं सोचता हूं कि कठुआ की त्रासदी स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपनी तरह की सबसे अधिक विचलित कर देने वाली
-रु39यार्मनाक घटना है जिसकी बहुत सी परतें हैं।
यह तथ्य याद रखने की आव-रु39ययकता है कठुआ में जिस बच्ची के साथ बलात्कार हुआ उसकी आयु मात्र आठ व-ुनवजर्या थी।
लड़की का नाम आसिफा था याने वह अल्पसंख्यक समुदाय से थी। उस नन्ही बालिका को हिन्दू-ंउचयमुसलमान का फर्क भी
मालूम नहीं रहा होगा। यह भी याद रखना होगा कि जिन नरपि-रु39यााचों ने यह अपराध किया उसके लिए उन्होंने एक मंदिर
को चुना। जिस मंदिर में वे पूजा करने जाते होंगे उस पूजा-ंउचयस्थल को उन्होंने एक पाप-ंउचयस्थल में बदल दिया। जिस
नराधम ने यह -ुनवजयाड़यंत्र रचा उसने अपने नाबालिग रि-रु39यतेदारों को भी इस पाप का भागीदार बनने के लिए बुलाया। इसमें
पुलिस का कोई अधिकारी भी -रु39यारीक था। यह हमारी व्यवस्था के बारे में एक -रु39याोचनीय संकेत है। इससे ब-सजय़कर फिर हम
जानते हैं कि लगभग तीन महीने तक पूरे मामले को दबा कर रखा गया। मीडिया ने कोई संज्ञान इसका नहीं लिया।
जिन्हें मालूम पड़ा वे भी चुप रहे, और जब मामला खुलने लगा तो अपराधियों पर कार्रवाई होने के बदले उनके
संरक्षण में लोग सामने आ गए। वे कौन लोग थे जो अपराधियों के बचाव में सामने आए? यह अनकथ विडंबना है कि
जिन वकीलों को न्यायालय का अधिकारी माना जाता है जिनसे मानवाधिकार, मानवीय गरिमा, न्याय, संविधान-ंउचयइन सबके
संरक्षण की उम्मीद की जाती है वे खुलकर गुनहगारों का साथ देने लगे। कठुआ की बार एसोसिए-रु39यान और जम्मू की बार
एसोसिए-रु39यान ने बड़ी हो-िरु39यायारी से उनके पक्ष में वक्तव्य जारी किए। पुलिस की अपराध -रु39यााखा के बजाय सीबीआई से जांच
करवाने का मुद्दा उठाकर वे सड़कों पर आ गए। जिस महिला वकील ने आसिफा का मुकदमा हाथ में लिया उसे बार रूम में
पानी तक नहीं पीने दिया और सीजेएम के सामने मुकदमा पे-रु39या करने के रास्ते में तमाम बाधाएं पहुंचाईं। यही नहीं,
एक कोई कथित हिन्दू सेना अपराधियों के पक्ष में सामने आ गई और प्रदे-रु39या में सत्तारू-सजय़ भाजपा के मंत्रियों ने
उसमें खुलकर भागीदारी की।
प्र-रु39यन है कि यह सब क्यों हुआ? आसिफा घूमंतू बकरवाल कबीले से थी। ये लोग -रु39याीतकाल में पहाड़ों से नीचे उतर
आते हैं। आसिफा का परिवार भी इसी कारण कठुआ आया था। यह वह समाज था जिसके लोगों ने पूर्व में पाकिस्तानी
घुसपैठियों के बारे में भारतीय सुरक्षाबलों को एकाधिक बार सचेत किया है जिनके कारण समय रहते जवाबी कार्रवाई
होने से पाकिस्तान की घुसपैठ नाकाम कर दी गई। क-रु39यमीर को भारत का अविभाज्य अंग मानने वाले और अपने आपको

गर्व से हिन्दू कहने वालों ने इस समाज को उसकी दे-रु39याभक्ति के बदले में यह तोहफा दिया है। इसके बाद भी इन्हें
कोई -रु39यार्म या ग्लानि नहीं है। संघ और भाजपा के बड़े नेता राम माधव अभी भी अपने मंत्रियों को निर्दो-ुनवजया
होने का प्रमाण दे रहे हैं। यह किसी से छुपा हुआ नहीं है कि भारत को एक हिन्दू रा-ुनवजयट्र बनाने की को-िरु39या-रु39यों एक
