Wednesday , April 25 2018
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हमारे राष्ट्र में आंदोलन पॉलिटिक्स व नेताओं का जन्मस्थान

हमारे राष्ट्र में आंदोलन पॉलिटिक्स  नेताओं का जन्मस्थान माना जाता है यानी पॉलिटिक्स की गंगोत्री है आंदोलन आज़ादी के बाद साल 1974 में राष्ट्र में संपूर्ण क्रांति के नाम से एक बहुत बड़ा आंदोलन हुआ  उस दौर के बड़े आदर्शवादी  सिद्धांतवादी राजनेता जय प्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था  लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का मतलब समझाते हुए बोला था कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियां शामिल हैं – राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक  आध्यात्मिक क्रांति  लेकिन इस क्रांति से राजनीतिक परिवर्तन के अतिरिक्त कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ  संपूर्ण क्रांति के माध्यम से समाजवादी विचारधारा के कई बड़े नेताओं को जन्म हुआ

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इन नेताओं ने भी चुनाव लड़कर सत्ता पर कब्ज़ा जमा लिया लेकिन सत्ता में आने के बाद वो जय प्रकाश नारायण के आदर्शों  सिद्धांतों को भूल गए  कई नेताओं को तो करप्शन के गंभीर मामलों में कारागार की सज़ा काटनी पड़ी  OBC वर्ग से आने वाले कई नेता जो एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर संपूर्ण क्रांति के लिए लड़ रहे थे  उन्होंने राजनीतिक शक्ति प्राप्त करने के बाद अपनी अलग-अलग पार्टियां बना लीं  यानी जय प्रकाश नारायण ने जिस आंदोलन की आरंभ की उससे सत्ता तो बदली लेकिन कोई आर्थिक, सामाजिक  सांस्कृतिक बदलाव नहीं हुआ  जेपी के बहुत सारे शिष्य आज बड़े बड़े बंगलों में रहते हैं, Branded कपड़े पहनते हैं, बड़ी बड़ी SUVs में घूमते हैं,  Business Class में सफर करते हैं

1989 से लेकर 1992 के बीच में अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया गया राष्ट्र भर के लोगों ने इस आंदोलन भाग लिया, रथ यात्राएं निकाली गईं  इस आंदोलन से भाजपा का उदय हुआ लेकिन विडंबना ये है कि आज 2018 तक भी अयोध्या में राम मंदिर नहीं बन पाया है  आज भी ये मामला न्यायालय में है

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इसके बाद साल 1990 में जब तत्कालीन पीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने का ऐलान कर दिया  OBC यानी अन्य पिछड़े वर्ग को भी आरक्षण दे दिया गया  तब सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों ने आरक्षण के विरूद्ध एक बड़ा आंदोलन किया था उस दौर में कई विद्यार्थियों ने आत्मदाह भी कर लिया था लेकिन वर्ग या जाति के आधार पर आरक्षण देने के विरूद्ध किया गया ये आंदोलन भी असफल हो गया था

वर्ष 2011  2012 में भी समाजसेवक अन्ना हज़ारे ने राष्ट्र में करप्शन के विरूद्ध एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया था इस आंदोलन ने भी राष्ट्र को कई नए नेता दिए  जिन्होंने मौका मिलते ही सत्ता पर कब्ज़ा जमा लिया  राष्ट्र में करप्शन विरोधी आंदोलन का मुख्य परिणाम आम आदमी पार्टी है लेकिन आम आदमी पार्टी के नेताओं पर भी करप्शन के कई आरोप लगे यानी आंदोलन का मूल मकसद पूरा नहीं हुआ

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में निर्भया गैंगरेप की घटना के बाद पूरे राष्ट्र में स्त्रियों पर हो रहे अत्याचार के विरूद्ध भी एक बड़ा आंदोलन हुआ था ये एक ऐसा आंदोलन था जिसमें लोग खुद सड़कों पर उतर आए थे  पूरे राष्ट्र में व्यापक स्तर पर बहुत बड़े विरोध प्रदर्शन हए थे  तब लोगों लगा था कि शायद कठोर कानून बनाने से बलात्कार  स्त्रियों पर होने वाले अत्याचार समाप्त हो जाएंगे लेकिन ये आंदोलन भी विफल हुआ  क्योंकि स्त्रियों पर आज भी तरह तरह के अत्याचार हो रहे हैंहिंदुस्तान में इन आंदोलनों के Fail होने की सबसे बड़ी वजह ये है कि लोग आंदोलन में शामिल तो होते हैं लेकिन कभी भी खुद को बदलने की प्रयास नहीं करते

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