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ताजमहल के संरक्षण में लापरवाही

डा. राधेश्याम द्विवेदी
ताजमहल का इतिहास :- ताजमहल शाहजहां की तीसरी बेगम मुमताज महल की मज़ार है। मुमताज के गुज़र जाने के बाद उनकी याद में शाहजहां ने ताजमहल बनवाया था। कहा जाता है कि मुमताज़ महल ने मरते वक्त मकबरा बनाए जाने की ख्वाहिश जताई थी जसके बाद शाहजहां ने ताजमहन बनावाया। ताजमहल को सफेद संगमरमर से बनवाया गया है। इसके चार कोनों में चार मीनारे हैं। शाहजहां ने इस अद्भूत चीज़ को बनवाने के लिए बगदाद और तुर्की से कारीगर बुलवाए थे। माना जाता है कि ताजमहल बनाने के लिए बगदाद से एक कारीगर बुलवाया गया जो पत्थर पर घुमावदार अक्षरों को तराश सकता था। बुखारा शहर से कारीगर को बुलवाया गया था, वह संगमरमर के पत्थर पर फूलों को तराशने में दक्ष था। वहीं गुंबदों का निर्माण करने के लिए तुर्की के इस्तम्बुल में रहने वाले दक्ष कारीगर को बुलाया गया और मिनारों का निर्माण करने के लिए समरकंद से दक्ष कारीगर को बुलवाया गया था। और इस तरह अलग-अलग जगह से आए करीगरों ने ताजमहल बनाया था। ई. 1630 में शुरू हुआ ताजमहल के बनने के काम करीब 22 साल तक चला। इसे बनाने में करीब 20 हजार मजदूरों ने योगदान दिया। यमुना नदी के किनारे सफेद पत्थरों से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर ‘ताजमहल’ आज ना केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। प्यार की इस निशानी को देखने के लिए दूर देशों से हजारों सैलानी यहां आते हैं।
‘प्यार का प्रतीक’ माने जाने वाले ताजमहल की खूबसूरती जितनी चर्चा में रहती है उतनी ही इसके बनने की कहानियां चर्चा में रहती हैं। ताजमहल को बनाने को लेकर अलग-अलग मिथ हैं। कहा जाता है कि मुमताज की याद में बनायी गई इस खूबसूरत इमारत जैसी कोई और इमारत ना बने इसलिए शाहजहां ने कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे। ताजमहल को बनाने में करीब 20 हजार मजदूरों ने योगदान दिया था। और इसका काम करीब 22 साल तक चला। कारीगरों के हाथ कटवाने की एक और भी कहानी बताई जाती है। माना जाता है कि शाहजहां ने कारीगरों के हाथ नहीं कटवाए थे बल्कि उनसे ताउम्र काम न करने का वादा लिया था। जिसके बदले में उन्हें जिंदगी भर वेतन दिया गया था। वहीं एक मिथक ये भी है कि शाहजहां ने ताजमहल ख्वाब में देखकर बनवाया था, लेकिन ताजमहल के नक्शे के हिसाब से इतिहासकारों की मानें तो इसके डिजाइन के लिए पूरी दुनिया के वास्तुशास्त्रों की मदद ली गई थी। लेकिन इसका सटीक डिजाइन किसने तैयार किया था, इसके बारे में कोई सबूत नहीं है। ताजमहल को लेकर ऐसे ही कई मिथक हैं जिनके बारे में कई तरह की कहानियां कही जाती हैं। ताजमहल शाहजहां की तीसरी बेगम मुमताज महल की मज़ार है। मुमताज के गुज़र जाने के बाद उनकी याद में शाहजहां ने ताजमहल बनवाया था। कहा जाता है कि मुमताज़ महल ने मरते वक्त मकबरा बनाए जाने की ख्वाहिश जताई थी जसके बाद शाहजहां ने ताजमहन बनावाया। ताजमहल को सफेद संगमरमर से बनवाया गया है। इसके चार कोनों में चार मीनारे हैं।
