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एडवरटाईजमेंट के पीछे किन उपायों का होता है इस्तेमाल

आप जब किसी वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या एप्स को एक्सेस करते हैं, तो आपको कई सारे एडवरटाईजमेंट दिखाई देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये एडवरटाईजमेंट आपको किस आधार पर दिखाए जाते हैं? क्या आपने कभी जानना चाहा है कि जिस वस्तु को अभी आप कुछ देर पहले किसी ऑन लाइन वेबसाइट्स पर सर्च कर रहे थे, उसी सामान का एडवरटाईजमेंट आपको दूसरे वेबसाइट्स पर दिखने लगता है. हम आपको बताएंगे कि वेबसाइट्स फेसबुक पर एडवरटाईजमेंट किस तरह पेश किए जाते हैं. इसके साथ बताएंगे कि वो कौन सी एडवरटाईजमेंट प्रणाली हैं जिसे फेसबुक पर विज्ञापनदाता अपने यूजर्स को टारगेट करने के लिए प्रयोग करते हैं.

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फेसबुक या अन्य किसी भी प्लेटफॉर्म पर जब आप लॉग इन करते हैं, तो आपकी कई जानकारियों को संबंधित प्लेटफॉर्म, विज्ञापनदाताओं के साथ साझा करता है. आपकी जानकारियों के मुताबिक एडवरटाइजर्स आपको कई श्रेणियों में बांटतें हैं. इन श्रेणियों में आपकी आदतों, पसंद  खरीदारी के आधार पर आपको डाला जाता है. इस प्रणाली से विज्ञापनदाता आपको टारगेट करते हैं.

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डायनेमिक्स एड

फेसबुक ने हाल में एक नए तरफ की एडवरटाईजमेंट प्रणाली को प्रारम्भ किया है. इस प्रणाली में उन यूजर्स को टारगेट किया जाता है जो किसी सामान में अपनी रूची को जाहिर कर चुके होते हैं.डायनेमिक्स एड में रीटारगेटिंग(Retargeting) तरीके का प्रयोग किया जाता है, जो कई बार यूजर्स के लिए कठिनाई का सबब भी बन जाता है.

आसान भाषा में समझाएं तो मान लीजिए आपने एक पर्स औनलाइन वेबसाइट पर देखा. अब आपको पर्स पसंद आया कि नहीं या आप उसे खरीदना चाहते हैं कि नहीं ये जाने बिना एडवरटाईजमेंट का एल्गोरिथ्म ऐसा सेट होता है कि अब उसी पर्स को एडवरटाईजमेंट आपको दूसरी वेबसाइट्स पर दिखने लगेगा. डायनेमिक एड इस प्रणाली को एक कदम ऊपर ले जाते हुए आपको उसी पर्स पर 10 प्रतिशत डिस्काउंट जैसे कूपन दिखाने लगेगा. एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां इन एडवरटाईजमेंट के जरिए तीन गुना तक का रेवेन्यु जनरेट कर लेती हैं.

कस्टम ऑडियंस

इस प्रणाली में एडवरटाइजर उन यूजर्स को टारगेट करते हैं जो पहले ही उनके किसी प्रोडक्ट को खरीद चुके हों या फिर उनके वेबसाइट्स पर आ चुके हों. इस प्रणाली में एडवरटाइजर्स डाउनलोड किए गए एप्स या फिर आपके ईमेल आईडी के जरिए आप तक पहुंचते हैं. उदाहरण के लिए, मान लिजिए आपने नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन ले रखा है, ऐसे में जब आप फेसबुक पर लॉग-इन करेंगे तो आपके नेटफ्लिक्स पर आने वाले दूसरे प्रोग्राम का एडवरटाईजमेंट देखने को मिल सकता है. या आपने घड़ी खरीदने के लिए किसी वेबसाइट्स या एप में अपनी ई-मेल आईडी का प्रयोग किया है, तो आपको अपने मेल में उसी घड़ी से संबंधित दूसरे प्रोडक्ट्स के एड दिखेंगे. इस प्रणाली का फेसबुक पर बहुत ज्यादा प्रयोग होता है, जिसकी मदद से विज्ञापनदाता दूसरे राष्ट्रों में सरलता से अपनी ऑडियंस को खोज पाते हैं.

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