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मक्का मस्जिद निर्णय से मिली सियासी संजीवनी

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्घारमैया के लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा संबंधी सियासी दांव में बुरी तरह उलझी बीजेपी को मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में एनआईए न्यायालय के निर्णयसे सियासी संजीवनी दे दी है. पार्टी की रणनीति इस निर्णय को लिंगायत मामले से जोड़ कर कांग्रेस पार्टी को हिंदू विरोधी साबित करने की है. इसी महीने की अंतिम सप्ताह से खुद को विधानसभा चुनाव प्रचार में झोंक रहे पीएम नरेंद्र मोदी इसी निर्णय के आधार पर कांग्रेस पार्टी पर सियासी वार करेंगे. पार्टी को उम्मीद है कि इस रणनीति के सहारे वह सॉफ्ट हिंदुत्व की पॉलिटिक्स कर रहे कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को सियासी मोर्चे पर घेरने में सफल होगी.
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दरअसल सिद्घारमैया द्वारा लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने संबंधी निर्णय के बाद संघ ने इस दांव का हवा निकालने के लिए अपने 30 वरिष्ठ प्रचारकों को मैदान में उतारा है. संघ के वरिष्ठ प्रचारक बीते दो सप्ताह से इस समुदाय से जुड़े मठ  प्रमुख लोगों के संपर्क में हैं. प्रचारक यह बताने की प्रयास कर रहे हैं कि अलग धर्म का दर्जा देने से लिंगायत समुदाय का भला होने के बदले उनका नुकसान होगा. इसके अतिरिक्त हिंदू धर्म भी निर्बल होगा. वरिष्ठ प्रचारक खासतौर से कर्नाटक के तटीय  उत्तरी इलाके में हैं जहां इस समुदाय की संख्या काफी है.

चुनाव अभियान से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक एनआईए न्यायालय द्वारा हिंदू आतंकवाद की थ्योरी को खारिज किए जाने के बाद पार्टी के लिए कांग्रेस पार्टी को कटघरे में खड़ा करना सरल होगा. पीएम राज्य में करीब दो दर्जन रैलियां करेंगे. इन रैलियों में पहले हिंदू आतंकवाद के जरिए हिंदुओं को बदनाम करने  लिंगायत मामले में हिंदुओं को बांटने की साजिश का आरोप लगाएंगे.

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दलित वोटरों पर भी निगाह 
पार्टी ने कांग्रेस पार्टी के परंपरागत मतदाता माने जाने वाले दलितों के वोट बैंक में सेंध लगाने की भी अलग से रणनीति बनाई है. इसके तहत दलितों से जुड़ी लंबनी  वोद्दार जातियों को टिकट दिया है. ये जातियां वाम पक्ष से जुड़ी हैं  दलितों के दूसरे धड़े दक्षिण पक्ष की जातियों के मुकाबले शैक्षिक आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हैं.

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