विशेषज्ञों की मदद से ताज बना :-शाहजहां ने इस अद्भूत चीज़ को बनवाने के लिए बगदाद और तुर्की से कारीगर बुलवाए थे। माना जाता है कि ताजमहल बनाने के लिए बगदाद से एक कारीगर बुलवाया गया जो पत्थर पर घुमावदार अक्षरों को तराश सकता था।इसी तरह बुखारा शहर से कारीगर को बुलवाया गया था, वह संगमरमर के पत्थर पर फूलों को तराशने में दक्ष था। वहीं गुंबदों का निर्माण करने के लिए तुर्की के इस्तम्बुल में रहने वाले दक्ष कारीगर को बुलाया गया और मिनारों का निर्माण करने के लिए समरकंद से दक्ष कारीगर को बुलवाया गया था। और इस तरह अलग-अलग जगह से आए करीगरों ने ताजमहल बनाया था।
ताजमहल की दो मीनारें धराशायी, कलश भी गिरे :- तेज रफ्तार से आए तूफान से ताजमहल में भारी नुकसान हुआ है। यहां की दो मीनारें गिर गईं। एक रॉयल गेट और दूसरी दक्षिणी के गेट की मीनार गिरी है। यहां लगे कलश भी गिर कर टूट गए। इसके अलावा मुख्य गुंबद पर लगे कुछ पत्थर भी टूटकर नीचे गिर गए। वहीं फोरकोर्ट में खड़ा नीम का पेड़ भी धराशायी हो गया।पुरातत्व विभाग के अधिकारी देर रात तक मौके पर पहुंचकर नुकसान का आंकलन करने में जुटे हुए थे।ताजमहल के इन गेटों का निर्माण 1631 से 1638 के बीच हुआ था। इनमें अभी कुछ दिन पूर्व छह मार्च को रायल गेट के कुछ पत्थर टूटकर नीचे गिरे थे। बुधवार को तेज आंधी में गेट के साइड की मीनार भरभराकर नीचे गिर पड़ी। इसके अलावा दक्षिणी गेट की भी एक मीनार टूटकर नीचे गिर गई। वहीं फोरकोर्ट में लगा वर्षों पुराना नीम का एक पेड़ भी तूफान की भेंट चढ़ गया। इसके किनारे बना चबूतरा तहस-नहस हो गया। रायल गेट और दक्षिणी गेट पर लगे कलश टूटकर नीचे गिर गए। ताजमहल के मुख्य गुंबद पर लगे कुछ पत्थर भी तेज आंधी में नीचे आ गिरे। अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. भुवन विक्रम ने बताया कि मीनारों और पेड़ के गिरने के कारण काफी नुकसान हुआ है। नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। आशंका जताई कि आंधी से कुछ और भी नुकसान हुआ होगा। इसका भी पता लगाया जा रहा है। कर्मचारियों को मौके पर भेज दिया गया है
मीनारों को ठीक करने में खर्च करोड़ों में :- बवंडर ने विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल को भारी नुकसान पहुंचाया। दो घंटे में ही स्मारक के कई हिस्सों को तहस-नहस कर दिया। इसमें आठ मीनारें गिरकर टूट गईं। दर्जनों पेड़ धराशायी हो गए। ताजमहल के इतिहास में इतना नुकसान कभी नहीं पहुंचा। तूफान आने पर जब कभी पत्थर टूटे कलश गिरा या फिर गुलदस्ते गिर गए, लेकिन इस बार जो तबाही हुई वह इतिहास में दर्ज हो गई। 1632 से 1648 के बीच बने ताजमहल के बाद पहली बार स्मारक की मीनारों को नुकसान पहुंचा है। इस तबाही में आठ मीनों ध्वस्त हो गईं। इनमें एक-एक रॉयल और दक्षिणी गेट की तथा सहेली बुर्ज की छह मीनारें पूरी तरह से नष्ट हो गईं। स्मारक के फोरकोर्ट से लेकर गार्डन तक में खड़े कई पेड़ पूरी तरह से टूट गए। शाही मस्जिद की बुर्जी भी तूफान की भेंट चढ़ गई। दिव्यांगों के लिए बनाए गए रैंप को भी काफी नुकसान पहुंचा है। पश्चिमी गेट पर लगा एक पत्तर और स्मारक के कुछ अन्य हिस्सों के भी पत्तर भरभराकर गिर गए। पुरातत्व विभाग तूफान से ताजमहल में हुए भारी नुकसान का आंकलन कर रहा है। अभी तक जो आंकलन किया गया है उसके अनुसार सिर्फ ताजमहल में ही एक करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। एएसआई के संयुक्त निदेशक जाह्नवी शर्मा ने बताया कि ताजमहल में भारी नुकसान हुआ है। ये पहले कभी नहीं देखा गया। इसका काम तत्काल शुरू कराया जाएगा।

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Dr.Radheyshyam Dwivedi (Bureau Chief) :