Tuesday , September 25 2018
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कठुआ के मामले में एक बहुत बड़ी कड़ी है

मुज़फ़्फ़रनगर के जिस लड़के पर कठुआ जाकर बलात्कार करने का आरोप लगा है वो वारदात वाले दिन मुज़फ़्फ़रनगर के ही एक कॉलेज में इम्तिहान दे रहा था ऐसे में सवाल ये है कि अगर उसने कठुआ में बलात्कार किया है तो फिर वो उसी समय मुज़्फ़्फरनगर में इम्तिहान कैसे दे सकता है?

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कश्मीर की अपराध ब्रांच ने अपनी चार्जशीट में ये भी लिखा है कि बलात्कार करने के लिए Bsc Agriculture का एक विद्यार्थी मेरठ से जम्मू आया  चार्जशीट में बोला गया है कि 12 जनवरी को विशाल नाम का ये विद्यार्थी जम्मू में मौजूद था  उसने भी देवीस्थान में बलात्कार किया लेकिन हैरानी की बात ये है कि इम्तिहान केंद्र में उस विद्यार्थी की उपस्थिति दर्ज है  हकीकत क्या है ये जानने के लिए हमने यूपी के मुजफ्फरनगर में उस इम्तिहान केंद्र का भी दौरा किया

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16 दिसंबर 2012 को निर्भया कांड हुआ  पूरे राष्ट्र में इस मामले को लेकर बहुत आक्रोश था  ऐसा लगा कि राष्ट्र में एक क्रांति हो रही है  अब राष्ट्र में कभी स्त्रियों पर अत्याचार नहीं होंगे लेकिन निर्भया कांड के बाद से यानी 16 दिसंबर 2012 के बाद से अब तक आज 16 अप्रैल 2018 तक पूरे राष्ट्र में बलात्कार के करीब 1 लाख 83 हज़ार मामले दर्ज हो चुके हैं 

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हमारे पास NCRB के 31 दिसंबर 2016 तक के आंकड़े हैं   हमने साल 2013 से साल 2016 के बीच का औसत निकालकर आज तक के आंकड़े यानी 16 अप्रैल 2018 तक के आंकड़ों का अनुमान लगाया है   इस हिसाब से हमारे राष्ट्र में हर साल बलात्कार के 36 हज़ार केस दर्ज होते हैं  निर्भया कांड से लेकर कठुआ कांड तक हमारे राष्ट्र में हर दिन बलात्कार के 99 केस दर्ज हुए हैं  यानी राष्ट्र में हर 15 मिनट में बलात्कार की एक वारदात हुई है  सबसे बड़ी बात ये है कि बलात्कार के 95 फीसदीमामलों में बलात्कार का आरोपी, बलात्कार के पीड़ित का परिचित ही होता है  इसमें पड़ोसी रिश्तेदार भी शामिल है 

यानी अगर देखा जाए तो बलात्कार एक सामाजिक समस्या है जिसे हल करने के लिए कानून की नहीं लोगों की सोच में परिवर्तन करने की आवश्यकता है  अगर लोगों को एजुकेशन के माध्यम से अच्छे संस्कार नहीं दिए जाएंगे उनको नैतिक एजुकेशन नहीं दी जाएगी तो कोई भी कानून बलात्कार की समस्या को समाप्त नहीं कर सकता सड़कों पर कैंडल मार्च निकालने से ये समस्या नहीं सुलझेगी

हमारा देश, धरने-प्रदर्शन  आंदोलनों का शौकीन है  हमारे राष्ट्र में लोगों को अपनी छुट्टी वाले दिन आंदोलन करने का शौक है  जुलूस निकालना आज हमारे राष्ट्र के बहुत सारे लोगों का पसंदीदा टाइम पास है  ये एक फैशन बन चुका है  हमारे राष्ट्र के Celebrities, अक्सर designer प्रदर्शन करने का मौका ढूंढते रहते हैं   Selective तरीके से विरोध प्रदर्शन करते हैं 

सच्चाई ये है कि इस तरह के designer Protest करने वाले ये लोग नकली हैं  ऐसे लोगों का विरोध प्रदर्शन एक साप्ताहिक Picnic की तरह है   आजकल तो लोग छोटे-छोटे बच्चों को लेकर इसमें शामिल होते हैं  Social Media पर हमें ऐसी फोटोज़ भी देखने को मिली जिसमें प्रदर्शनकारियों ने अपने बच्चों का प्रयोग किया  कई बच्चे Poster हाथों में लिए खड़े नज़र आए  इन Posters में लिखा था ‘Am I Next’  ये आंदोलन का एक वीभत्स उपाय है है जिसमें बच्चों के बचपन से खिलवाड़ किया जा रहा है  इन बच्चों को बलात्कार का मतलब तक नहीं पता है लेकिन designer विरोध को प्रभावशाली बनाने के लिए, बच्चों की मासूमियत का प्रयोग किया जा रहा है अगर आप इन designer प्रदर्शनकारियों से ये सवाल पूछें कि क्या इन्होंने, अपने ज़िंदगी में कभी किसी लड़की के साथ हो रही छेड़खानी का विरोध किया है तो ज़्यादातर लोगों के पास, शायद कोई जवाब नहीं होगा कभी किसी बाल मज़दूर को स्कूल में भर्ती करवाया है ? बहुत सारे लोगों के घरों में तो कई बाल मेहनतकश लोग आज भी कार्य कर रहे होंगे

