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राज कपूर की मौत के बाद हसरत जयपुरी की हालत हो गई थी ऐसी

राज कपूर की फिल्मों में एक से बढ़कर हिट गाने देने के लिए गीतकार हसरत जयपुरी का नाम विशेष तौर पर जाना जाता है. उनका जन्म 15 अप्रैल 1918 को जयपुर में हुआ था. हसरत जयपुरी का वास्तविक नाम इकबाल हुसैन था. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अंग्रेजी में की. बाद में उन्होंने अपने दादा से उर्दू  परशियन भाषा सीखी. 20 वर्ष की आयु से ही हसरत जयपुरी ने लिखना प्रारम्भ कर दिया था. आज उनके जन्मदिन पर आइए हम आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं.
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हसरत जयपुरी ने आरंभ में बतौर बस कंडक्टर का कार्य किया, जिसके लिए उन्हें 11 रुपये हर महीने मिलते थे. हसरत जयपुरी मुशायरों में भी शिरकत करने लगे. एक मुशायरे में पृथ्वीराज कपूर ने उनको सुना  राज कपूर से मिलने की बात कही. राज कपूर ने उन्हें फिल्म ‘बरसात’ में मौका दिया अपने करियर का पहला गाना ‘जिया बेकरार है’ लिखा. उनका दूसरा गाना था ‘छोड़ गए बालम’.
फिल्म ‘बरसात’ में अपने इस गीत की कामयाबी के बाद हसरत जयपुरी गीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाने में पास हो गए. इसके बाद राजकपूर, हसरत जयपुरी  शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने कई फिल्मों मे एक साथ कार्य किया. हसरत जयपुरी की जोड़ी राजकपूर के साथ 1971 तक कायम रही.

संगीतकार जयकिशन के निधन  फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ और ‘कल आज  कल’ की नाकामयाबी के बाद राज कपूर ने हसरत जयपुरी की स्थान आनंद बख्शी को अपनी फिल्मों के लिए लेना प्रारम्भकर दिया हालांकि इससे हसरत जयपुरी  राज कपूर की दोस्ती में कोई फर्क नहीं पड़ा.

हर शख्स का एक दौर होता है, हसरत का भी एक दौर था. शैलेंद्र  जयकिशन की मौत के बाद वह बहुत अकेलापन महसूस करने लगे  राज कपूर के निधन के बाद तो वह बिल्कुल ही टूट से गए.उन्होंने लोगों से भी मिलना जुलना कम कर दिया था. 17 सितंबर 1999 को अपनी मौत से पहले कई वर्ष तक हसरत ने गुमनामी में ज़िंदगी बिताया.
हसरत जयपुरी को राधा नाम की हिन्दू लड़की से प्यार हो गया था लेकिन वह अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाए. उन्होंने लेटर के माध्यम से अपने प्यार का इजहार करना चाहा लेकिन उसे देने की हिम्मत वह नहीं जुटा पाए. बाद में राजकपूर ने उस लेटर में लिखी कविता ‘ये मेरा प्रेम लेटर पढ़कर तुम नाराज ना होना’ को अपनी फिल्म ‘संगम’ में लिया.
अपने 40 वर्ष के फिल्मी करियर में हसरत जयपुरी ने करीब 350 फिल्मों के लिए 2000 गीत लिखे.इन फिल्मों में ‘बरसात’, ‘मेरा नाम जोकर’, ‘आवारा’, ‘श्री 420’, ‘चोरी चोरी’, ‘अनाड़ी’, ‘जिस राष्ट्र में गंगा बहती है’, ‘राम तेरी गंगा मैली’ शामिल है. वर्ष 1966 में तेरी प्यारी प्यारी सूरत (फिल्म ससुराल)  1972 में जिंदगी एक सफर है सुहाना (फिल्म अंदाज) के लिए उन्हें फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला.
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