Wednesday , September 19 2018
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इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशनों के लिए लाइसेंस महत्वपूर्ण नहीं

ऊर्जा मंत्रलय ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी चार्जिग को सेवा के रूप में वर्गीकृत किया है. मंत्रालय के इस कदम से इन वाहनों के बैटरी चार्जिग स्टेशनों के परिचालन के लिए किसी लाइसेंस की आवश्यकता नहीं रहेगी. इससे इलेक्ट्रिक-वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. बिजली कानून के तहत बिजली के ट्रांसमिशन, वितरण और कारोबार के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है. इसलिए सभी इकाइयों को उपभोक्ताओं को बिजली बेचने के लिए लाइसेंस लेना पड़ता है.

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मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण में बोला है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिग के दौरान स्टेशन बिजली ट्रांसमिशन, वितरण या कारोबार का कोई कार्य नहीं करता. इसलिए चार्जिंग स्टेशन के जरिये वाहनों की बैटरी की चार्जिग के लिए बिजली कानून, 2003 के तहत किसी लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी.

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इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्मातओं के संगठन एसएमइलेक्ट्रिकवी के निदेशक सोहिंदर गिल ने गवर्नमेंटकी इस फैंसले को एक अच्छा  प्रगतिशील कदम बताया है. उन्होंने बोला कि राष्ट्र में चार्जिंग पारिस्थितिकी बनाने की दिशा में यह एक बड़ी कठिनाई थी. एसएमइलेक्ट्रिकवी ने गवर्नमेंट ने जमीन अधिग्रहण सहित अन्य मुद्दों पर भी ध्यान देने को बोला है. इस स्पष्टीकरण में हालांकि अन्य जानकारी नहीं मिली है.

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जिस तरह राष्ट्र में पेट्रोल  डीजल से चलने वाली गाड़ियों की वजह से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है ऐसे में अगर सही समय पर इसकी रोकधाम नहीं की गइलेक्ट्रिक तो वो दिन दूर नहीं जब हम सांस लेने के लिए भी तरसेंगे, यह सिर्फ गवर्नमेंट की ही जिम्मेदारी नहीं है बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हम सबको भी प्रदूषण कम करने में काम करने होंगे.

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