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फेसबुक को न प्रयोग करने वाले यूजर्स का डाटा

संसार की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने इस बात का खुलासा किया है कि क्यों वो उन यूजर्स की जानकारी को एक्सेस करता है, जो फेसबुक के उपभोक्तानहीं है. इससे पहले फेसबुक की तरफ से इस मामले पर बोला गया था कि कंपनी सुरक्षा कारणों से ऐसा करती है, लेकिन अब इस मामले में दूसरा पहलु भी सामने आया है, जहां कंपनी इसे व्यापार के मकसद से भी प्रयोग कर रही है.

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फेसबुक के मुताबिक कई एप्स या वेबसाइट्स उसकी सर्विस का प्रयोग करती हैं. ये वेबसाइट्स यूजर्स को तुरंत अकाउंट बनाने में मदद करती हैं, ताकि वो अपने कंटेंट को फेसबुक पेज पर आर्टिक्लया Behind the scenes के माध्यम से शेयर कर सकें. फेसबुक इन एप्स  वेबसाइट्स की परफॉर्मेंस  सटीक एडवरटाईजमेंट को बढ़ावा देने में मदद करता है.

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ये वेबसाइट्स  एप्स विजिट करने वाले यूजर्स की जानकारी फेसबुक को भेजते हैं. फेसबुक के मुताबिक इन यूजर्स में उन लोगों की जानकारी भी फेसबुक को मिलती है, जो उसके प्लेटफॉर्म का प्रयोग नहीं कर रहे होते हैं. फेसबुक के मुताबिक ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन एप्स या वेबसाइट्स को पता नहीं होता कि उपभोक्ता फेसबुक के प्लेटफॉर्म का प्रयोग कर रहा है या नहीं.

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इससे पहले फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने माना था कि फेसबुक उन लोगों के डेटा को भी ट्रैक करती है, जो फेसबुक का प्रयोग नहीं करते हैं.

आपको दिखने वाले एडवरटाईजमेंट के पीछे इन उपायों का होता है इस्तेमाल

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फेसबुक या अन्य किसी भी प्लेटफॉर्म पर जब आप लॉग इन करते हैं, तो आपकी कई जानकारियों को संबंधित प्लेटफॉर्म, विज्ञापनदाताओं के साथ साझा करता है. आपकी जानकारियों के मुताबिक एडवरटाइजर्स आपको कई श्रेणियों में बांटतें हैं. इन श्रेणियों में आपकी आदतों, पसंद  खरीदारी के आधार पर आपको डाला जाता है. इस प्रणाली से विज्ञापनदाता आपको टारगेट करते हैं.

डायनेमिक्स एड

फेसबुक ने हाल में एक नए तरफ की एडवरटाईजमेंट प्रणाली को प्रारम्भ किया है. इस प्रणाली में उन यूजर्स को टारगेट किया जाता है जो किसी सामान में अपनी रूची को जाहिर कर चुके होते हैं.डायनेमिक्स एड में रीटारगेटिंग(Retargeting) तरीके का प्रयोग किया जाता है, जो कई बार यूजर्स के लिए कठिनाई का सबब भी बन जाता है.

आसान भाषा में समझाएं तो मान लीजिए आपने एक पर्स औनलाइन वेबसाइट पर देखा. अब आपको पर्स पसंद आया कि नहीं या आप उसे खरीदना चाहते हैं कि नहीं ये जाने बिना एडवरटाईजमेंट का एल्गोरिथ्म ऐसा सेट होता है कि अब उसी पर्स को एडवरटाईजमेंट आपको दूसरी वेबसाइट्स पर दिखने लगेगा. डायनेमिक एड इस प्रणाली को एक कदम ऊपर ले जाते हुए आपको उसी पर्स पर 10 प्रतिशत डिस्काउंट जैसे कूपन दिखाने लगेगा. एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां इन एडवरटाईजमेंटके जरिए तीन गुना तक का रेवेन्यु जनरेट कर लेती हैं.

कस्टम ऑडियंस

इस प्रणाली में एडवरटाइजर उन यूजर्स को टारगेट करते हैं जो पहले ही उनके किसी प्रोडक्ट को खरीद चुके हों या फिर उनके वेबसाइट्स पर आ चुके हों. इस प्रणाली में एडवरटाइजर्स डाउनलोड किए गए एप्स या फिर आपके ईमेल आईडी के जरिए आप तक पहुंचते हैं. उदाहरण के लिए, मान लिजिए आपने नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन ले रखा है, ऐसे में जब आप फेसबुक पर लॉग-इन करेंगे तो आपके नेटफ्लिक्स पर आने वाले दूसरे प्रोग्राम का एडवरटाईजमेंट देखने को मिल सकता है. या आपने घड़ी खरीदने के लिए किसी वेबसाइट्स या एप में अपनी ई-मेल आईडी का प्रयोग किया है, तो आपको अपने मेल में उसी घड़ी से संबंधित दूसरे प्रोडक्ट्स के एड दिखेंगे. इस प्रणाली का फेसबुक पर बहुत ज्यादा प्रयोग होता है, जिसकी मदद से विज्ञापनदाता दूसरे राष्ट्रों में सरलता से अपनी ऑडियंस को खोज पाते हैं.

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