Monday , November 19 2018
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जनआक्रोश से निर्भया आंदोलन की याद ताजा

राजधानी सहित देशभर में बच्चियों से बलात्कार की घटनाओं को लेकर चल रहे आंदोलन ने एक बार फिर निर्भया बलात्कार घटना  उसके विरोध में हुए आंदोलन की याद ताजा कर दी. कानून में संशोधन हुआ, लेकिन उस पर पूरी तरह से अमल न होने के कारण ही आंदोलन पुन: प्रारम्भ हो गया है. राजधानी में आंदोलन की बागडोर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने संभाली है.
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दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बनते ही मालीवाल ने बलात्कार पीड़ितो के अतिरिक्त एसिड पीड़ित, बच्चियों और स्त्रियों को बंधक बनाकर कार्य करवाने, जबरन देह व्यापार के विरूद्ध अभियान प्रारम्भ कर रखा है. हाल ही में उन्होंने एक माह का बलात्कार रोको अभियान चलाकर लोगों को जागरूक ही नहीं किया, बल्कि करीब 50 हजारों लोगों के हस्ताक्षर करवाकर पीएम नरेंद्र मोदी को ज्ञापन देकर बच्चियों से बलात्कार करने वालों को फांसी की सजा और मामलों के जल्द निपटारे के लिए मांग रखी.

अभी कानून में संशोधन पर बात चल ही रही है कि उन्नाव और कठुआ बलात्कार मामलों में राष्ट्र को फिर हिलाकर रख दिया. स्वाति राजघाट पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गईं . उन्हें व्यापारी, सामाजिक संगठनों के अतिरिक्त हर पार्टी का भी समर्थन मिल रहा है. लोग पार्टी से ऊपर उठकर उनके अनशन को समर्थन दे रहे हैं. हर किसी के मन में बच्चियों से बलात्कार के आरोपियों के प्रति घृणा है  वे अपनी बच्चियों के भविष्य के प्रति चिंतित हैं.

समता स्थल पर आप पार्टी के अतिरिक्त बीजेपी और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता भी नजर आ रहे हैं.उनका कहना है कि वे किसी पार्टी के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि एक बेटी के बाप या मां के रूप में आए हैं.आज वे चिंतित हैं कि जब वे कार्य पर जाते है तो क्या उनकी बेटी स्कूल या घर पर सुरक्षित है या नहीं.उनका मानना है कि ऐसे आरोपियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया जाना चाहिए  कानून में ऐसा प्रावधान हो कि ऐसा क्राइम करने वाला क्राइम करने से डरे.  वसंत विहार गैंगरेप के आरोपियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन सजा पर अमल नहीं हो सका. इसका सीधा का कारण है कि कानून में ऐसी खामियां है, जिसका लाभ दोषी उठाते है. इन खामियों को दूर किया जाना महत्वपूर्ण है, ताकि बच्चियां सुरक्षित हो सके.

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