Tuesday , September 25 2018
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कठुआ बलात्कार केस में 8 वर्ष की बच्ची की तस्वीर क्यों Viral कर दी गई?

हमारे राष्ट्र में हर वर्ष औसतन 36 हज़ार बलात्कार होते हैं,  इनमें से 95 प्रतिशत मामलों में कोई करीबी आदमी या जानकार ही बलात्कार करता है यानी ये एक सामाजिक समस्या है वैसे आज तक किसी को ये समझ में नहीं आया कि कौन सा बलात्कार Headline बनेगा  कौन सा नहीं? इसका आधार क्या है ? निर्भया की तस्वीर कभी सामने नहीं आई,  भी हज़ारों ऐसे बलात्कार केस हैं जिनमें पीड़ित की तस्वीर सामने नहीं आती लेकिन कठुआ बलात्कार केस में 8 वर्ष की बच्ची की तस्वीर तुरंत Viral कर दी गई  सोशल मीडिया पर इसे शेयर किया जाने लगा क्योंकि इस मामले को धार्मिक  राजनीतिक रंग देने से कुछ लोगों को लाभ मिल सकता था

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वर्ष की बच्ची की डेड बॉडी कठुआ में 17 जनवरी 2018 को मिली थी लेकिन ये मामला हेडलाइन्स में आया करीब 3 महीने के बाद सवाल ये है कि ऐसा क्यों हुआ? तीन महीने पहले इस बच्ची के साथ हुई हवस को लेकर किसी का दिल क्यों नहीं पसीजा ?इस पूरे मामले में सिर्फ तीन बिंदुओं पर ज़ोर देकर इसे प्रचारित किया गया

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पहला – ये दुष्कर्म मंदिर में हुआ
दूसरा – दुष्कर्मी हिंदू थे
 तीसरा बिंदु ये था कि पीड़ित बच्ची मुसलमान थी

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रेप जैसे क्राइम का कोई धर्म नहीं होता क्योंकि बलात्कार करने वाला ये नहीं देखता कि पीड़ित किस धर्म या जाति से है? लेकिन अगर किसी बलात्कार केस में राजनीतिक लाभ होता हुआ दिख रहा हो, तो बलात्कार भी धार्मिक हो जाते हैं  हमारे राष्ट्र में इन दिनों यही हो रहा है इस मामले को लेकर बहुत से लोग तो हिंदू होने पर भी शर्मिंदगी जता रहे हैं यानी बलात्कार को धार्मिक बनाकर आक्रोश दिखाया जा रहा है  इस आक्रोश की अग्नि से आंदोलन की मोमबत्तियां जलाई जा रही है लेकिन ये आंदोलन अंदर से खोखले हैं क्योंकि ये आंदोलन एजेंडे के हिसाब से होते हैं  बहुत Selective होते हैं

क्या आपको पता है कि 6 अप्रैल को गुजरात के सूरत में 11 वर्ष की एक बच्ची का मृत शरीर मिला था इस बच्ची के बॉडी पर चोट के 86 निशान थे  बलात्कार के बाद उसकी मर्डर कर दी गई थीअब तक इस लड़की के हत्यारे  दुष्कर्मी पकड़े नहीं गए हैं  ना ही इस बच्ची की पहचान हो पाई हैअब हमारा सवाल ये है कि क्या अभी तक आपको सोशल मीडिया पर इस बच्ची की तस्वीर दिखी? क्या आपको इस बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए कोई Hashtag Trend करता हुआ दिखाई दिया? क्या इस बच्ची के पक्ष में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का कोई Celebrity हाथों में पोस्टर लेकर ये कहता हुआ दिखा कि मैं शर्मिंदा हूं? ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है क्योंकि इस बच्ची के बलात्कार  मर्डर में राजनीतिक  धार्मिक एजेंडा ढूंढने की गुंजाइश नहीं है

इसी तरह से क्या आपको बिहार के रोहतास की उस 6 वर्ष की बच्ची के बारे में पता है, जिससे 10 अप्रैल को बलात्कार किया गया था  इस बच्ची से दुष्कर्म करने वाला मोहम्मद मेहराज 40 वर्ष का आदमी है,  ये उस लड़की का पड़ोसी था इस वक़्त इस लड़की की हालत बेकार है,  वो अस्पताल में जीवन  मौत के बीच प्रयत्न कर रही है पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया है लेकिन आपने सोशल मीडिया पर या किसी मेन स्ट्रीम मीडिया में इस लड़की की तस्वीर नहीं देखी होगी वैसे सोशल मीडिया पर इस लड़की के नाम से एक तस्वीर Viral हो रही है, लेकिन वो तस्वीर फर्ज़ी है

ऐसे ना जाने कितने बलात्कार पीड़ित हैं लेकिन उन्हें सिर्फ एक आंकड़े की तरह पेश किया जाता है लोग अपनी ज़िम्मेदारी से मुक्ति पा लेते हैं रेप की किसी घटना पर अगर राष्ट्र में कोई सबसे बड़ा आंदोलन हुआ है, तो वो है निर्भया गैंगरेप के बाद हुआ आंदोलन दिसंबर 2012 में दिल्ली में निर्भया के साथ 6 लोगों ने गैंगरेप किया था उस दौर में पूरे राष्ट्र में एक आंदोलन खड़ा हो गया था लोग सड़कों पर उतर आए थे लेकिन आपको आज तक निर्भया का वास्तविक नाम पता नहीं होगाउसकी फोटो भी शायद आपने कभी नहीं देखी होगी निर्भया के साथ हवस करने वालों में एक नाबालिग भी था निर्भया के बाकी दोषी तो कारागार में हैं, लेकिन ये नाबालिग सिर्फ 3 वर्ष में छूट गया था वो लड़का एक मुसलमान था  हम उसका नाम आपको नहीं बता रहे हैं लेकिन कठुआ के मामले में आपको सबका नाम पता होगा