लंबे अरसे से चल रही है। दे-रु39या में बहुसंख्यक हिन्दू और अल्पसंख्यकों के बीच खाई पैदा करने की को-िरु39या-रु39यों लगातार
जारी हैं। कठुआ कांड में एक बहुआयामी वर्चस्ववाद हमें दिखाई देता है जो असीम घृणा पर आधारित है। दे-रु39या
में सांप्रदायिक वारदातें पहले भी हुई हैं। बलात्कार की घटनाओं से भी दे-रु39या का कोई इलाका अछूता नहीं
है, लेकिन इस कांड ने सारी हदें तोड़ दी हैं। आठ साल की एक मासूम के साथ बलात्कार क्षणिक उत्तेजना के कारण
नहीं हुआ है। यह घिनौना अपराध किसी सांप्रदायिक दंगे या युद्ध के बीच उपजी पा-रु39याविकता के कारण भी नहीं हुआ
है। इसके विपरीत योजना बनाकर, सोच-ंउचयविचारकर इसे अंजाम दिया गया है। इससे पता चलता है कि मुख्य अपराधी और उसके
साथियों के रोम-ंउचयरोम से कैसी घृणा फूट रही होगी जो हमने पहले कभी नहीं देखी।
यह कांड सबसे पहले तो हिन्दुत्ववादी वर्चस्व बोध को द-रु39र्यााता है और संकेत करता है कि अगर इन -रु39याक्तियों को
मौका मिला तो आगे वे क्या कर सकते हैं। इसमें वह पितृसत्तात्मक पुरु-ुनवजयावादी वर्चस्व भी है, जो औरत को अपनी
जागीर सम-हजयता है और उससे हर तरह की खिलवाड़ करने को अपना हक। फिर जब राज्य सरकार के दो मंत्री अपराधियों के पक्ष
में सामने आते हैं तो सत्ताधारी वर्ग का वर्चस्व भी स्प-ुनवजयट दिखाई देता है। एक खानाबदो-रु39या गरीब घर की लड़की
के साथ बलात्कार और उसकी हत्या से सम्पन्न समाज का वर्चस्वबोध भी प्रकट होता है। इस प्रकरण में वकीलों की जो
भूमिका सामने आई वह भी समाज के -िरु39याक्षित वर्ग के वर्चस्व को प्रद-िरु39र्यात करता है जिसमें -रु39यो-ुनवजया समाज को अपने से हेय
मानने की प्रवृत्ति लगातार ब-सजय़ रही है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, उनकी पार्टी, उनकी सरकार, मीडिया
और वृहतर समाज-ंउचय इन सबका जो रोल प्रारंभ में रहा वह बहुत चिंता उपजाता है। यह कांड जनवरी का है। प्रदे-रु39या सरकार
इससे अनभिज्ञ नहीं थी। फिर इतने दिनों तक महबूबा मुफ्ती क्या कर रही थीं? अगर उनकी सरकार का कामकाज इतना ही
-सजयीला-ंउचय-सजयाला है तो क्या उन्हें पद पर रहने का अधिकार है? सारा खुलासा हो जाने के बाद भी उन्होंने कोई
नैतिक जिम्मेदारी नहीं ली। क्या उन्हें सत्ता का इतना मोह है कि प्रदे-रु39या में भाजपा के इरादे और गतिविधियों
को देखने के बाद भी वे एक अप्राकृतिक गठजोड़ को बनाए हुए हैं। भाजपा के दो मंत्रियों ने इस्तीफे तो दिए
लेकिन बड़ी अनिच्छा से। एक ने तो कहा कि वे पार्टी के निर्दे-रु39या पर विरोध प्रद-रु39र्यान में -रु39याामिल हुए थे। लेकिन
भाजपा भी कोई नैतिक दायित्व स्वीकार करने तैयार नहीं था। और दे-रु39या की जनता को क्या हुआ है? यदि राहुल
गांधी आधी रात को मोमबत्ती जुलूस नहीं निकालते तो न तो -रु39याायद उन्नाव के अपराधी गिरफ्तार होते और न
कठुआ के, और जनता भी -रु39याायद खामो-रु39या रही आती। यह अलग बात है कि राहुल गांधी को बात सम-हजय में आई तो सही,
लेकिन देर से।
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आज का रा-िरु39या फल