ऐसे प्रदर्शनों में बच्चों को शामिल करके उनका बचपन समाप्त किया जा रहा है  उनसे उनकी मासूमियत छीन ली जाती है ऐसे लोग अक्सर एक शब्द का बहुत प्रयोग करते हैं  ‘संघर्ष’  ये आज के दौर का सबसे designer शब्द है  साढ़े तीन अक्षर के इस शब्द  को लोग इस तरह प्रयोग करते हैं जैसे वो बहुत बड़े क्रांतिकारी हैं

वास्तविकता ये है कि आज कल हमारे राष्ट्र में क्रांतिकारियों का युग चल रहा है  लोग प्रसिद्ध होने के लिए दुर्घटनाओं का प्रयोग करते हैं  इस दौर में आंदोलन पैदा करने की होड़ लगी हुई है   यही वजह है कि राष्ट्र में बहुत सारे ऐसे क्रांतिकारी हैं जो किसी भी घटना के सही  गलत पहलुओं की जांच किए बिना खुद न्यायाधीश बन जाते हैं  कठुआ Case में भी इसी तरह का Designer विरोध प्रदर्शन किया गया
((आंदोलन का मतलब होता है जन-आक्रोश यानी जनता का गुस्सा  कोई आंदोलन तभी पास होता है, जब उसका उद्देश्य पवित्र होता है  उसे जनता के सभी वर्गों का समर्थन हासिल न हो 

आजकल हमारे राष्ट्र में हर किसी को क्रांतिकारी बनने का शौक है  लोग आंदोलनकारी बनने में बड़ा गर्व महसूस करते हैं  कुछ ऐसे Celebrities भी हैं जो हाथों में Poster लेकर अपनी फोटोज़Twitter  Facebook पर Post कर देने को भी बहुत बड़ी उपलब्धि समझते हैं  ))

((कठुआ मामले को बुद्धिजीवियों के एक वर्ग ने बहुत व्यवस्थित तरीके से सांप्रदायिक रंग देने की प्रयास की  ऐसे लोग किसी आंदोलन से पहले ये जानकारी हासिल करते हैं कि जिस लड़की के साथ बलात्कार जैसी वारदात हुई है उसका धर्म या जाति क्या है ? यानी इन लोगों का ध्यान बलात्कार के क्राइम पर नहीं होता है बल्कि वो इस बात पर अपने आंदोलन की किरदार तैयार करते हैं कि पीड़ित की जाति या धर्म क्या है ?  जिस पर आरोप लग रहे हैं उसकी जाति या धर्म क्या है ?

इसी वजह से ऐसे आंदोलन सच्चाई से बहुत दूर चले जाते हैं  क्योंकि इन आंदोलनों में ये लोग अपने पूर्वाग्रह का मिलावट कर देते हैं  एक बहुत जरूरी बात ये भी है कि ऐसे क्रांतिकारी लोग खुद पूर्वाग्रह से ग्रस्त होते हैं लेकिन हमेशा दूसरों पर ये आरोप लगाते हैं कि वो पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं 

Bollywood की कई अभिनेत्रियां, बलात्कार के विरूद्ध इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं हैं  इन अभिनेत्रियों ने अपने हाथों में Poster लिए   फोटोज़ Social Media पर Post कर दीं   फिर अपने मन मुताबिक एक धर्म विशेष के विरूद्ध Agenda चलाया गया  कश्मीर में पत्थरबाजी में जवान घायल हो जाते हैं  आतंकी हमलों में जवान शहीद हो जाते हैं लेकिन इन Designer आंदोलनकारियों ने कभी भी ऐसे मुद्दे पर कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया 

आपने देखा होगा बीते एक सप्ताह में कुछ विद्यार्थी संगठन भी आंदोलन में सक्रिय हो गए  इस तरह के संगठन अपने आंदोलन में विशेष तरीके के वाद्य यंत्रों का प्रयोग करते हैं  फिर वो क्रांति के गीत गाते हैं  लेकिन इन क्रांतिकारी गीतों से कभी कोई परिणाम नहीं निकलता

विचाराधारा के नाम पर बने हुए संगठनों के अतिरिक्त राजनीतिक पार्टियां भी स्त्रियों के विरूद्ध होने वाले अत्याचारों में अपने Vote बैंक की तलाश करते हैं  कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी उन्नाव गैंगरेप  कठुआ गैंगरेप केस में भी एक Mid Night March निकाला था इस March में भी कांग्रेस पार्टी के कई कार्यकर्ता अपने प्रिय नेताओं के साथ Selfie खिंचवाते नज़र आए  ये भी Designer Protest का ही एक प्रमाण है 

हमारे राष्ट्र में एक न्याय व्यवस्था है  वैसे तो ये सभी क्रांतिकारी  बुद्धिजीवी राष्ट्र की न्याय व्यवस्था में बहुत विश्वास होने की बात कहते हैं  लेकिन इनमें से कभी भी कोई न्यायालय के निर्णयका इंतज़ार नहीं करता  लोग सिर्फ अपने Agenda के हिसाब से अपने स्वार्थ सिद्ध करते हैं ))

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