Indian Penal Code की धारा 228-A में मीडिया के लिए एक प्रावधान है  जिसके मुताबिक मीडिया किसी भी बलात्कार पीड़ित की पहचान उजागर नहीं कर सकता उसका चेहरा नहीं दिखा सकता लेकिन कठुआ बलात्कार  हत्या केस में मीडिया ने इस कानून को भी नहीं माना मीडिया के बड़े बड़े पत्रकारों ने 8 वर्ष की बच्ची की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की

असल में मीडिया एक ख़ास तरह के एजेंडे का शिकार हुआ है एजेंडा ये था कि इस बलात्कार  हत्याकेस को धार्मिक रंग देना है इसके लिए कुछ लोगों ने पहले पीड़ित लड़की की फोटोज़ सोशल मीडिया पर Share कीं उसका नाम  धर्म बताया गया उसके बलात्कारियों का नाम  उनका धर्म बताया गया  जब सोशल मीडिया पर तरह तरह के Hashtag Trend करने लगे, तो फिर Mainstream Media भी इस एजेंडे में फंस गया  उसने पीड़ित लड़की का नाम  उसकी फोटो अपनी Reports में दिखानी प्रारम्भ कर दी

जिस तरह आतंकी का कोई धर्म नहीं होता, उसी तरह दुष्कर्म करने वाले वाले को भी धर्म के चश्में से नहीं देखा जा सकता  कठुआ के मामले में एक ऐसा छिपा हुआ एजेंडा चलाया जा रहा है, जिसके तहत हिंदुओं को दुष्कर्मी बोला जा रहा है इस पूरे मामले को ऐसा रंग दिया गया कि विदेशी मीडिया अपनी Reports में यहां तक कह रहा है कि कठुआ में Hindu दुष्कर्मी ने एक मुस्लिम लड़की का बलात्कार कर दिया ये वही विदेशी मीडिया है, जो अपने राष्ट्र में होने वाले बलात्कारों में कभी किसी का धर्म नहीं बताता अगर कोई मुस्लिम आदमी किसी क्रिश्चियन महिला से बलात्कार करता है, तो ये विदेशी मीडिया क्रिमिनल का धर्म नहीं बताता, बल्कि उसे ASIAN MAN कहता है

लेकिन जैसे ही कठुआ में कोई घटना होती है, या यूपी के दादरी में अखलाक की मर्डर होती है, यही विदेशी मीडिया तुरंत हिंदुओं को मुस्लिमों का दुष्कर्मी  उनका किलर बता देता है
ये एक ख़ास तरह की Selective Reporting है

1990 में जब कश्मीर से कश्मीर पंडितों की मर्डर करके उन्हें भगाया गया था, तब किसी विदेशी मीडिया ने ये नहीं लिखा कि कश्मीरी मुसलमानों ने कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार किया हिंदू धर्म की एक बड़ी विशेषता य़े है कि वो आत्म चिंतन करना सिखाता है  इसीलिए हिंदुओं को अपने धर्म की आलोचना करने में भी कोई परहेज़ नहीं होता   हिंदू धर्म में पश्चाताप को बहुत महत्व दिया गया है कुछ लोग शायद इन्हीं बातों का लाभ उठा लेते हैं

ऐसे दशा में जब कठुआ जैसी कोई घटना होती है, तो हिंदू खुद को दोषी मानने लगते हैं बहुत सारे लोग तो हिंदू धर्म को ही दोषी मानने लगते हैं हमारे कथित रूप से पढ़े-लिखे अभिनेता, बुद्धिजीवी, Celebrity  डिज़ाइनर पत्रकार तो हाथों में पोस्टर लेकर सोशल मीडिया पर अपना आक्रोश जाहीरकरते हैं  उन Posters में लिखा होता है कि हम हिंदू होने पर शर्मिंदा हैं कठुआ की घटना के बाद ये एजेंडा भी ज़ोर शोर से चल रहा है

लेकिन ज़रा सोचिए कि क्या कठुआ की उस बच्ची से बलात्कार इसलिए हुआ कि वो मुसलमान थी? बलात्कार जैसे क्राइम का कोई धर्म नहीं होता  कोई भी Rapist पीड़ित का धर्म देखकर बलात्कारनहीं करता इसलिए इस क्राइम  धर्म को आपस में मिलाना अच्छा नहीं है सच्चाई ये है कि चाहे संसार का कोई भी राष्ट्र हो,  कोई भी धर्म हो, हर स्थान आपको दुष्कर्म के मामले देखने को मिल जाएंगे हर समाज, हर राष्ट्र  हर धर्म में हत्यारे  दुष्कर्मी होते हैं लेकिन इसके लिए उनके धर्म को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता इसलिए कठुआ में हुए इस दर्दनाक बलात्कार  मर्डर के लिए हिंदू धर्म को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है क्राइम को क्राइम की तरह देखना चाहिए  हर बलात्कार पीड़ित को इंसाफ मिलना चाहिए

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