मे-ुनवजया:-ंउचय जीविका क्षेत्र में अवरोधों से मन में निरा-रु39याा संभव। भौतिक आकांक्षाओं की पूर्ति में ब्यय होगा।
नई सफलताओं से खुद की क्षमताओं का एहसास होगा। संतान संबंधित दायित्वों की पूर्ति हेतु प्रयासरत होंगे।
बृ-ुनवजयाभ:-ंउचय कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मन पर प्रभावी होंगी। घरेलू कायरें में ब्यस्तता ब-सजय़ेगी। परिजनों के
भावनात्मक सहयोग से मन उत्साहित होगा। हंसमुख व मजाकिया स्वभाव से आसपास प्रसन्नता बिखेरेंगे।
मिथुन:-ंउचय सगे-ंउचयसंबंधों में व्यवहार कु-रु39याल बने। सामाजिक एवं मांगलिक कार्यक्रमों में सम्मिलित होंगे। निकट
संबंधों में मधुर संवाद से सुंदर छबि बनावें। महत्वपूर्ण प्रयत्न की सार्थकता से उत्साहित होंगे।
कर्क:-ंउचय विद्यार्थियों के लिए ग्रहों की अनुकूलता लाभप्रद होगी। कुछ महत्वाकांक्षी योजनाएं सार्थक होंगी।
नवीन आ-रु39यााएं नये उत्साह का संचार करेंगी। कार्यक्षेत्र में संबंधों का भरपूर लाभ मिलेगा।

सिंह:-ंउचय अन्तमरुखी स्वभाव को त्याग बाह्यमुखी बनायें। महत्वपूर्ण अभिला-ुनवजयााओ की पूर्ति होने के आसार
बनेंगे। सामान्य दिनर्चया के साथ बीत रहे जीवन में उत्साह का अभाव रहेगा। आलस्य कतई न करें।
कन्या:-ंउचय पुरानी समस्याओं पर विजय प्राप्त कर सुख की अनुभूति करेंगे। ग्रहों की अनुकूलता से अवरोधित कार्य हल
होंगे। -िरु39याक्षा में समुचित परिश्रम करने में असमर्थ मन नकारात्मक चिंताओं से बो-िहजयल होगा।
तुला:-ंउचय किसी नयी दि-रु39याा में सकारात्मक सोच अव-रु39यय रंग लायेगी। पुरानी घटनाओं के स्मरण से मन को क-ुनवजयट संभव।
पारिवारिक वातावरण में उत्साह का माहौल होगा। दुबिधाओं को त्याग सही दि-रु39याा पर केंद्रित हों।
वृ-िरु39यचक:-ंउचय -रु39याासन-ंउचयसत्ता से जुड़े लोगों से निकटता ब-सजय़ेगी। नियोजित परिश्रम द्वारा कार्य पूर्ण होने के आसार हैं।
पुराने संबंधों से लाभ होगा। पारिवारिक वातावरण सुखद व उत्साहपूर्ण होगा।
धनु:-ंउचय कठिन एवं वि-ुनवजयाम स्थितियों के मध्य परिश्रम व लगन से प्रगति की ओर अग्रसर होंगे। सामाजिक सक्रियता से
मान-ंउचयप्रति-ुनवजयठा ब-सजय़ेगी। घरेलू दायित्वों की पूर्ति में सक्रियता से आपकी महत्ता ब-सजय़ेगी।
मकर:-ंउचय कुछ भौतिक आकांक्षाएं अपनी सार्थकता हेतु मन को उद्वेलित करेंगी। निकट संबंधों में भावनात्मक
अपेक्षाएं क-ुनवजयटकारी होंगी। तामसी व गैर सांस्कारिक कायरें की ओर आक-िुनवजर्यात मन पर अंकु-रु39या लगावें।
कुंभ:-ंउचय कुछ नई इच्छाएं बलवती होंगी। प्रयासत क्षेत्रों में संघ-ुनवजर्या संभव किंतु निरा-रु39याावादी विचारों को
मन में स्थान न दें। किसी बड़े आयोजन हेतु समुचित साधन-ंउचयव्यवस्था के लिए मन प्रयत्न-रु39याील होगा।
मीन:-ंउचय नकारात्मक चिंताओं को त्याग अपनी क्षमताओं पर भरोसा करें। नौकरी-ंउचयपे-रु39यो में अधिकारियों व
सहकर्मियों के सहयोग से वातावरण सुखद होगा। राजनीति से जुड़े लोगों का सहयोग प्राप्त होगा।

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