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बड़ा सवाल : अगर 71 नियुक्तियां अवैध हैं तो सिर्फ 9 सलाहकारों को क्यों हटाया ?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने दिल्ली सरकार के 9 सलाहकारों की नियुक्तियों को रद्द किए जाने पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा जब नवंबर 2016 को शुंगलू कमेटी ने दिल्ली सरकार में 71 नियुक्तियों को अवैध बताया है तो मात्र सात ही को क्यों हटाया गया।
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माकन ने इसके पीछे केंद्र व दिल्ली सरकार की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कांग्रेस को कमजोर करने का षडयंत्र बताया है।

संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए माकन ने कहा कि आप पार्टी राघव चढडा तथा अतिशी मर्लिना जैसे लोगों को जनता की सहानूभूति दिलाकर 2019 में लोकसभा का चुनाव लड़वाना चाहती है। इसी कारण केंद्र सरकार ने आप पार्टी के इशारे पर ही उक्त नियुक्यिं रद्द की है।

उन्होंने कहा जब शुंगलु कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 28 नवंबर 2016 को दिल्ली के उपराज्यपाल को दे दी थी और 9 सलाहकारों को हटाने का आदेश अप्रैल 2018 में इतनी देरी से क्यों आया।

माकन ने कहा कि जबसे राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने है तब से कांग्रेस का ग्राफ बड़ी तेजी से उपर बढ़ रहा है जिसके कारण भाजपा बुरी तरह से भयभीत है। उन्होंने कहा कि आप पार्टी और भाजपा आपस मिली हुई हैं और कांग्रेस को नुकसान पहुचाने के लिए भाजपा आप पार्टी की मदद कर रही है ताकि दिल्ली में आने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की वोट में सैंध लगाई जा सके।

माकन ने अतिशी मर्लिना का उदाहरण देते हुए कहा कि उनको प्रतिमाह एक रुपये के वेतन पर उपमुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया था जबकि राघव चढडा को वितमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया था। शुंगलु कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में उनके बारे में क्लोस चेप्टर लिखा था क्योंकि उनकी नियुक्ति केवल ढाई महीने के लिए हुई थी।

माकन ने कहा कि जब राघव चढडा की नियुक्ति केवल ढाई महीने के लिए थी तो उनको 9 सलाहकारों के साथ क्यों हटाया गया। इसके पीछे आप पार्टी और भाजपा की मंशा साफ नजर आती है कि दोनो मिले हुए है।

माकन ने कहा कि बड़े आश्चर्य की बात है मोटा वेतन लेने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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