Monday , September 24 2018
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सुप्रीम कोर्ट न्यायधीश के निवास पर फायरिंग

पाकिस्तान के अपदस्थ पीएम नवाज शरीफ के खिलाफ करप्शन के मामलों की निगरानी कर रहे सुप्रीम न्यायालय के न्यायाधीश इजाजुल अहसन के निवास पर अज्ञात बंदूकधारियों पर आज गोलियां चलायीं जिसकी व्यापक निंदा की गई यहां मॉडल टाऊन में न्यायमूर्ति अहसन के निवास पर चलाई गई गोलियों से कोई हताहत नहीं हुआ सुप्रीम न्यायालय के बयान के अनुसार तड़के साढ़े चार बजे  प्रातः काल नौ बजे न्यायमूर्ति अहसन के निवास को निशाना बनाया गया इस घटना के पश्चात पाक के मुख्य न्यायाधीश मियां साकिब निसार न्यायमूर्ति अहसन के घर गये उन्होंने पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक आरिफ नवाज खान को तलब किया

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बयान के अनुसार मुख्य न्यायाधीश खुद ही स्थिति पर नजर रख रहे हैं एक फोरेंसिक टीम सबूत इकट्ठा करने के लिए घटना स्थल पर पहुंच गई है बैलेस्टिक विशेषज्ञ भी गोलीबारी की प्रकृति का पता लगाने के लिए बुलाये गये हैं पुलिस ऑफिसर इस बात की जांच कर रहे हैं कि यह निशाना बनाकर गोलीबारी की गई थी या हवाई फायरिंग थी

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पुलिस प्रवक्ता नियाब हैदर ने कहा, ‘‘ इलाइट फोर्स के कमांडो ने इलाके को घेर लिया है  जांच चल रही है ’’ उन्होंने बोला कि रेंजर्स न्यायमूर्ति अहसन के निवास पर तैनात किये गये हैं पीएम शाहिद खकान अब्बासी , पंजाब के CM शाहबाज शरीफ , पाक पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो , सुप्रीम न्यायालय बार एसोसिएशन तथा लाहौर न्यायालय बार एसोसिएशन ने इस घटना की निंदा की है

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प्रधानमंत्री ने संघीय  प्रांतीय अधिकारियों को आरोपियों को न्याय के कठघरे में लाने का आदेश दिया हैन्यायमूर्ति अहसन शीर्ष न्यायालय की उस पांच सदस्यीय पीठ के सदस्य थे जिसने पिछले वर्ष अहम पनामागेट प्रकरण की सुनवाई की थी  तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ को अयोग्य ठहरा दिया था

नवाज शरीफ अब कभी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
पाक के उच्चतम कोर्ट के शुक्रवार (13 अप्रैल) को एक ऐतिहासिक निर्णय के बाद राष्ट्र के अपदस्थ पीएमनवाज शरीफ ज़िंदगी भर पर किसी सार्वजनिक पद पर आसीन नहीं हो सकेंगे ‘द डॉन’ की समाचार के मुताबिक पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वमत से अपने निर्णय में संविधान के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए बोला कि किसी सार्वजनिक पद पर आसीन आदमी को आजीवन के लिए अयोग्य ठहराया जाता हैसंविधान के अनुच्छेद 62 (1)(एफ) के अनुसार सार्वजनिक पद पर आसीन आदमी को निश्चित शर्तों के अनुसार अयोग्य ठहराया जाता है, लेकिन अयोग्यता की अवधि तय नहीं की गयी है

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